" /> सामना की भाषा ही पितृ भाषा नहीं बदलेगा तेवर!, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का स्पष्टीकरण

सामना की भाषा ही पितृ भाषा नहीं बदलेगा तेवर!, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का स्पष्टीकरण

‘दैनिक सामना’, शिवसेना और ठाकरे ये तीनों नाम कभी अलग नहीं हो सकते, लिहाजा संपादक पद की जिम्मेदारी रश्मि ठाकरे को सौंपी गई है। इसका अर्थ कुछ लोग लगा रहे होंगे कि ‘सामना’ की भाषा बदलेगी या दिशा बदलेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होनेवाला है। ‘सामना’ शिवसेना का मुखपत्र है, उसका तेवर उसी तरह बरकरार रहेगा।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कल विधानभवन में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार बतौर शिवसेनापक्षप्रमुख मेरा दृष्टिकोण, मेरे मुद्दे, मेरे विचार ‘सामना’ के माध्यम से आते रहे हैं। आगे भी आते रहेंगे। जैसे मातृभाषा होती है, उसी तरह ‘सामना’ की भाषा पितृभाषा है, यह उसी तरह रहेगी। उन्होंने कहा कि संजय राऊत बहुत पहले से ‘सामना’ के संपादकीय विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वे हमारे परिवार के हैं, आगे भी वे उसी तरह जिम्मेदारी संभालेंगे इसलिए ‘सामना’ के तेवर जैसे थे, वैसे ही रहेंगे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि फिर न कहा जाए कि रश्मि ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी की। ‘सामना’ में मेरे और शिवसेना के विचार होते हैं।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे कोई भी काम मन लगाकर करते हैं, जी-तोड़ मेहनत करते हैं। ‘सामना’ से कुछ समय के लिए मुझे दूर होना पड़ रहा है, जिसका मुझे अफसोस है। संपादक की जिम्मेदारी और मुख्यमंत्री पद का उत्तरदायित्व एक साथ आने से मुझे ‘सामना’ के संपादक पद और रमाधाम की जिम्मेदारी से दूर होना पड़ा।
मुस्लिम आरक्षण का कोई प्रस्ताव नहीं आया
मुस्लिम आरक्षण को लेकर फिलहाल मेरे सामने कोई प्रस्ताव नहीं है इसलिए इस पर कोई पैâसला नहीं लिया गया है। अगर यह मुद्दा सामने आया तो इसकी वैधानिकता की जांच कर आगे पैâसला करेंगे, ऐसा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष को जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है। बता दें कि अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने शुक्रवार को विधानपरिषद में कहा था कि मुस्लिम समुदाय को पांच फीसदी आरक्षण देने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा। कल विधानभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस मुद्दे पर शिवसेना की कोई भूमिका नहीं है। समय आने पर सरकार जरूरी पैâसला लेगी। अभी किसी को अपनी ताकत व्यर्थ नहीं करनी चाहिए। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि फिलहाल यह मामला अदालत में है और सरकार पूरी ताकत से अपना पक्ष रख रही है।
एनपीआर, एनआरसी के लिए बनेगी समिति
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर राज्य में महाविकास आघाड़ी की तीनों पार्टियों के वरिष्ठ सदस्यों की समिति बनाई जाएगी। यह समिति प्रावधानों का अध्ययन करेगी और उसके सुझावों के आधार पर राज्य सरकार इस मामले में आगे पैâसला लेगी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे किसी को राज्य के नागरिकों का अधिकार छीनने नहीं देंगे।
भगवान के दर्शन में राजनीति कहां से आ गई?
आगामी ७ मार्च को भगवान श्रीराम के दर्शन करने अयोध्या जा रहे हैं। इस आयोध्या यात्रा से राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है। यह बात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आस्था के चलते अयोध्या जा रहे हैं। आघाड़ी की दूसरी पार्टियों के नेताओं के साथ जाने के सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि भगवान के दरवाजे सबके लिए खुले हैं, जो भी उनके साथ आना चाहता है, आ सकता है।
मुंबई के नागरिक सावधान हैं!
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि गोवंश हत्या का कानून वापस लेने की बात बिल्कुल निराधार है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बेसिर-पैर की बातें करने की बजाय भाजपा को गोवंश रक्षा से जुड़ा कानून गोवा समेत पूरे प्रदेशों में लाना चाहिए। दिल्ली में हुए दंगों पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस चाक-चौबंद है। मुंबई के नागरिक सावधान व सतर्क हैं। भाजपा पर परोक्ष हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सबको पता है कि दिल्ली दंगों के पीछे कौन है, इसके लिए इशारा करने की भी जरूरत नहीं है।
केंद्र की फसल बीमा योजना फंस गई
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसान कर्जमाफी की गति अब तेज हो गई है। २१ लाख ८१ हजार कर्जाखातों की सूची तैयार कर ली गई है। १० लाख किसानों का प्रमाणीकरण शुरू है और सवा ७ लाख किसानों के खाते में पैसे भेजने की शुरुआत हो गई है। लोग ४०० महीने में कर्जमाफी पूरी होने की बात करते हैं लेकिन यह योजना जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। बेमौसम बारिश से किसानों को राहत देने से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचनामा की प्रक्रिया जारी है। किसानों को पूरी मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री की योजना है, उससे कितना फायदा होता है? यह देखकर आगे का पैâसला लेंगे। केंद्र सरकार की किसान फसल बीमा योजना पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र की फसल बीमा योजना खुद फंस गई है। शिवभोजन योजना का विस्तार हो रहा है और आगे भी होता रहेगा, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।