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साथ में श्रीराम हैं ही!

छत्रपति शिवराय की प्रेरणा से महाराष्ट्र में रामराज्य शुरू होने के १०० दिन पूरे हो गए। ये सरकार १०० घंटे भी नहीं चलेगी, ऐसा जो दावा ‘८० घंटे’ वाले कर रहे थे उन्हें उसी तरह बड़बड़ाते छोड़कर सरकार ने १०० दिनों में बहुत कुछ किया और तराशा। जनता के मन में अविश्वास की किरणों का रूपांतरण विश्वास की किरणों में करने की कीमिया ‘ठाकरे सरकार’ ने १०० दिनों में कर दिखाया। इसलिए १०० दिनों की उपलब्धि लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अयोध्या जा रहे होंगे और श्रीराम के चरणों में कार्यों का फूल अर्पण करनेवाले होंगे तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। कुछ सरकारें सिर्फ दिन बिताती हैं या दिन गिनती रहती हैं। १५ दिन हो जाने पर ही विज्ञापन के रूप में उत्सव मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गत १०० दिनों में ऐसे विज्ञापनबाजों की राजनीति का मुखौटा फट चुका है। उन मुखौटेबाजों की होली जलाकर मुख्यमंत्री ठाकरे अयोध्या के लिए निकले हैं। उद्धव ठाकरे का अयोध्या दौरा निस्वार्थ है। महाराष्ट्र में तीन अलग-अलग विचारधाराओं के लोग एक हुए और सरकार बनाई। यह सरकार देश के संविधान के अनुसार चल रही है। ऐसी सरकार का नेतृत्व ठाकरे द्वारा किए जाने से वे अयोध्या वैâसे जाएंगे? श्रीराम का दर्शन वैâसे करेंगे? ऐसे हल्के सवाल राज्य के विरोधियों ने पूछे। अब उद्धव ठाकरे अयोध्या पहुंच रहे हैं इसलिए विरोधियों ने मुंह की खाई है। सरकार किसी के भी समर्थन से चल रही हो तब भी श्री उद्धव ठाकरे और शिवसेना अंदर-बाहर एक जैसी ही है। विचारों और नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रभु श्रीराम या हिंदुत्व किसी एक पार्टी की जागीर नहीं है। अयोध्या के राजा सबके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता भैयाजी जोशी जो कहते हैं, वो सही है। ‘हिंदुत्व’ पर एक पार्टी का वर्चस्व नहीं है इसलिए अयोध्या सबकी है। अयोध्या में राजनीतिक और सांस्कृतिक संघर्ष अब समाप्त हो चुका है। इसके लिए देश के सर्वोच्च न्याय मंदिर का जितना भी आभार माना जाए वो कम है। न्याय मंदिर ने देश की सबसे बड़े मुद्दे का हल निकाला है। अयोध्या में राम मंदिर बनेगा और मस्जिद के लिए ५ एकड़ अलग जमीन दी जाएगी, इस निर्णय का सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। कुछ लोग हमेशा विरोध का कापुस नोंचते बैठते हैं। उस प्रकार नोंचने से न धागा बन पाता है और न ही कपड़ा। ऐसे लोगों के विरोध की परवाह न करते हुए अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। राम मंदिर सिर्फ धर्म और राजनीति का मामला नहीं था। वो उतना ही राष्ट्रीय अस्मिता का भी मुद्दा था। अयोध्या नगरी प्रभु श्रीराम की है, ये साबित करने के लिए देश को बहुत संघर्ष करना पड़ा। इस संघर्ष के दौरान कई लोगों के असली दांत दिखे, कई लोगों के मुखौटे गिर गए लेकिन अयोध्या की लड़ाई में हमेशा पहाड़ की तरह सिर्फ शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ही खड़े रहे। देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के हिंदुओं के मन में उस दिन एक विश्वास पैदा हुआ। जिस क्षण शिवसेनाप्रमुख ने अंजाम की परवाह न करते हुए बेबाकी से कहा, ‘हां, अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। बाबरी का गुंबद जिन मजबूत इरादों से टूटा वे शिवसैनिक होंगे तो मुझे उन पर गर्व है, अभिमान है।’ शिवसेनाप्रमुख की यह वाणी आकाश में हजारों बिजलियों के एक साथ कड़कने जैसी थी। बिजली के इस प्रकाशयुक्त तेज से देश की हिंदू संस्कृति आलोकित हो गई। उसी तेज की किरणों ने हिंदू समाज को सत्ता का मार्ग दिखाया। इसलिए देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति के निर्माण में श्रीराम के जितना ही हिंदूहृदयसम्राट के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा। उस मंदिर के कलश पर झंडा फहराया जाएगा लेकिन मंदिर की नींव हजारों राम भक्तों के रक्त से सींची हुई है। वो किसी भी राजनीतिक दल का नहीं था। अयोध्या के राम मंदिर की पहली सीढ़ी शिवसेनाप्रमुख की हिम्मत से बनी। ये अयोध्या नगरी अच्छे से जानती है। बालासाहेब ठाकरे अयोध्या नगरी के हर मन में हैं। इसका अनुभव हमें कई बार हुआ है। खुद उद्धव ठाकरे भी उसी श्रद्धा से अयोध्या जा रहे हैं। जब सत्ता नहीं थी तब भी राम के चरणों में गए थे। अब महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे उसी विनम्रता से अयोध्या जा रहे हैं। प्रभु श्रीराम सबके हैं। ‘ठाकरे सरकार’ अयोध्या से रामराज्य के जनहितों के कार्यों की ऊर्जा और प्रेरणा लेकर महाराष्ट्र लौटेगी। महाराष्ट्र के किसान, मेहनतकश, महिलाएं, बच्चे और बूढ़े सुखी रहें, राज्य के मुहाने पर बैठा दुख-दर्द दूर हो, राज्य में एकता और भाईचारा बढ़े, ऐसी प्रार्थना ‘ठाकरे सरकार’ राम के चरणों में करेगी और प्रभु श्रीराम उन्हें महाराष्ट्र के मजबूत होने का आशीर्वाद देंगे। ये राज्य श्रीं का अर्थात छत्रपति शिवराय का है। ये छत्रपति की न्यायबुद्धि और उसी प्रकार श्रीराम के सत्य मार्ग पर चलेगी। जनता को दिए गए वचनों को निभानेवाली कर्तव्य बुद्धि सरकार के विचारों में रहना ही रामराज्य साबित होता है। ऐसा ही शासन महात्मा गांधी को चाहिए था। महाराष्ट्र में उन्हीं विचारों का शासन चल रहा है। ये इसी प्रकार चलता रहेगा। श्रीराम साथ हैं ही!