" /> साल में 100 दिन रोजगार नहीं तो मिलेगा बेरोजगारी भत्ता! सोरेन सरकार का एलान

साल में 100 दिन रोजगार नहीं तो मिलेगा बेरोजगारी भत्ता! सोरेन सरकार का एलान

-कार्यस्थल पर रखना होगा शुद्ध पानी
-अपने ही शहर में मिलेगा काम
-नगर निकायों को दी गई जिम्मेदारी

झारखंड के शहरों में रहनेवालों श्रमिकों को भी साल में सौ दिन रोजगार की गारंटी मिलेगी। सरकार के रोजगार नहीं उपलब्ध करा सकने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। कोरोना काल में रोजी पर मार से निपटने के लिए शहरी मजदूरों के लिए राज्य सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री श्रमिक योजना लांच करने जा रही है। नगर विकास विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है।

ग्रामीण मजदूरों के लिए मनरेगा की तर्ज पर मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के तहत 18 साल से अधिक उम्र के व्यस्क काम मांग सकेंगे। आवेदन के 15 दिनों के भीतर अकुशल श्रमिकों को काम उपलब्ध कराना होगा। सरकारी एजेंसियों या नगर निकायों के काम नहीं दे पाने पर 15 दिनों के बाद बेरोजगारी भत्ता देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले महीने में न्यूनतम मजदूरी की एक चौथाई राशि आवेदक को दी जाएगी। दूसरे महीने में न्यूनतम मजदूरी की आधी राशि का भुगतान होगा। इसके बाद महीने भर की पूरी न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के तहत श्रमिकों के काम की परस्थितियों को सहज करने के लिए भी प्रावधान किए जा रहे हैं। कार्यस्थल पर शुद्ध पीने का पानी और प्राथमिक चिकित्सा के साजो-सामान उपलब्ध रहेंगे। यदि महिला कामगार कार्यस्थल पर कार्य कर रही हैं तो वहां उनके बच्चों को रखने की भी व्यवस्था रहेगी। ताकि बच्चों का लालन-पालन उनके कामकाजी बनने में बाधा नहीं पैदा करें।

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना का मकसद काम के अभाव में शहरों से होनेवाले मजदूरों के पलायन को रोकना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहरी अकुशल श्रमिकों के लिए इस तरह की योजना की घोषणा पहले ही कर दी थी। मुख्यमंत्री श्रमिक (शहरी रोजगार मंजूरी फॉर कामगार) योजना के तहत अकुशल श्रमिकों को उनके वार्ड या शहर में ही काम करना होगा। इसके जरिए सरकार आंतरिक पलायन को भी रोककर मजदूरों की आमदनी बढ़ाने के साथ ही उनके जीवन जीने के खर्च को कम करना चाहती है।

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के तहत शहरी श्रमिकों को काम उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी नगर निकायों को दी जाएगी। इसके लिए शहरी विकास की योजनाओं में ही अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्रावधान किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार नगर निकायों को क्रिटिकल गैप फंड के रूप में अतिरिक्त राशि भी देगी। बजट में इसके लिए अलग से प्रावधान भी किया जाएगा। राज्य शहरी आजीविका मिशन के तहत भी इसके लिए प्लान अलग से तैयार किया जाएगा।