" /> संक्रमण न बढ़े इसकी सावधानी बरतो! -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

संक्रमण न बढ़े इसकी सावधानी बरतो! -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

मानसून पूर्व हुई आपदा व्यवस्था की समीक्षा बैठक

वर्तमान में कोविड-19 का हम मुकाबला कर रहे हैं। इसका मुकाबला करते हुए आनेवाली बारिश की आपदा का भी मुकाबला मजबूती से करना
होगा। इस दृष्टि से सभी मशीनरी एक दूसरे से आपसी समन्वय बनाकर अच्छा काम करें। इस तरह संक्रमण का फैलाव नहीं होगा। इसके लिए अभी से नियोजन करने की आवश्यकता है। ऐसा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा। मुख्यमंत्री कल आपदा व्यवस्था की मानसून पूर्व समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, आपदा व्यवस्थापन मंत्री विजय वडेट्टीवार, राज्यमंत्री प्राजक्त तनपुरे, मुख्य सचिव अजोय मेहता, सर्व विभागीय आयुक्त, रेलवे, नेवी, सेना, हवाई दल, तटरक्षक दल, मानसून विभाग सहित मुंबई मनपा आयुक्त व अन्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक को इतना विकसित किया गया है कि मौसम की भविष्यवाणी करने के बाद किसी भोलानाथ की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन फिर भी बारिश पूर्वानुमान को भी विफल कर रही है। अचानक कम दबाव के बेल्ट का निर्माण, जिससे तूफान, भारी बारिश, बादल फटने आदि हो सकते हैं, इसलिए सभी विभागों को मौसम विभाग के लगातार संपर्क में रहना चाहिए और अच्छा समन्वय बनाए रखना चाहिए। जिस तरह से हवाई सेवा को समय से पहले मौसम के बारे में जानकारी मिल जाती है, वैसे ही रेलवे को भी अगले रूट के मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए ट्रेनों की योजना बनानी चाहिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि महालक्ष्मी एक्सप्रेस पिछले साल भारी बारिश में बदलापुर के पास किस तरह फंस गई थी।
मुख्यमंत्री ने संबोधित करते हुए कहा कि हम आपदा बचाव कार्य करने जा रहे हैं लेकिन फिलहाल हमें कोविड की स्थिति के कारण सावधान रहना होगा। इस संबंध में उन्होंने आवश्यक सुरक्षा उपकरण और किट्स, मास्क आदि उपकरण उपलब्ध कराकर देने का निर्देश प्रशासन को दिए।

पिछले वर्ष की तर पुनरावृत्ति न हो
मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सांगली-कोल्हापुर बांध से पानी छोड़ने के लिए उचित योजना बनाई जानी चाहिए और अब से अल्मटी बांध के पानी के बारे में विभाग के साथ समन्वय करना चाहिए ताकि पिछले साल की तरह इस साल भी बाढ़ से सांगली-कोल्हापुर प्रभावित न हो।

किसी भी परिस्थिति में गड्ढे नहीं चाहिए
मुंबई में 2005 की बाढ़ के बाद, हमने और अधिक सावधानी और आसानी से काम करना शुरू कर दिया। नालियों को साफ करना, उन्हें गहरा करना और समय पर पानी की निकासी करना महत्वपूर्ण है। पंपिंग स्टेशन ठीक से चलना चाहिए। हमें यह देखने की जरूरत है कि क्या ड्रेनेज पाइप खुले हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सड़कों पर गड्ढों को रोकना महत्वपूर्ण है, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण भाग हो। किसी भी हालत में गड्ढे पटने चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मानसून के मौसम के दौरान दूरदराज के क्षेत्रों में खाद्यान्न और दवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने जिलेवार बैठक लेकर व वहां के संबंधित डॉक्टरों को बैठक में सहभागी करके बारिश में संसर्ग रोगों का नियोजन करने का निर्देश दिए। अंधेरी स्थित शहाजीराजे क्रीडा संकुल में कोविड के लिए विलगीकरण सुविधा करने के साथ एनडीआरएफ को पर्यायी जगह देने का निर्देश भी मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को दिए।स्थानीय स्तर पर पूर्व सैनिकों को सहभागी करके भारतीय सेना और प्रशासन के बीच अच्छा समन्वय रहेगा। ऐसा भी मुख्यमंत्री ने कहा।

