" /> शाई से कोई होप नहीं

शाई से कोई होप नहीं

जो होप यानि उम्मीदे थी वो शाई हो गई। यानि इतनी संकुचित हो गई कि अब कोई उम्मीद या होप ही नहीं रही। लिहाजा आवाज़ उठने लगी है कि उसे टीम में रखा ही क्यों जा रहा है? बल्लेबाज के रूप में वेस्टइंडीज की टीम में जगह पक्की कर चुके शाई होप को टेस्ट क्रिकेट में भी लगातार मौका दिया जा रहा है, लेकिन वे उन मौकों को भुना नहीं पा रहे हैं। उनके आंकड़े भी गवाही यही दे रहे हैं। दरअसल, १ मई २०१५ को शाई होप ने वेस्टइंडीज के लिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। इसके बाद से अब तक पांच साल हो गए हैं, लेकिन वे टेस्ट क्रिकेट में कंसिस्टेंट नहीं रहे हैं। कंसिस्टेंट को छोड़ दीजिए वे सिर्फ एक मैच में वेस्टइंडीज के लिए हीरो साबित हुए हैं, लेकिन करियर में खेले ३३ टेस्ट मैचों में से ३२ मैचों में वे ज्यादातर फेल ही साबित हुए हैं। यहां तक कि इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले उन्होंने इस बात को कबूल किया था कि वे अपना रिकॉर्ड सुधारेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शाई होप इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा समय में दूसरा टेस्ट मैच खेले। सीरीज के पहले मैच की दोनों पारियों में वे कुलमिलाकर २५ रन बना पाए। पहली पारी में वे ६४ गेंदों में १६ रन बनाकर आउट हुए, जबकि दूसरी पारी में २३ गेंदों में ९ रन बनाकर आउट हुए। हालांकि, ये मुकाबला वेस्टइंडीज की टीम जर्मन ब्लैकवुड की पारी के दम पर जीत गई थी, लेकिन दूसरे मैच की पहली पारी में भी शाई होप का कमोवेश यही हाल रहा और २५ रन बनाकर आउट हो गए।हैरानी होगी कि ३३ टेस्ट मैचों की ६१ पारियों में वे सिर्फ दो शतक लगा सके हैं। यहां तक कि ये दोनों शतक उन्होंने २०१७ में इंग्लैंड के ही खिलाफ एक ही मैच में जड़े थे। इसके अलावा वे ५ अर्धशतक भी इस फॉर्मेट में लगा चुके हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट के हिसाब से देखा जाए तो ये आंकड़े खराब नहीं, बल्कि बहुत खराब हैं, क्योंकि वनडे क्रिकेट में खुद शाई होप अब तक ९ शतक और १७ अर्धशतक जड़ चुके हैं। वनडे में उनका औसत ५२ से ज्यादा का है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में होप का औसत २७ से भी कम है।