" /> सियासत से सलाखों तक ऐसे पहुंचा सेंगर

सियासत से सलाखों तक ऐसे पहुंचा सेंगर

उन्नाव में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी पाए गए पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। वहीं, पीड़िता के पिता की हत्या के मुकदमे में बुधवार को आए फैसले में सेंगर, उनके छोटे भाई अतुल सेंगर उर्फ जयदीप सहित सात लोग दोषी पाए गए हैं। अपने राजनीतिक सफर में कुलदीप ने जब जिस दल से चाहा टिकट हासिल किया और चुनाव भी जीता।

कई चुनाव ऐसे भी रहे जिनमें लोग उनकी हार के कयास लगाते रहे लेकिन लगातार चौथी बार चुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों और प्रतिद्वंद्वियों को अपना लोहा मनवा दिया था। कुलदीप सिंह के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के हाथगाम थाना के मुक्तीपुर गांव के रहने वाले थे।
नाना वीरेंद्र सिंह के कोई बेटा नहीं था। केवल दो बेटियां चुन्नी देवी (विधायक की मां) और सरोजनी देवी हैं। चार भाइयों में कुलदीप सबसे बड़े, मनोज (अब मृतक) दूसरे नंबर का और अतुल तीसरे नंबर का है। सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। कुलदीप १९९५ में ग्राम प्रधान बने। इसके बाद दो पंचवर्षीय में मां चुन्नी देवी प्रधान रहीं।

मौजूदा समय में उनके छोटे भाई अतुल सेंगर की पत्नी अर्चना ग्राम प्रधान हैं। युवा कांग्रेस से राजनीति में कदम रखने वाले सेंगर ने वर्ष २००२ में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बसपा के टिकट पर उन्नाव सदर सीट से विधायक बने। २००७ में उन्होंने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने। २०१२ में भी सपा के टिकट पर भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुए।