" /> सरयू नदी  के बढ़ते उफान से  सहमे तटवर्ती ग्रामीण

सरयू नदी  के बढ़ते उफान से  सहमे तटवर्ती ग्रामीण

• पूर्वी यूपी के अयोध्या, बस्ती व गोंडा जिले के तटवर्ती गांवों में तेज कटान से मंडराने लगा खतरा।
मानसून विदाई की बेला में बारिश के मौसम ने एक बार फिर सरयू नदी के तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है।सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर धीमी गति से बढ रहा है। भीषण कटान होने से तटबंधो पर दबाव तेज हो गया है। इसे रोकने में बाढ़ खंड के अधिकारियों को काफी मुश्किलें आ रही हैं। ग्रामीण दहशत में हैं। फिलहाल सरयू खतरे के निशान से ९० सेंटीमीटर नीचे है।

यूपी के अवध एवं पूर्वांचल के अयोध्या, गोंडा व बस्ती जिलों के सैकड़ों गांव सरयू नदी के कछार व तटवर्ती क्षेत्र में हैं। इन्हीं इलाकों में किसानों की हजारों हेक्टेयर भूमि भी सरयू की बाढ़ में अक्सर चपेट में आ जाती है । जिसके चलते उनका खाना-पीना रहन-सहन सब प्रभावित हो जाता है। इस साल की बरसात ने सरयू के कछार के किसानों के लिए मुश्किल कर दी है। अतिसंवेदशील तटबंध कटरिया चादंपुर से खजांचीपुर गांव तक सरयू नदी तेजी से कटान कर रही है। सिंचाई विभाग का बाढ़ प्रखंड बोल्डर के बजाय मिट्टी से भरी बोरियों से कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। बंबू कैरेट से भी कटान रोकने की कोशिश की जा रही है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार, सरयू नदी अभी खतरे के निशान 92.730 से 90 सेंटीमीटर नीचे है। फिर भी कटान की गति इतनी तेज है कि, बंजरिया,विशुनदासपुर का पुरवा,खजांचीपुर,खलवा आदि गांवों में सैकड़ों हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन कटान से प्रभावित हो चुके हैं। गौरा सैफाबाद तटबंध पर बैरागल ग्राम पंचायत के टकटकवा मजरे के पास भीषण कटान शुरू हो गई है। दलपतपुर गांव के सामने भीषण कटान से नदी की धारा गौरा सैफाबाद की तटबंध के चंद कदम दूरी पर पहुंच चुकी है। टकटकवा के ग्रामीण सहमे हुए हैं। हालांकि बाढखंड के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार ने कटान नियंत्रण के लिए मरम्मत कार्य शुरू करा दिया है। एसडीएम आनन्द श्रीनेत ने भी मौके का जायजा लिया है।