" /> श्रमिक स्पेशल ट्रेन यात्रियों की मौत पर मचमच : आरोपों को रेलवे ने किया खारिज

श्रमिक स्पेशल ट्रेन यात्रियों की मौत पर मचमच : आरोपों को रेलवे ने किया खारिज

*2 यात्री पहले से ही बीमार थे
*1 की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आनी बाकी
*चौथे यात्री का कोई ब्यौरा नहीं

कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 4 यात्रियों की मौत की खबर पर मचमच शुरू हो गई है। एक ओर जहां इसे रेलवे की बदइंतजामी का परिणाम बताया जा रहा है, वहीं इसे लेकर रेल मंत्रालय ने अपनी ओर से आपत्ति जताई है। मंत्रालय ने प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए जो विवरण दिया है, उसके मुताबिक, उसमें दो लोग पहले से ही गंभीर रोगों से ग्रसित थे, जबकि एक व्यक्ति की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही सामने आएगा। चौथे प्रवासी मजदूर की हुई मौत के बारे में कोई ब्योरा खबर में नहीं दिया गया है। ऐसे में मजदूरों की मौत का जिम्मेदार रेलवे को कहना औचित्यहीन है।
रेलवे प्रवक्ता का कहना है कि भारतीय रेल के अधिकारियों की ओर से विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर जरूरत पड़ने पर यात्रियों को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। सभी श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अनिवार्य रूप से खाना और पीने के पानी की व्यवस्था सभी यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही है। खबर में जिन स्टेशनों का जिक्र किया गया है, उनके स्टेशन पर तैनात अधिकारियों का कोई पक्ष नहीं लिया गया है, जो उचित नहीं है। रेलवे अधिकारी का कहना है कि यह कठिन समय है। रेलवे अपनी पूरी कोशिश कर रहा है। हर किसी की हरसंभव मदद हो रही है।
लाकडाउन के दौरान विभिन्न शहरों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने के लिए 1 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से तकरीबन साढ़े तीन हजार ट्रेने चलाई गई हैं, जिनसे अब तक तकरीबन 50 लाख लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने में सफलता मिली है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लागू लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। हालांकि, लॉकडाउन-4 के दौरान कुछ उद्योग-धंधों को खोलने की अनुमति मिल गई है। लेकिन महामारी का अंत कब तक होगा, यह कह पाना बेहद मुश्किल है। ऐसे में प्रवासी मजदूर अपने गृहराज्‍यों में किसी भी तरह पहुंचना चाहते हैं। इस दौरान हजारों श्रमिक पैदल ही निकल पड़े। शहरों से पैदल ही अपने गांवों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा करीब एक महीने तक सुर्खियों में रही। इसके बाद मोदी सरकार ने श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों का प्रचालन शुरू किया।