" /> साढ़ेसाती में करो शनि पूजन

साढ़ेसाती में करो शनि पूजन

गुरुजी मानसिक तनाव बना रहता है उपाय बताएं? -विनोद यादव
(जन्म- ९ सितंबर १९९७, समय दिन २.५६ बजे, जौनपुर, उत्तर प्रदेश)
विनोद जी आपका जन्म धनु लग्न एवं वृश्चिक राशि है। लग्नेश एवं सुखेश बृहस्पति नीच राशि का होकर द्वितीय भाव में बैठकर मन को व्यग्र बनाया है तथा तृतीय भाव में केतु एवं भाग्य भाव पर भाग्येश सूर्य एवं कर्मेश बुध के साथ राहु बैठकर भाग्य ग्रहण दोष बना रहा है एवं वासुकी कालसर्प योग बना दिया और इस समय आपकी कुंडली में केतु की महादशा भी चल रही है। केतु खडयंत्र कारक ग्रह है। वह मन को स्थिर नहीं रहने देता कुछ न कुछ ऊट-पटांग के सोच में बराबर बनाए रखता है। हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन करें एवं पीपल की परिक्रमा भी करना आवश्यक जीवन के स्थायी विकास के लिए आपको वैदिक विधि से वासुकी नामक कालसर्प योग का पूजन कराना आवश्यक है।

गुरु जी क्या मेरी कुंडली में मांगलिक दोष है। यदि है तो उपाय क्या है? -राहुल मौर्या
(जन्म- १७ नवंबर १९९६, समय सायं ५.१५ बजे, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश)
राहुल जी आपका जन्म मकर लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का अच्छी प्रकार से विचार किया गया। चतुर्थ स्थान पर मंगल बैठने से आपकी कुंडली पूर्ण रूप से मांगलिक कही जाएगी तथा आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि से शुभ फल प्राप्त करने के लिए बड़ों की आज्ञा मानना एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें। मांगलिक दोष से शुभ फल प्राप्त करने के लिए विवाह से पहले वैदिक विधि के द्वारा मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ एवं मंगल ग्रह का जप करना आवश्यक है।

गुरुजी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है। मन में स्थिरता नहीं है। कोई उपाय बताएं? -राजकुमार ठाकुर
(जन्म- १९ दिसंबर १९९०, समय दिन ०४.३८ बजे, सीवान, बिहार)
राजकुमार जी आपका जन्म वृष लग्न एवं धनु राशि में हुआ है। आपकी कुंडली में लग्नेश शुक्र चंद्रमा के साथ पंचमेश बुध एवं सुखेश सूर्य के साथ में अष्टम भाव पर बैठकर लग्न को कमजोर बना दिया है। आपकी राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है तथा पराक्रम भाव पर केतु एवं भाग्य भाव पर भाग्येश शनि के साथ में राहु बैठकर बासुकी नामक कालसर्प योग बना दिया है तथा भाग्य ग्रहण दोष भी बनाया है। इन दोषों के कारण आपके जीवन में अनेक प्रकार के उतार-चढ़ाव एवं सुरक्षित तथा अव्यवस्थित जीवन बीत रहा है। लग्न में ही मंगल बैठ करके आपको मांगलिक भी बना दिया है और क्रोधी भी बनाया है। शनि से शुभ फल प्राप्त करने के लिए आपको प्रत्येक दिन हनुमानजी का दर्शन करें।

मन की एकाग्रता नहीं है। कामकाज ठीक नहीं चल रहा है। कोई उपाय बताएं? -प्रदीप शुक्ला
(जन्म- ५ नवंबर १९९३, समय रात्रि १२.१३ बजे, सिवान, बिहार)
प्रदीप जी, आपका जन्म कर्क लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। गोचरीय व्यवस्था के आधार पर इस समय मिथुन राशि पर ही उच्च का राहु बैठा हुआ है और राहु बैठने के कारण मानसिक व्यग्रता कार्य में असंतोष अकारण लांछन एवं अनेक प्रकार की अशांति भी प्राप्त हो सकती हैं। आपकी कुंडली का अनेक प्रकार से अवलोकन किया गया। लग्नेश चंद्रमा बारहवें भाव में बैठकर आपको मानसिक तनाव प्रदान करता है तथा केमद्रुम योग भी बनाया हुआ। केमद्रुम योग के फल के कारण आपके जीवन में उतार-चढ़ाव भी बना रहता है। आपकी कुंडली में पंचमेश एवं कर्मेश मंगल स्वगृही होकर के पंचम भाव में राहु के साथ में बैठकर अंगारक योग भी बना दिया। इस अंगारक योग के कारण आप में अकारण क्रोध एवं चिड़चिड़ापन भी प्राप्त हो जाता होगा। राहु के साथ में मंगल बैठना यह व्यक्ति की एकाग्रता को समाप्त कर देता है।

मेरी राशि क्या है? मेरा समय कब अच्छा होगा?
-राजेश जोशी
(जन्म- ३ मार्च १९८४, प्रात: ६.१५ बजे, कांजूरमार्ग, मुंबई)
राजेश जी आपका जन्म मीन लग्न एवं कुंभ राशि में हुआ है। लग्नेश एवं कर्मेश बृहस्पति कर्म भाव में स्वगृही होकर बैठा है। यह योग आपको भाग्यशाली तो बनाया है लेकिन बृहस्पति दो केंद्र का स्वामी होने के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। आपके पराक्रम भाव पर राहु बैठकर आपको अपने कार्य के प्रति प्रेरणा तो देता है लेकिन भाग्य भाव पर केतु बैठ करके भाग्य को कमजोर बना दिया तथा भाग्य ग्रहण दोष भी बना दिया है एवं पितृदोष भी बना दिया है।