शुरू हो गई पाकिस्तान के अंत की कहानी १०० दिनों बाद होगा, पाकिस्तान खल्लास!

– एफएटीएफ करने जा रहा है फाइनेंशियल स्ट्राइक

– एफएटीएफ की पिछली बैठक में बच गया था पाक
– आतंक खत्म करने के लिए ६ महीने का मिला वक्त
-आतंकवाद पर लगाम लगाने में रहा असफल
– सितंबर में उसे काली सूची में डालने की तैयारी

आतंकवादियों को पालपोस कर हिंदुस्थान में खून की नदियां बहानेवाले हमारे क्रूर पड़ोसी पाकिस्तान का खेल जल्द ही खत्म होनेवाला है। उसके अंत की कहानी शुरू हो गई है। उसकी अर्थव्यवस्था हाशिए पर जा चुकी है और आईएमएफ से मिले ६ बिलियन डॉलर के कर्ज पर इतनी ज्यादा शर्त्तें हैं कि पाकिस्तानी जनता कराह रही है। इमरान सरकार ने नए बजट में बेतहाशा टैक्स बढ़ा दिया है और वहां की जनता गुस्से में उबल रही है। ऐसे में खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान के ऊपर एक और इंटरनेशनल स्ट्राइक होने जा रही है। जानकार बताते हैं कि करीब १०० दिनों बाद एफएटीएफ यह स्ट्राइक करेगा और पाकिस्तान खल्लास हो जाएगा।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त सबसे निचली पायदान पर पहुंच चुकी है। विदेशी मुद्रा का कटोरा खाली हो चुका है। यह कटोरा करीब एक साल से खाली है पर वह इधर-उधर से अभी तक भीख मांग-चांग कर काम चला रहा था। चीन ने बीच में कई बार उसे कर्ज देकर उसकी मदद की है। पर अब चीन ने भी मना कर दिया। इसके बाद पिछले ७-८ महीने की मेहनत के बाद आईएमएफ से ६ बिलियन का लोन मिला। मगर असली वार एफएटीएफ करनेवाला है। पाकिस्तान अभी एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है और सितंबर में होनेवाली अगली बैठक में इसके ब्लैक लिस्ट में जाने की पूरी संभावना है क्योंकि पाकिस्तान अपने यहां पनप रहे आतंकवादी अड्डे को खत्म कर पाने में नाकाम रहा है।
आंतकवाद को पालने-पोसनेवाला पाकिस्तान अब कंगाल हो चला है। उसकी अर्थव्यवस्था ढह चुकी है और अब वह आतंकवाद की मार से खुद अपनी मौत मरनेवाला है। अगली बैठक में एफएटीएफ उसे काली सूची में डालने की पूरी तैयारी में है। इसके बाद उसे न तो कर्ज मिल पाएगा और न ही कोई वहां निवेश करेगा।
गत मार्च महीने में ही एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की काली सूची से बचने के लिए पाकिस्तान ने दुनिया को बेवकूफ बनाने से भी परहेज नहीं किया। फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद पाकिस्तान का काली सूची में जाना तय था। पर तब उसने किसी तरह गिड़गिड़ाकर अपनी जान बचा ली थी। तब एफएटीएफ ने चेतावनी देते हुए कहा था कि निगरानी सूची में शामिल होने के बावजूद पिछले साल पाकिस्तान में संदिग्ध आतंकी फंडिंग डेढ़ गुना बढ़ गई है। अब आगामी सितंबर में एफएटीएफ की बैठक है और माना जा रहा है कि इस बार उसका बचना मुश्किल है।
बता दें कि पिछली बार पुलवामा हमले के तीन दिन बाद ही शुरू हुई एफएटीएफ की सालाना बैठक में हिंदुस्थान में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शामिल होने का सबूत पेश किया था। हिंदुस्थान का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान में लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठन और उनके प्रâंट संगठन सक्रिय हैं और उन्हें आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए फंड जुटाने की खुली छूट मिली हुई है। हिंदुस्थान ने पाकिस्तान को तत्काल काली सूची में शामिल करने की मांग की थी। तब एफएटीएफ ने छह महीने का वक्त दिया था और सारे आतंकी संगठन और उनके अड्डे खत्म करने को कहा था। अभी तक न तो आतंकी खत्म हुए हैं और न आतंकी अड्डे पर पाकिस्तान बार-बार जो आतंकवादी अड्डे खत्म होने की बात कर रहा है वो सिर्फ एफएटीएफ की आंख में धूल झोंकने के लिए ही कह रहा है। बता दें कि एफएटीएफ ज्वाइंट ग्रुप की गत मई में चीन में बैठक हुई थी जिनमें धनशोधन और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद रोकने के बारे में बताया गया था। एफएटीएफ ने २७ बिंदुओं वाले ढांचे में १८ को आधा-अधूरा पाया था। इनमें लश्कर, जैश जैसे ८ संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात थी। मगर पाकिस्तान इसमें बुरी तरह से नाकाम रहा है।

हाशिए पर विकास दर
पाकिस्तान का हाल इतना बुरा है कि उसकी जीडीपी ६।२ से गिरकर ३।३ फीसदी पर पहुंच चुकी है। वहीं औद्योगिक विकास दर तो ४।९ से गिरकर १।४ फीसदी पर पहुंच चुकी है।

काली सूची का मतलब
एफएटीएफ की काली सूची का मतलब है कि वह देश निवेश के लिए पूरी तरह से असुरक्षित है। ऐसे में कोई देश वहां निवेश करने का खतरा मोल क्यों लेगा? इसके अलावा ऐसे देश को किसी देश या संस्था से कर्ज भी नहीं मिलता।

चीफ जस्टिस का छलका दर्द
देश की बुरी हालत को देखते हुए पाकिस्तान के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा का दर्द छलक उठा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानियों को इन दिनों अर्थव्यवस्था, राजनीति और यहां तक कि क्रिकेट के क्षेत्र में केवल ‘निराशाजनक’ खबरें ही सुनने को मिल रही हैं। ऐसी खबरें हैं कि देश की अर्थव्यवस्था आईसीयू में चली गई है, जो जनता और पाकिस्तान के लिए अच्छी सूचना नहीं है। न्यायाधीश खोसा ने कहा कि पाकिस्तान हर क्षेत्र में पिछड़ रहा है, जो कि चिंता का विषय है। खास बात यह है कि पाक के पिछड़ेपन अब वहां के कोर्ट रूम में भी जताई जाने लगी है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम अर्थव्यवस्था की बातें सुनते हैं और बताया जाता है कि यह या तो आईसीयू में है या अभी आईसीयू से बाहर आई है। खोसा ने कहा कि हम चैनल बदलते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप की ओर देखते हैं तो वहां भी निराशाजनक खबरे मिलती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी अफरातफरी के माहौल में पाकिस्तान की जनता को जो भी अच्छी खबरें सुनाई दे रही हैं वह सिर्फ पाकिस्तान की अदालतों से ही हैं।