" /> श्रीवास्तव-उ-वाच….मिस्ट्री सुलझाओ  रु. ५२ करोड़ पाओ!

श्रीवास्तव-उ-वाच….मिस्ट्री सुलझाओ  रु. ५२ करोड़ पाओ!

मिस्ट्री सुलझाओ  रु. ५२ करोड़ पाओ!
दुनिया में सबकुछ होता रहता है। मगर ये शायद अपने आप में एक नया कीर्तिमान है कि एक केस के रहस्य को सुलझाने के लिए लगभग ५२ करोड़ रुपए का इनाम रखा है। बात अपने देश की नहीं है। यहां इतनी मगजमारी करेंगे क्या? प्रश्न हो सकता है किंतु ऑस्ट्रेलिया में एक केस की तलाश सालों से की जा रही है मगर हल नहीं हो रहा है और यही वजह है कि अब ७० लाख अमेरिकी डॉलर का (लगभग ५२ करोड़ रुपए) इनाम रख दिया गया है। २००५ में ऑस्ट्रेलिया घूमने गई एक जर्मन महिला का कत्ल हुआ। १५ साल बाद भी मामला सुलझा नहीं है। सिमोने श्ट्रोबेल २००५ में बैगपैकिंग टूर करने ऑस्ट्रेलिया गईं थी। वहां वे लिजमोर शहर के एक कैम्पिंग पार्क में अपने बॉयप्रâेंड और दो दूसरे दोस्तों के साथ रह रही थीं। ११ फरवरी २००५ को उनके दोस्तों ने उन्हें आखिरी बार देखा। छह दिन तक उनका कोई अता-पता नहीं था। फिर छह दिन की खोज के बाद पुलिस को वैâम्पिंग साइट से महज २०० मीटर की दूरी पर उनका शव मिला। लाश को वहां छिपाया गया था।१५ साल की तहकीकात के बाद भी आज तक इस मामले में किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं बना है। न ही ऑस्ट्रेलिया की पुलिस और न जर्मन पुलिस इस मामले की गुत्थी सुलझा पाई है। कैम्पिंग साइट पर मौजूद सभी लोगों से पूछताछ के बाद भी पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला। तो केस सुलझाओ और करोड़ों पाओ।
नीले झंडे तले समुद्र
दरअसल ये बड़ी बात है। मामला चूंकि पर्यावरण से जुड़ा है और उसमें यदि हिंदुस्थान अव्वल हो तो आश्चर्य भी होता है और बदलते देश के प्रति गर्व भी होता है। जी हां, हिंदुस्थान के आठ समुद्र तटों को पहले ही प्रयास में `ब्ल्यू फ्लैग’ सर्टिफिकेट मिला है। देश के पांच राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित भारत के ८ समुद्र तटों को मिले ब्ल्यू फ्लैग प्रमाणपत्र को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उत्कृष्ट उपलब्धि बताया है। प्रमाणपत्र देने का निणर्‍य अंतरराष्ट्रीय निर्णायक समिति ने किया, जिसके प्रतिष्ठित सदस्यों में यूएनईपी, यूएएनडब्ल्यूटीओ, एफईई, आइर्‍यूसीएन शामिल हैं। `ब्ल्यू फ्लैग’ से सम्मानित समुद्र तट हैं – शिवराजपुर (द्वारका-गुजरात), घोघला (दीव), कासरकोड और पादुबिद्री (कर्नाटक), कप्पड़ (केरल), रुशिकोंडा (आंध्र प्रदेश), गोल्डन (पुरी-ओडिशा) और राधा नगर (अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह)। ब्ल्यू फ्लैग सर्टिफिकेट पर्यावरण के लिए काम करनेवाली संस्था फाउंडेशन फॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन (एफईई) देती है। १९८७ से यह सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं और तब से स्पेन लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है। यह सर्टिफिकेट बीच या फिर पानी के इर्द-गिर्द बनी जगह को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखने तथा लोगों में इसके प्रति जागरूकता पैâलाने के लिए दिया जाता है।
