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सगे बैरी, लालच ने बनाया हैवान

कहते हैं कि लालच का कोई अंत नहीं होता है इसलिए कई बार लालच में इंसान हैवान बन जाता है। वह अपने-पराए, सही-गलत का अंतर भूल जाता है। लालच के कारण हैवानियत के दो ऐसे ही मामले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से सामने आए हैं, जिसमें एक शिष्य ने जमीन के लालच में अपने गुरु (साधु) और उनके परिवार का सफाया कर दिया। इसी तरह एक साल पुराने एक अन्य मामले का खुलासा अब हुआ है, जिसमें दामाद ने अपने सास-ससुर और दो सालियों को कत्ल करके उन्हीं के घर में दफन कर दिया था। दुर्भाग्य की बात ये है कि इस गुनाह में लालची दामाद को उसकी पत्नी का पूरा सहयोग मिला था। यानी बेटी ने अपने ही मां-बाप और बहनों के कत्ल में पति का साथ दिया था।

१ सितंबर को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में साधु, उनके बेटे और एक साध्वी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आश्रम बनाकर रह रहे साधु हीरादास, उनके पुत्र नेतराम और एक साध्वी मीरादास का शव र्इंट-पत्थरों से कुचला हुआ आश्रम से ही बरामद हुआ था। इस मामले में पुलिस ने साधु के शिष्य और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि पुलिस को कुछ और लोगों की तलाश है। आरोपियों ने आश्रम और आश्रम की ४८ बीघा जमीन के लालच में ट्रिपल मर्डर की वारदात को अंजाम दिया था। ऐसी ही एक दिल दहलानेवाली घटना उत्तराखंड के उधमपुर जिले से सामने आई है। जिसमें जमीन के लालच में दामाद ने पत्नी के साथ मिलकर सास-ससुर और दो सालियों को कत्ल करके उन्हीं के घर में गाड़ दिया था। इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा एक साल बाद तब हुआ जब दामाद ने ससुर के नाम वाली संपत्ति अपने नाम करने की कवायद शुरू की।

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर स्थित रुद्रपुर ट्रांजिट वैंâप की राजा कॉलोनी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पुलिस टीम अचानक एक घर में खुदाई करने पहुंची। खुदाई में एक के बाद एक चार कंकाल बरामद हुए। ये कंकाल घर के मालिक हीरालाल, उनकी ५५ वर्षीया पत्नी हेमवती, २६ वर्षीया बेटी दुर्गा और २० वर्षीया छोटी बेटी पार्वती के थे। जिन्हें उन्हीं की बड़ी बेटी ने अपने पति नरेंद्र गंगवार के साथ मिलकर सालभर पहले कत्ल कर दिया था। कत्ल के बाद उन लोगों ने लाश को वहीं घर में दफन कर दिया था। हत्यारे दामाद की निशानदेही पर पुलिस ने उक्त कंकाल बरामद किए थे। हीरालाल का मकान और खेत हड़पने के लालच में इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।

इसका पता किसी को कभी नहीं चल पाता यदि हीरालाल के खेतों की रखवाली करनेवाले कुंवरसेन के मन में शंका नहीं जागी होती। यदि कुंवरसेन नरेंद्र की बातों पर आंख मूंदकर विश्वास कर लिए होते और हीरालाल के बारे में खोज-बीन नहीं की होती। इस मामले में लालच में विश्वासघात और रिश्तों के कत्ल की जो कहानी सामने आई वह बेहद सनसनीखेज थी। मूल रूप से बरेली की मीरगंज तहसील के अंतर्गत पैगा नगरी गांव के निवासी हीरालाल १५ साल पहले रुद्रपुर में ऊधमसिंह नगर में आए थे। हीरालाल ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर ट्रांजिट वैâम्प की राजा कॉलोनी में अपनी पत्नी और बेटियों के साथ रहते थे। उन्होंने अपनी मेहनत से कुछ संपत्ति अर्जित की थी। अपने खेत उन्होंने बंटाई के तहत रखवाली के लिए कुंवरसेन नामक शख्स को दिए थे। लेकिन सालभर पहले हीरालाल और उनका परिवार अचानक कब लापता हो गया और वो लोग कहां गए कोई जान नहीं पाया। मामला तब खुला जब २५ अगस्त को आरोपी दामाद नरेंद्र गंगवार ने बटाईदार कुंवरसेन से बटाई के रुपये देने को कहा था। कुंवर ने जब हीरालाल के बारे में पूछा तो नरेंद्र ने लॉकडाउन में उनकी मौत होने और सास, दो सालियों के कहीं चले जाने की बात कही। कुंवरसेन को नरेंद्र की इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। शक होने पर कुंवरसेन ने इसकी जानकारी हीरालाल के रिश्तेदार दुर्गा प्रसाद को दी। इन लोगों ने राजा कॉलोनी पहुंचकर मोहल्लेवासी महेश गंगवार, शिवप्रसाद गंगवार और अन्य लोगों से जानकारी की तो हीरालाल समेत उनके परिवार का कुछ पता नहीं चला था। इसके बाद ये लोग २७ अगस्त की रात पुलिस के पास पहुंच गए। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो नरेंद्र घबरा गया। उसने बरेली में रहनेवाले अपने एक रिश्तेदार को फोन करके हीरालाल और उनके परिवार की हत्या के बाद शव को घर में गाड़ने की बात बता दी, जिसके बाद रिश्तेदार ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। खबर मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घर की खुदाई की तो चारों के शव मिले। पुलिस ने बेटी और दामाद को हिरासत में ले लिया है। नरेंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने बताया कि २० अप्रैल, २०१९ की सुबह अपने किराएदार विजय गंगवार निवासी ग्राम दमखोदा थाना देवरनिया जिला बरेली के साथ मिलकर सास, ससुर और दो सालियों की हत्या करने की बात कबूल कर ली। इसके बाद मकान के आंगन की खुदाई की गई तो हीरालाल, हेमवती, दुर्गा और पार्वती के शव बरामद किए गए।

पुलिस को छानबीन में ये भी पता चला कि मृतक हीरालाल की तीन बेटियां थीं। हीरालाल की बड़ी बेटी लीलावती ने नरेंद्र गंगवार के साथ प्रेम विवाह किया था। लीलावती के विवाह के बाद हीरालाल की दो बेटियां बची। उसे क्या पता था कि बड़ी बेटी लीलावती अपने पति नरेंद्र गंगवार के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम देगी। उसने अपने ही पिता हीरालाल, मां दुर्गावती, दो बहनों पार्वती और हेमवती की डंडे से पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी। बाद में लीलावती ने घर में गड्ढा खोदकर लाशों को दफन कर दिया। इस वारदात को एक साल बीत चुका है। नरेंद्र ने मीरगंज तहसील से हीरालाल का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने और इसी के साथ ही जमीन को अपने नाम कराने की कोशिश की थी।

पुलिस ने दुर्गा प्रसाद की तहरीर पर नरेंद्र, उसकी पत्नी लीलावती और किरायेदार विजय गंगवार के खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। नरेंद्र और विजय को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में लीलावती की भूमिका संदिग्ध है। उसकी जांच कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।