सतर्क रहो, सावधान रहो!

मराठवाड़ा को छोड़कर महाराष्ट्र का अधिकांश क्षेत्र पुन: मूसलाधार बारिश और बाढ़ की चपेट में आ गया है। विदर्भ में भी खूब बरसात हो रही है। कल तक विदर्भ और मराठवाड़ा से वरुण देव नाराज थे। फिलहाल विदर्भ पर उनकी कृपा वर्षा हो रही है। नागपुर सहित चंद्रपुर, गडचिरोली और अन्य जिलों में बरसात ने कहर ढाया है। गडचिरोली जिले के बारह में से सात तालुकाओं में अतिवृष्टि हो रही है। प्रशासन ने स्कूलों में दो दिन की छुट्टी घोषित कर दी है इससे वहां की गंभीर स्थिति की कल्पना की जा सकती है। वहां के ३०० गांवों से संपर्क टूट चुका है। कई क्षेत्रों में सड़कों ने नदियों का रूप ले लिया है। भामरागढ़ आदि क्षेत्रों में बरसात के कम होने का कोई आसार नजर नहीं आ रहा है। विदर्भ के अन्य क्षेत्रों में नदी-नाले और तालाब लबालब होकर बह रहे हैं। नासिक सहित उत्तर महाराष्ट्र में अच्छी बरसात हो रही है। नासिक स्थित गोदावरी नदी के किनारे बसे गांववालों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। मुंबई और कोकण में तो गत एक सप्ताह से घनघोर बरसात हो रही है। गत गुरुवार को लगातार दो दिनों में पूरे महीने की बरसात हो जाने से मुंबई का जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया था। अब भी दो-तीन दिनों से जारी बरसात के बावजूद मुंबईकरों के सौभाग्य से रेलवे और सड़क यातायात में कोई ज्यादा परेशानी नहीं आई है। गणेशोत्सव के लिए कोकण गए लोगों पर अतिवृष्टि के अलावा रेलवे और सड़क यातायात की दोहरी मार पड़ी है। रविवार को खेड स्टेशन पर संतप्त यात्रियों ने जो उपद्रव मचाया उसका यही कारण था। वहां जानेवाले लोगों का गणेशोत्सव के दौरान हर वर्ष यही हाल होता है। इससे कोकण रेलवे प्रशासन अपना हाथ नहीं झटक सकता। मांडवी एक्सप्रेस खेड स्टेशन पर रुकी ही नहीं और जो गाड़ियां रुकी भी उनके डिब्बे के दरवाजे यात्रियों ने खोले ही नहीं, जिससे खेड से उस ट्रेन में चढ़नेवाले यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पाए। अब इसके लिए पहले से डिब्बे में बैठे यात्रियों की ओर उंगली उठाई जा रही है। क्या कोकण रेलवे को हर साल होनेवाली इस समस्या का समाधान नहीं ढूंढ़ना चाहिए। गणपति के लिए जाने और लौटनेवाले कोकणवासियों को अधर में छोड़कर अपने कान पर हाथ रखना अब रोकना होगा। आखिर खेड स्टेशन पर उत्पात के पश्चात आपने कुछ गाड़ियों को वहां रोकने का निर्णय लिया ही न। यह सयानापन पहले क्यों नहीं सूझा? भविष्य में इन सब बातों का विचार करते हुए ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे कोकणवासियों को परेशानी न हो। उधर सांगली, सातारा और कोल्हापुर जिलों में प्रशासन ने पहले से ही अपनी तैयारी की हुई है। इन तीनों जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है। गत महीने वहां बाढ़ से पनपी विकट स्थिति और हाहाकार की याद आते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इसलिए दोबारा बाढ़ की आशंका होते ही प्रशासन पहले से ही ‘सतर्क’ हो चुका है। अलमट्टी बांध से पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है। बाढ़ की आशंका के चलते गांववालों और जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। सांगली में एनडीआरएफ के दो दस्ते तैनात कर दिए गए हैं। प्रशासन ऐसे समय में केवल सतर्कता की चेतावनी देते और नगाड़ा बजाते नहीं बैठा बल्कि वह सतर्क और सक्रिय हुआ, यह महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में फिलहाल मराठवाड़ा का क्षेत्र जोरदार बारिश की प्रतीक्षा में ‘प्यासा’ है और शेष महाराष्ट्र में बरसात का ‘ओवरडोज’ है, ऐसी तस्वीर दिख रही है। एक तरफ बाढ़ से ‘सतर्क’ रहने के नगाड़े बजाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ भीषण पानी की कमी और अकाल की चेतावनी दी जा रही है। वरुण देव की अतिकृपा और नाराजगी का दृश्य है। बाढ़ आज नहीं तो कल कम हो जाएगी, बरसात का जोर भी कम हो जाएगा। लेकिन मराठवाड़ा के सामने अकाल की चुनौती सालभर बनी रहेगी। इसलिए सतर्क रहो और सावधान रहो का मंत्र सबको ध्यान में रखना होगा।