" /> संकट में अवसर मतलब क्या भाई?, मोदी क्या कहते हैं?

संकट में अवसर मतलब क्या भाई?, मोदी क्या कहते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि संकट को अवसर में बदलने का यह ‘सही’ समय है। हमें ऐसा ही लग रहा था कि संकट मतलब कोरोना और अवसर मतलब स्वावलंबन। भाजपा के नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान को सही अर्थों में समझ लिया है और कोरोना संकट को अवसर मानकर राजस्थान में एक स्थिर सरकार के पैरों को खींचना शुरू किया है। मध्यप्रदेश में जिस तरह से कमलनाथ सरकार गिराई गई थी, उसी तरह से राजस्थान की गहलोत सरकार को गिराने के लिए भाजपा द्वारा खोदी जा रही सुरंग के झटके महसूस किए जाने लगे हैं। कोरोना संकट से युद्ध के दौरान ही भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके करीबी २२ विधायकों को अपने खेमे में मिला लिया और संकट को एक सुनहरे अवसर में बदल दिया! बदले में सिंधिया समर्थकों को छोटे-मोटे मंत्री पद मिले। खुद सिंधिया को भी केंद्र में मंत्री पद का गाजर दिखाया गया था, लेकिन कोरोना संकट के कारण, गाजर की खेती सूख गई है। सिंधिया महाराज खुद कोरोना से पीड़ित हैं और दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। अब गाजर का ये स्टॉक राजस्थान भेज दिया गया है और वहां पर मौके का फायदा उठाने के लिए बुवाई और उर्वरकों का छिड़काव भी शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस और सरकार का समर्थन करनेवाले निर्दलीय विधायकों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपए का लालच दिखाया जा रहा है। कांग्रेस ने रिश्वत प्रतिबंधक विभाग के पास शिकायत दर्ज कराई है। यह सब राज्यसभा चुनाव को देखते हुए किया जा रहा है। राजस्थान में राज्यसभा के लिए एक कांग्रेस उम्मीदवार को हरवा कर और उसके बाद सरकार गिराने का उनका इरादा है। मध्यप्रदेश में जैसा सिंधिया का ऑपरेशन हुआ, राजस्थान में वैसा सचिन पायलट का होगा क्या? खबरें आ रही हैं कि सचिन पायलट दिल्ली जाकर गुपचुप भाजपा के ‘सर्जनों’ से मिल आए और पेटदर्द वाले अपेंडिक्स के बारे में चर्चा भी की। यह एक अफवाह हो सकती है, लेकिन निश्चित तौर पर कांग्रेस इससे सकते में है। अगर ऐसा हुआ तो ये पहले से ही सूखा, उसमें तेरहवां महीना साबित होगा। सचिन पायलट नाराज हैं, ऐसा वे कई बार बता चुके हैं लेकिन हाथ की चीज छोड़कर दूसरों के पीछे भागने में उन्हें क्या राजनीतिक लाभ होगा? मध्यप्रदेश के सिंधिया महाराज स्वयं अनुभव कर रहे हैं कि राजनीति की दुनिया मतलबी होती है। विपक्ष की सरकारों को गिराना लेकिन जहां भाजपा सत्ता में है, वहां के विपक्ष में भी फूट डालना। कांग्रेस के विधायकों में गुजरात की राज्यसभा जीतने के इरादे से ही फूट डाली गई थी। यह लोकतांत्रिक परंपरा के लिए घातक है। कमलनाथ सरकार को गिराने का आदेश ऊपर से हमारे पास आया। इसलिए मध्यप्रदेश में सरकार गिराई, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस कथन में सबकुछ साफ हो जाता है। ऊपरवालों ने नीचेवालों से कहा और नीचेवालों ने ऊपरवालों की मदद से संकट को ‘स्वर्णिम’ अवसर में बदल दिया। महाराष्ट्र में भी छह महीने पहले इस तरह का राजनीतिक संकट पैदा करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह अवसर ध्वस्त हो गया। ऐसे समय में जब कोरोना संकट देश में मानव जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है, दिल्ली के सत्ताधीशों को विरोधियों की सरकार गिराने की सूझना, यह धक्कादायक है। विपक्षी दलों की सरकारें अगर दो-चार राज्यों में रहती हैं तो ऐसा क्या बिगड़ जानेवाला है? ये सरकारें लोकतांत्रिक तरीके से चुनी जाती हैं। भले ही उसने अच्छी सरकार बनाने के लिए अपने तरीके से जोड़-तोड़ की होगी, तो भाजपा ने भी हरियाणा, मणिपुर, गोवा और कर्नाटक में व मध्यप्रदेश में भी राजनीतिक कीचड़ में सत्ता का कमल खिलाया है। कोरोना संकट से जूझती राज्य सरकारों की विपरीत परिस्थितियों का फायदा उठाकर, विरोधी सरकार को कमजोर करना भयंकर कृत्य है। देश में एक ही दिन में १० हजार कोरोना मामलों के बारे में चिंता करने के लिए केंद्र सरकार तैयार नहीं है। कई राज्यों में संकट के समय में केंद्र की सहायता नहीं पहुंच पाई। महाराष्ट्र में कोंकण तट पर लोग तूफान से बुरी तरह प्रभावित हुए और उनका बहुत नुकसान हुआ। इस संकट में केंद्र की मदद अभी तक पहुंची हुई नहीं दिख रही, लेकिन विपक्षी सरकारों को गिराने के लिए धन और दस्ते पहुंच रहे हैं। मोदी ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में कहा कि संकट को अवसर में बदलने का यही ‘सही’ समय है। उनके भक्तों ने ‘मोदी उवाच’ का अनर्थ कर दिया। बेहतर है कि मोदी एक बार इन अवसरवादियों की क्लास लें, यही ठीक है!