" /> सावन के अंतिम सोमवार को बाबा विश्वनाथ का होगा झूलनोत्सव श्रृंगार

सावन के अंतिम सोमवार को बाबा विश्वनाथ का होगा झूलनोत्सव श्रृंगार

सावन के पांचवें सोमवार पर बाबा विश्वनाथ का सपरिवार झूलनोत्सव श्रृंगार किया जाएगा। प्राचीन परंपरा के अनुसार बाबा की रजत पंचबदन प्रतिमा पूर्व महंत आवास से काशी विश्वनाथ मंदिर जाएगी। श्रावण पूर्णिमा पर होने वाले श्रृंगार में देवी पार्वती और प्रथमेश गणेश बाबा की गोद में विराजमान किए जाते हैं। उन्हें मंदिर के गर्भगृह में झूले पर बैठा कर विशेष आरती की जाती है।
इस अवसर पर होने वाले तीन दिवसीय उत्सव का शुभारंभ शनिवार को टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर आरंभ हुआ। पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने सर्वप्रथम बाबा की पालकी का पूजन किया। शिवाचार्य महंत पं.ज्योतिशंकर त्रिपाठी के आचार्यत्व में परिवार के पांच अन्य वैदिक सदस्यों पं. उदय शंकर त्रिपाठी, पं.राजन भूषण त्रिपाठी, पं.मणिशंकर त्रिपाठी और अभिषेक पुरोहित ने पालकी प्रतिमा का पूजन किया। पूजन दिन में 12 से तीन बजे तक चला। शहनाई की मंगल ध्वनि महेंद्र प्रसन्ना और साथियों ने की।

रविवार को दूसरे दिन बाबा को कजरी सुनाने की लोक परंपरा का निर्वाह किया गया। इस तीन दिवसीय आयोजन के संदर्भ में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि प्राचीन परंपरा के अनुसार झूलनोत्सव के पूर्व शनिप्रदोष पर बाबा विश्वनाथ की रजत पंचबदन चल प्रतिमा और झूला का विधि विधान से पूजन किया गया। उसके दूसरे दिन लोकगायकों द्वारा कजरी सुनाई गई। इस दौरान कोरोना संक्रमण से मुक्ति और अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्विध्न पूर्ण होने की कामना की गई।

ज्ञात हो कि पूर्व में ऐसा भी समय होता था, जब बाबा के झूले की डोरी खींचने के लिए काशी वासियों में होड़ मची रहती थी। विगत कुछ दशकों से अत्यधिक भीड़ को देखते हुए यह परंपरा पूर्व महंत परिवार के सदस्यों और मंदिर के अर्चकों द्वारा निभाई जाने लगी है। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष बाद यह संयोग बना है कि श्रावण पूर्णिमा सोमवार के दिन पड़ रही है।