साइकिल पर चालान
अब बताइए साइकिल पर भी क्या कोई चालान काट सकता है? पर बात जब हिंदुस्थान की हो तो यहां कुछ भी संभव है। पर ऐसा-वैसा कुछ नहीं बल्कि पूरे कायदे-कानून के साथ। अब देखिए, कोरोना काल में सबसे ज्यादा मांग साइकिल्स की रही। पार्क आदि में घूमने की मनाही थी तो लोग फिटनेस के लिए साइकिल चलाने लगे। आलम यह था कि स्टोर्स पर साइकिल्स की कमी हो गई। वहीं जब लॉकडाउन खुला और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो लोगों ने अपनी कारों में साइकिल रैक लगवा लिए, ताकि कार में साइकिल लाद कर खुली जगहों पर साइकिलिंग का शौक पूरा कर सकें। लेकिन कारों में लगे इन साइकिल रैक या स्टैंड पर पुलिस की नजरें टेढ़ी हो गई हैं। जी हां, हाल ही में बंगलुरु पुलिस ने एक शख्स का चालान काटा है, जिसने अपनी गाड़ी के पीछे साइकिल रखने वाला स्टैंड लगाया हुआ था। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के रहनेवाले पारसनाथ अपने बेटे के साथ कार में सफर कर रहे थे और उन्होंने रैक में अपनी साइकिल्स लगा रखी थी। पुलिसकर्मी ने उनका ५,००० रुपए का चालान काट दिया। पुलिसकर्मी से जब उन्होंने चालान काटने की वजह पूछी तो उसने बताया कि केवल एक साइकिल ले जाने की ही अनुमति है। लेकिन कार में रैक या स्टैंड लगाने के लिए आरटीओ से अनुमति लेनी जरूरी है। बिना अनुमति के लगाने पर ५,००० रुपए तक का चालान कट सकता है। वहीं बंगलुरु के मेयर और साइक्लिस्ट सत्या शंकरन का कहना है कि उन्हें भी पहली बार पता चला कि कार में रैक लगा कर साइकिलें ले जाने पर जुर्माना लग सकता है।
भोजन वाला विमान
तरह-तरह के प्रयास होते हैं। कुछ अनोखा होता है तो लोग रोमांचित होते हैं और प्रयास सफल भी होता है। कोरोना काल में विमान सेवाओं पर भी काफी मार पड़ी है, ऐसे में खड़े विमान से पैसा वैâसे कमाया जाए? और देखिए तगड़ा आइडिया आया, जिसमें हींग लगी न फिटकरी और रंग भी चोखा आया है। सिंगापुर एयरलाइंस ने तो लोगों को विमान में ही बिठा कर खाना खिलाने का पैâसला किया है। दुनिया के सबसे बड़े पैसेंजर विमान ए३८० में लोग ४७० डॉलर की टिकट खरीद कर खाना खाने आ सकते हैं। जहां इतने की टिकट में लोग हिंदुस्थान से सिंगापुर हो कर लौट आया करते थे, वहां यह टिकट सिर्फ खाना खाने के लिए है और कमाल की बात तो यह है कि ये टिकटें हाथों हाथ बिक भी गई हैं। २४ और २५ अक्टूबर को लोगों को सिंगापुर के चंगी एयरपोर्ट पर यह मौका मिलेगा। पिछले दिनों जब इसके लिए इंटरनेट पर टिकट काउंटर खुला तो आधे घंटे के अंदर ही सभी ९०० टिकटें बिक गईं। ४७० डॉलर में फर्स्ट क्लास का फोर कोर्स मील मिलेगा लेकिन अगर आप इतना पैसा खर्च नहीं करना चाहते तो ५३ डॉलर में इकोनॉमी क्लास का थ्री कोर्स मील भी ले सकते हैं। इस डबल डेकर विमान में लोगों को एक-एक सीट छोड़ कर बैठाया जाएगा ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा जा सके।