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सार्वजनिक माफी!

क्या आप किसी ऐसी घटना की कल्पना भी कर सकते हैं जब किसी स्टार अभिनेत्री ने सेट पर सबके सामने हाथ जोड़कर अपने निर्देशक से माफी मांगी हो? किंतु ये सत्य घटना साठ के दशक में फिल्म ‘जहांआरा’ के सेट पर घटी थी। अभिनेत्री थीं माला सिन्हा और निर्देशक थे ओम प्रकाश।
पांच दशकों तक हास्य और चरित्र अभिनेता के तौर पर पर्दे पर अपने अभिनय का जलवा बिखेरनेवाले ओम प्रकाश विभाजन से पूर्व लाहौर में थे। १९४५ में लाहौर रेडियो स्टेशन से ‘देहाती भाइयों’ के लिए प्रस्तुत एक कार्यक्रम में उनकी आवाज गूंजा करती थी। १९४६ में फिल्म ‘आई बहार’ से उन्होंने सिनेमा के पर्दे पर कदम रखा। फिल्म को सफलता नहीं मिली। ३ वर्षों के संघर्ष के बाद बतौर हीरो फिल्म ‘घुंघरू’ उन्हें मिली। ‘घुंघरू’ सफल हो गई और ओम प्रकाश की गाड़ी चल निकली। इसी बीच देश का विभाजन हो गया और वे लाहौर से मुंबई आ गए।
६० के दशक में उन्हें नायक और सहनायक की बजाय चरित्र भूमिकाएं मिलने लगीं और उन्होंने खुद को बहुआयामी अभिनेता के रूप में ढाल लिया। दर्शक उन्हें हास्य कलाकार के तौर पर काफी पसंद करते थे लेकिन उन्होंने खुद पर कोई ठप्पा नहीं लगने दिया। वास्तव में वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और हर प्रकार की भूमिकाएं निभाने में सिद्धहस्त थे। स्वभाव से विनम्र और हंसमुख ओम प्रकाश के जीवन में ऐसी भी घटनाएं घटीं जो उनके स्वभाव के सर्वथा विपरीत थीं। एक ऐसी ही घटना ‘जहांआरा’ के निर्माण के दौरान घटी। मुंबई के ‘रणजीत स्टूडियो’ में फिल्म का सेट लगा था। सुबह की शिफ्ट होने के बावजूद जब फिल्म की हीरोइन माला सिन्हा दोपहर तक सेट पर नहीं पहुंचीं तो ओम प्रकाश ने माला सिन्हा के घर फोन किया। फोन पर माला के पिता मि. अल्बर्ट सिन्हा ने उत्तर देते हुए कहा कि माला देर रात तक बी.आर. चोपड़ा की फिल्म की शूटिंग कर रही थीं इसलिए सो रही हैं। यह सुनते ही ओम प्रकाश क्रोधित हो गए और अल्बर्ट सिन्हा से बोले, ‘मैं कुछ नहीं जानता, माला को फौरन उठाओ और सेट पर भेजो।’ थोड़ी देर बाद माला सिन्हा सेट पर पहुंचीं। जैसे ही उन्हें माला के आने का संदेश मिला वे तमतमाते हुए सीधे माला सिन्हा के मेकअप रूम में पहुंच गए और उनसे कहा- ‘अगर इतना काम नहीं कर सकती तो इतनी फिल्में क्यों साइन करती हो? अगर तुम मेरी फिल्म के सेट पर दोबारा इस तरह देर से आर्इं तो शूट की हुई सारी रीलें जला दूंगा।’ ओम प्रकाश का तमतमाया चेहरा देखकर माला सिन्हा कुछ बोल नहीं पार्इं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। माला के आंसुओं को देखकर ओम प्रकाश बोले, ‘मैं तुम्हें एक ही शर्त पर माफ कर सकता हूं जब तुम सेट पर सबके सामने हाथ जोड़कर माफी मांगोगी।’ माला सिन्हा ने सेट पर सबके सामने हाथ जोड़कर ओम प्रकाश से माफी मांगी। तब जाकर उनका गुस्सा कहीं शांत हुआ।
खैर, अधिकतर हीरोइनें ओम प्रकाश को ओम भैया कहकर बुलाती थीं। मीना कुमारी की तरह मधुबाला भी ओम प्रकाश की बहनों में से एक थीं। ओम प्रकाश फिल्म ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ के लिए मधुबाला को बतौर हीरोइन साइन करना चाहते थे। स्क्रिप्ट के मुताबिक फिल्म की शूटिंग रात में होनी थी। अब समस्या ये थी मधुबाला के पिता अताउल्ला खान को रात में इस फिल्म की शूटिंग के लिए तैयार करने की क्योंकि मधुबाला के पिता अताउल्ला खान मधुबाला को लेकर सही समय पर सुबह सेट पर पहुंच जाते और शाम ६ बजे मधुबाला को लेकर वे घर के लिए रवाना हो जाते। मधुबाला को शाम ६ बजे के बाद शूटिंग की इजाजत नहीं थी। अताउल्ला खान के इस रवैए से ओम प्रकाश अच्छी तरह से वाकिफ थे। अतः ओम प्रकाश ने जैसे-तैसे अताउल्ला खान को फिल्म की कहानी सुनने के लिए मनाया। जब ओम प्रकाश ने फिल्म की कहानी सुनाना शुरू किया तो अताउल्ला के चेहरे का रंग बदलने लगा। कभी वो मधुबाला की ओर देखते तो कभी मधुबाला उनकी ओर। खैर, कहानी सुनने के बाद अताउल्ला को समझ नहीं आ रहा था कि वे इस फिल्म के लिए ‘हां’ कहें या ‘ना’? तभी ओम प्रकाश ने उनके हाथ में साइनिंग एमाउंट के तौर पर ५ हजार रुपए रख दिए। लेकिन अताउल्ला खान ने ओम प्रकाश से कहा- ‘शगुन के सिर्फ ग्यारह रुपए दो। तुम्हारी फिल्म में मधु जरूर काम करेगी!’