" /> साकी कोई ऐसा जाम पिला दे

साकी कोई ऐसा जाम पिला दे

‘साकी’ कोई ऐसा जाम पिला दे,
जो उनकी यादों को भुला दे।
चढ़ जाए बस तेरा ही नशा,
उनकी खुमारी भी उतर जाए।
अक्सर जो बढ़ जाते थे कदम
उनकी कूचे की तरफ,
उन्हें हर बार मयखाने तक पहुंचा,
`साकी’ कोई ऐसा जाम पिला दे ।।
ख़त्म हो गयी सारी हसरतें,
तो क्यों रखें बिसरी यादें ?
अब वो सपने मुझे गंवारा नहीं,
जो कभी उनकी आंखों में
डूब कर देखा करते थे।
बहुत चाहते थे तुम तक आना,
लेकिन वो अपनी होठों से पिला देते थे।
ला पिला वैसा ही जाम,
जो उनके लरजते गुलाबी होठों को भुला दे।
`साकी’ कोई ऐसा जाम पिला दे।।
बड़ी मशक्क़त से इस तन्हाई में,
मैंने अपनी दुनिया बसाई है।
मत कर तू मेरे साथ बेवफाई,
कोई आए और इसे भी उजाड़ दे।
सब लोग कहते हैं,
गम भुलाने की
बड़ी ज़ालिम दवा है तेरे पास !
ला दो घूंट मुझे भी पिला,
कुछ भी कर बस,
इस दर्द से छुटकारा दिला दे।
`साकी’ कोई ऐसा जाम पिला दे।।
-सुशील राय शिवा