" /> सामना की खबर का असर ,  प्रतापगढ़ में २० साल से जमे दीवान को डीजी ने हटाया

सामना की खबर का असर ,  प्रतापगढ़ में २० साल से जमे दीवान को डीजी ने हटाया

• प्रतापगढ़ एलआईयू में दीवान बाप के अंडर में थी सिपाही बेटे की तैनाती

यूपी के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस के खुफिया विभाग दफ्तर में २० वर्षों से जमे चर्चित दीवान को आखिरकार डीजी इंटेलिजेंस ने हटा दिया है। उसका तबादला मंडल मुख्यालय के जनपद प्रयागराज की स्थानीय अभिसूचना इकाई में कर दिया गया है। यह सनसनीखेज प्रकरण मंगलवार को ‘सामना’ ने ‘ प्रतापगढ़ एलआईयू में दीवान बाप व सिपाही बेटे के अंडर में अफसर सरेंडर, नियमों की उड़ रहीं धज्जियां’ शीर्षक से प्रमुखतापूर्वक प्रकाशित किया था।

यूं तो सीएम योगी आदित्यनाथ नियमों के पाबंद माने जाते हैं लेकिन उनकी सत्ता पर लापरवाह अफसर ही बट्टा लगा रहे हैं। प्रतापगढ़ की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट में तैनात २० साल से तैनात रहे दीवान रणविजय व १३ साल से तैनात उनके सिपाही बेटे का चर्चित प्रकरण ऐसा ही है। एक जिले में कोई सिपाही पूरे सेवाकाल में १५ साल से ज्यादा तैनात नहीं रह सकता लेकिन अफसरों व नेताओं को साधने में माहिर रणविजय ने लगातार २० साल एक जिले की कौन कहे , एक ही दफ्तर में गुजार दिए। दबदबा ऐसा कि जब अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में बेटा देशराज सिपाही हुआ तो रणविजय उसकी भी पोस्टिंग अपने साथ प्रतापगढ़ में ही सांठगांठ करके करा दी। दबदबा इतना कि सिविल पुलिस में नियुक्ति के बावजूद सिपाही देशराज पिता के अंडर में एलआईयू में नौकरी करता रहा। हैरत होती है कि सारे अफसर मौन रहकर नियमों की धज्जियां उड़ाने में सहभागी भी होते रहे ! कई बार बाप-बेटे के कारनामों की शिकायतें हुईं, फाइलें खुलीं..लेकिन। दबदबे और सांठगांठ में दब गईं। आखिरकार ‘सामना’ ने इसे जोर-शोर से उठाया। तब जाकर यूपी की ब्यूरोक्रेसी में हरकत हुई। डीजी इंटेलिजेंस डीएस चौहान व एडीजी इंटेलिजेंस एसबी शिरोडकर ने खबर छपते ही संज्ञान लिया। घाघ दीवान रणविजय को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए उसे प्रयागराज भेजने के आदेश मातहत एसपी लल्लन सिंह के मार्फत दिए हैं।

अनुत्तरित सवाल, कार्रवाही बाकी है!..
आखिर किस अफसर की शह पर इंटेलिजेंस जैसे संवेदनशील विभाग में अंधेरगर्दी होती रही। नियमों का मख़ौल उड़ता रहा। ऊपर से नीचे तक सारे अफसरों की आंखों में धूल कौन झोंकता रहा ? एलआईयू प्रतापगढ़ के इंस्पेक्टर और जिम्मेदार सीओ ने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट किसके प्रभाव में आकर नहीं की ? बाप-बेटे की शिकायतों की फ़ाइल कौन दबाता रहा ! कार्रवाई इसपर भी अपेक्षित है !!