" /> सिग्नल शाला ने संवार दी जिंदगी!, भीख मांगनेवाले का बेटा बना इंजीनियर

सिग्नल शाला ने संवार दी जिंदगी!, भीख मांगनेवाले का बेटा बना इंजीनियर

पिछले २० वर्षों से ठाणे के तीन हाथ नाका सिग्नल पर भीख मांगकर अपना जीवन-यापन कर रहे विकलांग प्रभु काले का बेटा मोहन काले सिग्नल शाला के संपर्क में आया और आज युरेका फोर्ब्स कंपनी में इंजीनियर बन गया है। सिग्नल शाला से उसने दसवीं की परीक्षा पास कर डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। मोहन काले की इस सफलता से सिग्नल शाला में मौजूद अन्य विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मोहन की जिंदगी सिग्नल शाला ने संवार दी।
उल्लेखनीय है कि समर्थ भारत व्यासपीठ तथा ठाणे महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में ५ वर्ष पूर्व तीन हाथ नाका स्थित उड़ान पुल के नीचे सिग्नल शाला की शुरुआत की गई थी। शुरुआत में जिन १८ परिवारों के ५० बच्चे इसमें शामिल हुए थे, उनमें मोहन काले भी मौजूद था। मोहन काले को उम्र के हिसाब से १० वीं कक्षा की पढ़ाई करनी थी पर किसी तरह की जानकारी न होने की वजह से उसे ८ वीं कक्षा में बैठाया गया। पढ़ाई-लिखाई में वह तेजी से जुट गया। हाईस्कूल की परीक्षा में उसने ७२ प्रतिशत अंक हासिल कर सिग्नल शाला का गौरव बढ़ा दिया। तत्कालीन मनपा आयुक्त संजीव जैसवाल ने न केवल उसका सार्वजनिक रूप से स्वागत एवं सम्मान किया बल्कि उच्च शिक्षा के लिए रुस्तमजी ग्लोबल करियर इंस्टीट्यूट में डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन करवा दिया। एक पैर विहीन बाप तथा वृद्ध मां जहां भीख मांगकर अपना गुजर-बसर कर रहे थे, वहीं मोहन काले बाल स्नेहालय संस्था के आश्रम में रहकर पढ़ाई करने में जुटा रहा। २ वर्ष का डिप्लोमा कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद कैंपस सेलेक्शन में युरेका फोर्ब्स ने मोहन का चुनाव कर लिया और बतौर इंजीनियर उसे नियुक्त कर दिया है। सड़क पर रहने वाले परिवार के बच्चे भी सफलता हासिल कर सकते हैं, यह मोहन काले द्वारा करके दिखा दिया गया है। मोहन काले की इच्छा भविष्य में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री हासिल करने की है। उनका कहना है कि सड़क के बच्चों के लिए अगर हम एक प्रेरणा बन सकते हैं तो यह हमारे लिए गौरव की बात होगी।