" /> श्रीहरि की कृपा पाने का खास मौका है, दामोदर द्वादशी

श्रीहरि की कृपा पाने का खास मौका है, दामोदर द्वादशी

सनातन धर्म में द्वादशी तिथी पर कुछ खास मौकों पर ही लोग व्रत आदि करते हैं लेकिन श्रावण मास की द्वादशी तिथी व्रत के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। इसे दामोदर द्वादशी भी कहते हैं। दामोदर द्वादशी व्रत एक ऐसा व्रत है, जो भगवान विष्णु के भक्तों द्वारा आस्थापूर्वक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल यानी कि २०२० में दामोदर द्वादशी ३१ जुलाई को मनाई जाएगी। श्रावण महीने में शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर दमोदर द्वादशी मनाई जाती है।

बता दें कि दामोदर भगवान विष्णु के कई नामों में से एक है। श्रावण माह आकाश में सितारों के श्रवण नक्षत्र की उपस्थिति से चिह्नित है और यह महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। कहते हैं कि इस शुभ महीने के दौरान जो भी व्यक्ति भगवान शिव की पूजा सच्चे मन से करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है। दमोदर द्वादशी के ठीक एक दिन पहले पवित्रा एकादशी व्रत या फिर कहें कि इसे पुत्रदा एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु को भी समर्पित है।

बताते चलें कि पुत्रदा एकादशी या पवित्र एकादशी का निरीक्षण करनेवाले भक्त अक्सर भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद द्वादशी के दिन ही भगवान शिव को भोग लगाते हैं और फिर प्रसाद प्राप्त कर अपने उपवास को तोड़ते हैं व साथ ही अपनी मनोकामना की जल्दी पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

व्रत विधि- दामोदर द्वादशी के शुभ दिन पूरे विधि-विधान के साथ व्रत उपवास हर भक्त को करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी हर मनोकामना जरूर पूरी होगी। अगर आप दामोदर द्वादशी के दिन उपवास रख रहे हैं, तो उसे तोड़ने के बाद मीठा अवश्य खाना चाहिए। यह बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त दामोदर द्वादशी व्रत का पालन करते हैं, उन्हें परम मोक्ष सदगति की प्राप्ति होती है। दमोदर व्रत का पालन करने से आपके अनुयायियों को अविश्वसनीय लाभ मिलता है। यही नहीं, आपको अपनी हर समस्याओं का समाधान भी प्राप्त होता है व अपना भौतिक जीवन सुखमय बना सकते हैं। ध्यान रहें कि व्रत के दौरान हर तरह के छल-कपट, लालच व क्रोध से खुद को कोसों दूर रखें।