समुद्री जीवों के लिए श्मशान माहिम खाड़ी!, १८० गुना ज्यादा दूषित है पानी

मुंबई की माहिम खाड़ी समुद्री जीवों के लिए किसी शमशान से कम नहीं है। एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि माहिम खाड़ी का पानी तय किए गए मानकों से १८० गुना ज्यादा दूषित है। हालांकि खाड़ी का पानी इंसानों के लिए किसी काम का नहीं है लेकिन खाड़ी के दूषित पानी में ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम है कि समुद्री जीव इस पानी में जी नहीं पाएंगे और उनकी मौत हो जाएगी।
बता दें कि ‘इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च-सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फिशरीज’ द्वारा माहिम खाड़ी की पानी की गुणवत्ता को लेकर एक अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन के लिए अध्ययनकर्ताओं ने तीन जगह माहिम-बांद्रा पाइपलाइन, बांद्रा-सायन लिंक रोड और माहिम-बीकेसी से पानी के सैंपल लिए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय किए गए मानक के अनुसार १००एमएल पानी में १०० फेकल बैक्टीरिया होना चाहिए लेकिन जांच में १०० एमएल पानी में बैक्टीरिया की मात्रा १८,००० पाई गई जो सुरक्षा मानकों से १८० गुना ज्यादा है। पानी में खासकर ई-कोलाई नामक बैक्टीरिया का प्रमाण काफी अधिक पाया गया। उक्त बैक्टीरिया से दूषित पानी का यदि कोई गलती से सेवन करता है तो उसे पेट के गंभीर रोग हो सकते हैं और उसका लीवर भी खराब हो सकता है। इंडियन जनरल ऑफ इकोलॉजी में प्रकाशित हुए इस अध्ययन के मुताबिक पानी इस हद तक दूषित है कि इसमें जलीय जीव नहीं रह सकते। इस खाड़ी में इतने बैक्टीरिया, वायरस और पैथोजन हैं जो मनुष्य और जलीय जीव दोनों के लिए घातक हैं और इसके लिए जिम्मेदार हैं खुद मुंबईकर, जो इसे दूषित कर रहे हैं। आसपास के घरों, धारावी की छोटी कंपनियों से निकलनेवाला केमिकलयुक्त जल अपशिष्ट पानी भी खाड़ी में जाकर मिल रहा है। प्रशासन द्वारा जल के ट्रीटमेंट के लिए भी कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।