" /> शुद्ध हवा से महरूम!

शुद्ध हवा से महरूम!

देश की आर्थिक राजधानी कही जानेवाली मुंबई की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों, खूबसूरत समुद्री तटों और नाइट लाइफ ही नहीं है बल्कि मुंबई की पहचान यहां बसी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-झोपड़ियों से भी होती है। मुंबई की लगभग ५० फीसदी से भी ज्यादा आबादी ऐसी ही झोपड़ियों में अपना जीवन व्यतीत करने पर मजबूर है। गोवंडी भी इसी क्षेत्र का एक हिस्सा है, जहां अधिकतर लोग दिहाड़ी मजदूरी का कार्य करते हैं। गोवंडी में रहनेवाले लोगों के सामने दो बड़ी समस्याएं हैं, पहली शुद्ध हवा और दूसरा स्वच्छ पानी।
गोवंडी के शांति नगर में रहनेवाले लोगों का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या डंपिंग ग्राउंड की है। यहां डंपिंग ग्राउंड की वजह से अधिकतर लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है लेकिन फिर भी कोई इस पर ध्यान नहीं देता। इसके अलावा यहां पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है। इसी के साथ लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है। इतनी बड़ी आबादीवाले इलाके में गिने-चुने ही सार्वजनिक शौचालय हैं, जिसके चलते लोगों को या तो कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है या फिर खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। इससे कई बीमारियां पैâलती हैं। गोवंडी में मौजूद डंपिंग ग्राउंड से भी लोगों को कई समस्याएं हैं। लोगों का कहना है कि कूड़ा डंप होने के कारण गोवंडी की हालत कूड़े जैसी हो गई है। इस कूड़े की बदबू चारों तरफ पैâली रहती है, जिससे लोगों की औसत आयु घट रही है। आय कम होने से लोग इस स्थान से किसी दूसरे स्थान पर जा भी नहीं सकते। लोगों की मांग है कि इन क्षेत्रों में अधिक संख्या में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाए और लोगों को साफ पानी उपलब्ध करवाया जाए।

गोवंडी में वर्षों से मुंबई के सभी इलाकों का कूड़ा डाला जा रहा है, जिसके कारण गोवंडी की हालत भी कूड़े जैसी ही हो गई है। लोग न तो स्वच्छ हवा में सांस ले सकते हैं और न ही स्वच्छ पानी पी सकते हैं। सरकार को गोवंडी के लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। – नफीस अंसारी (निवासी)

गोवंडी में इतनी बड़ी आबादी होने के बाद भी गिनी-चुनी संख्या में ही सार्वजनिक शौचालय मौजूद हैं, जिसके कारण लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खराब होता है।

– इरफान शेख (निवासी)
हर साल यहां के नेताओं द्वारा हमसे वादा किया जाता है कि अच्छी सुविधा और साफ पानी दिया जाएगा लेकिन अभी तक कोई परिवर्तन नहीं आया है। सबसे बड़ी समस्या डंपिंग ग्राउंड की है, जो न जाने कितने ही लोगों को बीमार बना देती है। – शादाब अंसारी (सामाजिक कार्यकर्ता)