शिक्षा मंत्री की ‘शिक्षा’, सैलाब में फंसे स्कूली बच्चे

मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ सहित अन्य जिलों में बारिश कहर बरपा रही है। दुकान, घर यहां तक कि कुछ स्कूलों में भी बारिश का पानी जमा हो गया था। यह सब अचानक नहीं हुआ। क्षेत्रीय मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश की चेतावनी सोमवार को ही जारी की थी। इसके बावजूद राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने मंगलवार को स्कूलों में छुट्टी घोषित करना मुनासिब नहीं समझा। सोमवार को जब शिक्षा मंत्री के पीए से मंगलवार को स्कूलों में छुट्टी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘कल का कल देखेंगे।’ शिक्षा मंत्री के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये के चलते कल कई स्कूल खुले रहे और विद्यार्थियों सहित परिजनों को बारिश पानी के सैलाब से मजबूरन गुजरना पड़ा। शिक्षा मंत्री की ‘शिक्षा’ (सजा) स्कूली बच्चों को मिली। मासूम स्कूली पानी पानी के सैलाब में फंस गए। इन बच्चों के साथ ही उनके अभिभावकों को पानी के इस सैलाब से बाहर निकालने के लिए उन्हें आम लोगों के साथ ही पुलिस की मदद ली।
इतना ही नहीं स्कूल टीचर्स और प्रिंसिपल का भी गुस्सा शिक्षा मंत्री पर फूट पड़ा। टीचर्स डेमोक्रेटिक प्रâंट के राजेश पंड्या ने बताया कि ‘प्रिंसिपल तीन छुट्टी घोषित कर सकता है। पर शिक्षा मंत्री से मेरा यह सवाल है अगर कोई अतिआवश्यक घटना के लिए तीन से ज्यादा दिन की छुट्टी की जरूरत हो तो प्रिंसिपल क्या करे?’ मुंबई प्रिंसिपल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत रेड्डीज ने बताया कि ‘शिक्षा मंत्री ने प्रिंसिपल पर छुट्टी देने का पैâसला थोप दिया। यदि हम अपनी मर्जी से छुट्टी देते हैं तो स्कूल के कार्यालयीन दिवस कैसे भरेंगे? जब मौसम विभाग ने पहले ही वार्निंग जारी कर दी थी तो शिक्षा मंत्री को पहले से ही छुट्टी की घोषणा कर देनी चाहिए थी।’
तावड़े जी, बच्चे क्या तैरकर स्कूल जाएं? नाराज अभिभावकों का सवाल
राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े के सुस्त रवैये से स्कूली बच्चों के अभिभावक काफी नाराज हैं। इतना ही नहीं स्कूल टीचर्स और प्रिंसिपल का भी गुस्सा शिक्षा मंत्री पर फूट पड़ा। अभिभावकों का कहना है कि सोमवार की तुलना में मंगलवार को बारिश अधिक होने के बावूजद शिक्षा मंत्री ने अपना पल्ला झाड़ते हुए ११.५५ बजे ट्वीट कर कहा कि प्रिंसिपल परिस्थिति को देखते हुए छुट्टी देने का निर्णय ले सकते हैं। मंत्री जी के इस बयान से अभिभावकों का गुस्सा और भी बढ़ गया है। लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर भी फूटा। लोगों ने कहा एक तो मंत्री जी लेट जागे हैं। सुबह का सत्र पूरा होने के बाद ऐलान करते हैं। स्कूल में मौजूद बच्चे और घर से स्कूल जानेवाले बच्चे क्या तैरकर स्कूल या वापस अपने घर जाएंगे?
बता दें कि बारिश के चलते कल लोकल ट्रेन तक ठप पड़ गई। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय से छुट्टी को लेकर कोई आदेश न आने से कई स्कूल कल चल रहे थे। भारी बारिश के बावजूद वसई, विरार व डोंबिवली, टिटवाला से जैसे-तैसे शिक्षक स्कूल पहुंचे। स्कूल में विद्यार्थी भी पहुंचे लेकिन जैसे-जैसे जलजमाव की खबर आने लगी तो शिक्षकों, अभिभावकों और मुख्याध्यापकों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी। ट्रॉम्बे पब्लिक स्कूल और फातिमा देवी स्कूल में जलजमाव हुआ था। शिक्षक राजेश पंड्या ने शिक्षा मंत्री से पूछा मौसम विभाग द्वारा एलर्ट जारी करने के बाद छुट्टी का निर्णय शासन को जाहिर कर देना चाहिए था। २५ जून के एमएलसी चुनाव के दिन की छुट्टी उपसंचालक ने मतदाता के अलावा सभी स्कूल शिक्षकों को अनावश्यक क्यों घोषित की थी? फिर अधिकारी को बरसात की छुट्टी देने का निर्णय भी जाहिर करना चाहिए केवल प्रिंसिपल ही क्यों? दहिसर के रहनेवाले सुरेश पटेल ने कहा कि शिक्षा मंत्री इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं? दोपहर में छुट्टी की घोषणा करना कितना उचित है जब मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही चेताया है। पराग ने ट्वीट कर कहा कि यह शिक्षा मंत्री का ‘विनोद’ (मजाक) है। अरुण नायर ने कहा स्कूल बस भी सुबह ७ बजे आती है और आप ११.५५ को बताते हैं कि छुट्टी देनी है या नहीं। हमें बेहतर सिस्टम की जरूरत है जो पहले ही जानकारी दें।