" /> शूटिंग बंद है फिर रेंट मांगते हैं मकान मालिक : फिल्मी जगत से जुड़े हुए लोगों का छलका दर्द

शूटिंग बंद है फिर रेंट मांगते हैं मकान मालिक : फिल्मी जगत से जुड़े हुए लोगों का छलका दर्द

देश में जनता कर्फ्यू के बाद से ही लॉक डाउन शुरू हो गया था, जो जहां था वह वहीं फंस के रह गया। लॉक डाउन का समर्थन करते हुए बॉलीवुड ने भी शूटिंग पर रोक लगा दी। मात्र कुछ ही दिन बाद लॉक डाउन की वजह से लोगों की समस्या उभर कर सामने आने लगी। गरीब वर्ग के लोगों को सरकार और एनजीओ ने राशन की व्यवस्था करवाई लेकिन मिडल वर्ग के लिए अभी तक कोई भी प्रावधान सामने नहीं आया है। शूटिंग बंद होने के बाद से बॉलीवुड से जुड़े हुए लोगों की समस्याएं उभर कर सामने आ रही है। यह ऐसे लोग हैं, जो डेली वेज वर्कर के ही श्रेणी में ही माने जाते हैं। इनका कहना है कि लॉक डाउन में कमाई कुछ भी नही है लेकिन मकान मालिक घर का किराया मांग रहे हैं।

पेशे से मॉडल नम्रता शेट्टी का कहना है कि मार्च के दूसरे सप्ताह से ही लगभग शूटिंग को बंद करने का फैसला लिया गया। फैशन का जो फील्ड होता है वह हाई बजेट होता है, ऐसे में अगर शूट शुरू भी किया जाता है तो फैशन शूट कम से कम अक्टूबर या नवंबर तक शुरू होने की संभावना है। इस बीच इनकम का सोर्स न के बराबर है। लॉक डाउन के चलते वे अपने माता पिता के घर भी नहीं जा सकते हैं, ऐसे में मुंबई में अपने किराए के मकानों में पहले की तरह रहने को वे सभी मजबूर हैं। सरकार ने भले ही मकान मालिकों को तीन महीने तक किराएदारों से किराया न लेने का आदेश दिया है लेकिन मकान मालिक यह सरकारी फरमान को ठेंगा दिखाते हुए किराए के लिए लगादा लगा रहे हैं।  सरकार ने तीन महीने किराया ना लेने का प्रावधान बनाया है लेकिन मकान मालिक यह सरकारी फरमान मानेंगे इस पर शंका ही है।  नम्रता ने कहा कि सरकार को कम से कम तीन महीने तक का किराया माफ करा देना चाहिए अगर यह संभव नहीं है तो सरकार को कोई दूसरा समाधान लाने की जरूरत है।

इसी तरह बॉलीवुड से जुड़े हुए रिषभ जो कि मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम करते है, उनका कहना है कि वे लोग भी रोज कमाने और खाने की श्रेणी में आते है। अगर शूटिंग बंद हो जाती है तो उनकी कमाई भी ठप्प हो जाती है। मुंबई जैसे शहर का किराया भी बहुत ज्यादा रहता है, जो इस कठिन समय में देना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रिषभ ने मकान मालिक से अनुरोध किया कि वह कुछ महीने तक किराया न ले लेकिन मालिक ने सरकारी फरमान मानने से साफ मना कर दिया। अगर वह ऐसे ही जिद करते रहेंगे तो फिक्स्ड डिपाजिट को तुड़वाकर उन्हें किराए की भुगतान करना पड़ेगा। सरकार ने किराया न लेने का नोटिस जारी किया लेकिन यह मकान मालिक पर निर्भर करता है। सरकार से उनकी गुजारिश है कि जब तक लॉक डाउन खत्म नहीं होता तब तक का किराया माफ कर दिया जाए। सरकार को उनके बारे में सोचना चाहिए जिनकी कमाई बिल्कुल ठप्प हो गई है। फाइनेंस सेक्टर को इस मामले में कुछ रणनीति तैयार करने की जरूरत है। फोटोग्राफर अमित खन्ना बताते हैं उनके अनुरोध करने से पहले ही मकान मालिक उनसे किराए की मांग कर चुके हैं। मालिक का कहना है कि किराए में कोई समझौता नहीं होगा। सरकार को इस समस्या का समाधान निकालने की जरूरत है। अगर पूरा किराया माफ न करें तो कम से कम आधा किराया माफ किया जाना चाहिए। लॉक डाउन के इस दौर में लोग अपने घर भी नहीं जा सकते हैं, ऐसे में जब काम बिल्कुल बंद पड़ा है तो किराया देने में दिक्कत तो होगी ही। किराए के अलावा अन्य खर्चे भी है जैसे महीने की ईमआई भी आती है, इसके अलावा बुजुर्ग माता पिता को भी पैसे देने पड़ते हैं।