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`शायद ये मेरी कमी भी है और खूबी भी!’

फिल्म `पहला नशा’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करनेवाले दयाशंकर पांडे ने `लगान’, `स्वदेस’, `गंगाजल’, `राजनीति’, `मकबूल’, `गुलाम’, `आंखें’, `मकड़ी’, `अपहरण’, `हसीना पारकर’, `शूट आउट एट लोखंडवाला’ जैसी फिल्मों में काम किया। साधारण व्यक्तित्व के धनी दयाशंकर पांडे इस समय `तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ और `महिमा शनिदेव की’ में नजर आ रहे हैं। हालांकि, ये इन शोज का री-रन है। पेश है दयाशंकर पांडे से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

`महिमा शनिदेव की’ का ऑफर आपको कैसे मिला?
२६ जुलाई, २००८ को `महिमा शनिदेव की’ का टेलिकास्ट `एनडी टीवी इमैजिन’ पर हुआ था। इस शो के निर्माता हैं `सागर आर्ट्स’ यानी रामानंद सागर। तब `सागर आर्ट्स’ में क्रिएटिव डायरेक्टर के रूप में काम करते थे शाहब शम्सी। शम्सी साहब ने मुझसे पूछा, ‘क्या तुम मायथोलॉजी (धार्मिक) शो करोगे?’ मैंने हामी भर दी। उसके बाद हम दोनों `सागर आर्ट्स’ के ऑफिस में गए। वहां हमारी मुलाकात शिवसागर साहब से हुई। वे एस्ट्रोलॉजी जानते थे और उन्होंने मेरी कुंडली तक देखी। मेरा एक लुक टेस्ट हुआ और ये शो मुझे मिल गया। इस शो के पुनर्प्रसारण ने मुझे बीते दिनों की याद दिला दी।

शनिदेव का रोल मिलना आपके लिए बड़ा मौका था?
शनिदेव का रोल मिलना बड़ा नहीं, सुनहरा मौका था मेरे लिए। इस शो में बड़े नामी कलाकार नहीं हैं, शनिदेव की कहानी में शनिदेव ही केंद्र में हैं। रुपहले पर्दे के हीरो गुड लुकिंग होते हैं। सच कहूं तो मेरा चेहरा टीवी या फिल्म कलाकारों जैसा ग्लैमरस नहीं है। शायद ये मेरी कमी भी है और खूबी भी।

`शनिदेव’ और आपमें कितनी समानता है?
हम जैसे साधारण इंसानों की ईश्वर से तुलना नहीं की जा सकती। हां, मैं धर्मिक प्रवृत्ति का जरूर हूं। ईश्वर और पूजा-पाठ में विश्वास करता हूं। इन दिनों कोरोना महामारी में अगर हमें कोई शक्ति देगा तो वो ईश्वर ही हैं। मैं महामृत्यूंजय का पाठ करता हूं। वैसे शनिदेव कृष्णभक्त हैं और कूटनीतिज्ञ भी, जो मैं नहीं हूं। मेरी कुंडली शनिप्रधान है। हां, शनिदेव की तरह अन्याय के विरुद्ध लड़ने की क्षमता मुझमें जरूर है।

अरुण गोविल को लोग भगवान राम की तरह पूजते थे। क्या कभी आपको ऐसा अनुभव हुआ?
एक बार मैं किसी शादी में शरीक होने के लिए गांव गया था। शादी में उपस्थित एक अतिथि ने मेरे पैर पकड़कर ५०१ रुपए देते हुए मुझसे कहा, `शनिदेव महाराज, ये आपका चढ़ावा है। इसे स्वीकार करें प्रभु।’ एक समारोह में पेरिस में रहनेवाला एक बंदा मेरे पास आकर बोला, `मैंने कल ही कार खरीदी है। कृपया कार को आप अपने हाथों से स्पर्श कर दें।’

अपने अब तक के करियर से आप कितने संतुष्ट हैं?
मैं खुश हूं अपने करियर से। हर कलाकार अमिताभ बच्चन जितनी सफलता नहीं पा सकता। लेकिन जो काम, रोल, टीवी शोज और फिल्में मुझे मिलीं उसके लिए मैं फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का शुक्रगुजार हूं। मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि कलाकारों का चयन निर्देशक करते हैं तो वाकई बढ़िया होता है। आज कास्टिंग डायरेक्टर्स-कास्टिंग एजेंसीज कलाकारों के करियर में रोड़ा बन चुके हैं। डायरेक्टर से जो कनविक्शन होती है, वो कास्टिंग एजेंसीज में नहीं होती।

आपका अगला प्रोजेक्ट क्या है?
मैं वेब शोज `रक्तांचल’ कर रहा हूं। बस इंतजार है लॉकडाउन के बाद काम शुरू होने का। आखिर दुनिया उम्मीद पर ही कायम है।