मेघदूत ओर उमंग मोबाईल एप
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के उप महानिदेशक केएल होसालीकर ने एक प्रस्तुति में कहा कि राज्य में वर्षा औसत या अधिक होगी। प्री-मानसून की बारिश 1 से 2 जून तक पूरे महाराष्ट्र में होने की संभावना है। मराठवाड़ा में सामान्य वर्षा और विदर्भ में सामान्य से कम वर्षा होगी। आम तौर पर महाराष्ट्र में 11 जून को बारिश होगी और इसकी वापसी की यात्रा सामान्य से अधिक समय तक चलने के बाद 8 अक्टूबर को शुरू होगी। पिछले साल की तुलना में महाराष्ट्र में औसत से 32 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।

मुंबई में मानसून विभाग से संपर्क
मुंबई में मौसम विभाग मुंबई मनपा के साथ समन्वय में काम कर रहा है। मुंबई के लिए बाढ़ चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है। यह जानना समय पर है कि वार्ड स्तर पर कितनी बारिश होती है और कितना जल स्तर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 140 वर्षा मापन स्टेशन हैं और मेघदूत किसानों के लिए एक मोबाइल ऐप है और उमंग मोबाइल ऐप पर भी वास्तविक समय की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ऐसा उन्होंने बताया।

मानसून विभाग से संपर्क
मुंबई में मानसून विभाग से संपर्क क्रमांक ०२२-२२१५०४३१/ ०२२- २२१७४७१९ ओर ईमेल acwc.mumbai@gmail.com पर किया जा सकता है।

बारिश की समस्या से निपटने के लिए नए रूप में मुंबई मनपा तैयार
मुंबई मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने कहा कि मुंबई में निर्माण कंपनियों द्वारा प्री-मानसून से पूर्व कार्यों को करने के लिए अनुरोध किया गया है। 1,000 से अधिक परमिट लंबित थे। उनसे ऑनलाइन आवेदन भरकर, मुंबई में निर्माण स्थलों पर प्री-मानसून सुरक्षा के साथ-साथ मलबे को हटाने आदि काम शुरू कर दिए गए हैं। मुंबई में 400 किमी के नालों का ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण किया गया है और अतिप्रवाहित नालों की सफाई की जा रही है। प्रत्येक वार्ड अधिकारी को रेकी करने के लिए कहा गया है कि उनके क्षेत्र में नाली और चेंबर्स खुले तो नहीं हैं। हिंदमाता, कलानगर और अन्य स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और उच्च क्षमता वाले पंपों का उपयोग करके पानी को पंप करना संभव बनाया गया है। मुंबई में कहीं भी कोई समस्या नहीं होगी, यह आश्वासन देते हुए, मनपा आयुक्त ने कहा कि मुंबई में 336 बाढ़ स्थल हैं। मीठी नदी का 77 प्रतिशत सफाई कार्य पूरा हो चुका है।

३२४ पंप कार्यान्वित
मनपा आयुक्त ने कहा कि बाढ़ के पानी को पंप करने के लिए 6,000 लीटर प्रति सेकंड पानी पंपिंग सिस्टम भी शुरू किया गया है। जल भराव को रोकने के लिए कुर्ला, सायन में बड़े क्षमता वाले पंप लगाए गए हैं। 609 सड़क का काम 10 जून तक पूरा हो जाएगा और 32 पुल की मरम्मत का काम चल रहा है। इस मौके पर मनपा आयुक्त ने बताया कि 117,000 पेड़ों की शाखाओं को काट दिया गया है। 2019 में, मानसून की विभिन्न बीमारियों के कारण मुंबई में 20 लोगों की मौत हो गई। इनमें लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू और स्वाइन फ्लू के रोगियों का समावेश था। इस साल मई तक, गैस्ट्रोएंटेराइटिस के 1802 मामले, मलेरिया के 519 मामले, हेपेटाइटिस के 188 मामले और स्वाइन फ्लू के 42 मामलों का पता चला है। इस अवसर पर मध्य रेल्वे, कोकण रेल्वे, पश्चिम रेल्वे के अधिकारियों ने मानसून पूर्व कामों की जानकारी दी। पिछले वर्ष
कल्याण, सांगली, कोल्हापूर में नौदल ने अविरत काम करके अनेक जीवन को बचाया था। हमारा दल मुंबई, पुणे, नागपुर इन स्थानों पर हेलीकॉप्टर के साथ तैयार है। ऐसा नौदल के अधिकारियों ने बताया। नौदल के अधिकारियों ने बताया कि किसी आपदा को मात देने के लिए 9 जहाज व 8 एयरक्राफ्ट तैयार हैं। इसके अलावा मेरीटाइम नियंत्रण कक्ष की मदद से संकट का मुकाबला की जाएगी। इस मौके पर एनडीआरएफ के अधिकारियों ने कहा कि 18 टीम तैयार है। एक टीम में 47 जवान हैं। इसी प्रकार भारतीय सेना की 39 कंपनियां तैयार हैं, ऐसा सेना के अधिकारियों ने बताया।