" /> श्री राममंदिर के मॉडल में परिवर्तन की मांग को  सिरे से खारिज किया जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने

श्री राममंदिर के मॉडल में परिवर्तन की मांग को  सिरे से खारिज किया जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने

अयोध्या पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने राममंदिर के मॉडल में परिवर्तन की मांग को एक सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसी मांग करनेवाले को विशालता की परिभाषा स्वयं बतानी चाहिए। जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद ने इस मांग को संतों की बुद्धि की विपरीतता बताया है। उन्होंने कहा है कि जिस संगमरमर के पत्थर से निर्माण कराने की मांग की जा रही है वह मौजूदा परिस्थितियों में सुलभ नहीं हो सकता।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती आज अयोध्या पहुंचे हैं। उन्होंने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव पर उनसे मुलाकात कर बधाई दी है। इस दौरान उन्होंने राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य व श्रीमणि रामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास से भी मुलाकात की है। आज शाम वे रामजन्मभूमि परिसर पहुंचकर वहां हो रहे समतलीकरण के कार्यों का जायजा लेंगे। श्री रामजन्मभूमि पर विशाल राममंदिर की मांग को ट्रस्ट के सदस्य जगतगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने संतों की बुद्धि की विपरीतता बताया है l

उन्होंने संतों इस मांग पर चुटकी लेते हुए कहा है कि तब तो उन्हें यह मांग भी करनी चाहिए थी कि मंदिर की ऊंचाई इतनी हो कि उसे अमेरिका से भी देखा जा सके। स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि मंदिर भव्य हो यह हर कोई चाहता है लेकिन इतने विशाल मंदिर की मांग कर संतों को अपनी बुद्धि की विपरीतता का परिचय नहीं देना चाहिए। जगदगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा है कि संतों को विशाल मंदिर की परिभाषा स्वयं स्पष्ट करनी चाहिए।

वहीं ट्रस्ट के सदस्य जगतगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया है कि राम जन्मभूमि न्यास के मॉडल के आधार पर ही राम मंदिर का निर्माण होगा। इस मॉडल को पूरे विश्व में प्रदर्शित किया गया है। लंबे समय से प्रस्तावित इस मॉडल के प्रति लोगों की आस्था है। मॉडल के आधार पर भव्य मंदिर का निर्माण होगा। यह बनने के बाद दिखाई देगा। संगरमर के पत्थर से राम मंदिर ने निर्माण की मांग पर जगतगुरु वासुदेवानंद ने कहा कि वर्तमान समय से यह संभव नहीं है। संगमरमर के पत्थर से बनाने की मांग पर उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय में ऐसे पत्थर का मिलना सरल नहीं है। उन्होंने कहा कि मकराना में संगमरमर के पत्थर नहीं हैं और उदयपुर का पत्थर अभी कच्चा है। जबलपुर के पत्थर भी कच्चे हैं। आपको बता दें कि रामजन्मभूमि पर लंबे संघर्ष के बाद रामलला का मंदिर बनने जा रहा है। यह मंदिर श्रीराम जन्मभूमि न्यास की ओर से बनवाए गए मंदिर मॉडल के आधार पर बनना है। अयोध्या के कुछ प्रमुख संतों ने राम मंदिर को इस मॉडल के अनुरूप बनने वाले मंदिर से विशाल बनाने की मांग की है। स्वयं रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने मांग की है कि मंदिर की शिखर की ऊंचाई 1,111 फिट होनी चाहिए जो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद व प्रमुख शहर करांची से दिखाई दे। संतों की इस मांग पर जगदगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा है कि विशाल मंदिर की मांग करनेवाले संतों को विशालता की परिभाषा स्वयं स्पष्ट करनी चाहिए।