सिर्फ मोदी ही!

हिंदुस्थान की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर अपना आशीर्वाद दिया है। उज्ज्वल भूतकाल से भी उज्ज्वल भविष्यकाल प्राप्त होगा, ऐसा ये आशीर्वाद है। मोदी ही देश के भाग्यविधाता हैं और मोदी के सामने संपूर्ण विरोधी सूखे पत्तों की तरह उड़ गए। ‘मोदी हार रहे हैं’, ऐसा राहुल गांधी आखिरी दिन तक कह रहे थे। राहुल गांधी खुद अमेठी में हार गए हैं। मोदी को पराजित करने के लिए विरोधियों ने विद्वेषी प्रचार किया। मतदाताओं ने उसे स्वीकार नहीं किया। मोदी की तुलना में विरोधी दल में प्रभावी नेतृत्व और व्यक्तित्व नहीं है। इसलिए कांग्रेस सहित सभी राजनैतिक विरोधियों की सोचनीय अवस्था हो गई है। एक-दूसरे की टांग में टांग फंसाकर विरोधी एकता का प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन क्या हुआ? राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को चुनौती देनेवाले एक से बढ़कर एक दिग्गज परास्त हो गए हैं। २०१४ में मोदी के नेतृत्व ने एकतरफा जीत प्राप्त की थी। २०१९ में विरोधियों ने एक बड़ा तूफान उठाने का भ्रम पैदा किया था। हकीकत में वो हवा का झोंका भी नहीं निकला। महाराष्ट्र सहित पूरे देश में मोदी प्रणित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने निर्विवाद रूप से छलांग लगाई है और लालकिले पर एक बार फिर भगवा लहराया है। इसका विश्लेषण वैâसे करेंगे? राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने ३५० का चरण पार किया है। भाजपा ने अपने बलबूते बहुमत का आंकड़ा पार किया है। महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण, सुशील कुमार शिंदे, प्रकाश आंबेडकर सहित सभी धराशायी हो गए हैं। अजीत पवार के पुत्र पार्थ पवार बड़े अंतर से पराजित हुए हैं। सुप्रिया सुले ने बारामती का गढ़ फिर बरकरार रखा। राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए यही राहत की बात कही जा सकती है। महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा युति सरस साबित हुई है। शिवसेना के कुछ अधिकारवाली सीटें भले ही गिर गर्इं हों लेकिन नए बाघ चुनकर आए हैं। विरोधियों ने जो सवाल देश में उपस्थित किया था उसमें प्रमुखता से रक्षा विभाग का राफेल लड़ाकू विमान का मामला था। राफेल विमान सौदे में मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार किया और अनिल अंबानी को लाभ मिले इसके लिए सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग किया… ‘चौकीदार चोर है’ इस तरह की घोषणा राहुल गांधी सार्वजनिक सभाओं से करते रहे, लेकिन देश की जनता ने चौकीदार पर प्रचंड विश्वास व्यक्त किया है। मोदी को ही फिर से देश के चौकीदार के रूप में नियुक्त किया है। देश का ऐसा एक भी राज्य नहीं, जहां मोदी जीत का पताका नहीं लहराया हो। गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और ईशान्य के सभी राज्य मोदीमय हो गए। बिहार में सिर्फ मोदी ही हैं। उत्तर प्रदेश में मायावती तथा अखिलेश यादव का महागठबंधन मोदी को चुनौती देगा और भाजपा को १५ सीटें भी नहीं मिलेंगी, ऐसा विश्वास से कहनेवाले मुंह के बल गिरे हैं। उत्तर प्रदेश के बारे में सारे ‘एग्जिट पोल’ गलत साबित हुए और महागठबंधन पर भाजपा भारी पड़ी। जाति और धर्म की दीवारों को तोड़कर लोगों ने मतदान किया। मोदी की लोकप्रियता २०१४ की तुलना में बढ़ती गई और उसका अनुमान विरोधी लगा नहीं पाए। चंद्राबाबू नायडू ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से बाहर निकलकर अपनी झोली में शर्मनाक हार डाल ली। आंध्र में उन्होंने सत्ता गंवा दी और लोकसभा में सिर्फ दो सीटों पर भी वे जीत हासिल नहीं कर पाए हैं। मतगणना के एक दिन पहले नायडू विरोधियों को एकसूत्र में बांधने की कोशिश कर रहे थे। मानो मोदी अब हमेशा के लिए केदारनाथ जा रहे हों और दिल्ली में विरोधियों का राज आ ही गया हो। वे प्रधानमंत्री चयन के काम में जुट गए थे। इतना ही नहीं विरोधी दल के प्रधानमंत्री पद के सभी संभावित उम्मीदवार धराशायी हो गए। इसे किस बात के संकेत समझें? शिवसेना हमेशा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा रही। राष्ट्र तथा जनता के सवालों पर शिवसेना अपनी स्पष्ट भूमिका व्यक्त करती रही। लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में दरार आए, ऐसा काम शिवसेना ने नहीं किया। हमारी भूमिका कल और आज भी दृढ़ है। कांग्रेस सहित सभी ढोंगी धर्म निरपेक्षवादियों का सिर्फ एक ही विकल्प हो सकता है वो भाजपा प्रणित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन। देश की जनता ने एक बार फिर उस पर मुहर लगा दी है। कांग्रेस की बची-खुची जान भी कल के नतीजे से निकल गई। आखिरी उपाय के रूप में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को राजनीति में लाया और उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी उनको सौंपी। मगर प्रियंका के कारण कांग्रेस उत्तर में पांच सीटें भी नहीं जीत पाई। लोगों ने तय किया और मोदी को ही दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए मतदान दिया। यह सफलता मोदी की लोकप्रियता तथा अमित शाह के राजनीतिक प्रबंधन कौशल का है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सामने उन्होंने सीधे-सीधे ‘जय श्रीराम’ मतलब हिंदुत्व को खड़ा किया। उस राज्य में हिंदुत्व की तूफानी जीत हुई। विरोधियों ने बेरोजगारी से लेकर किसानों तक कई सवाल प्रचार के दौरान खड़े किए। इन सभी को हल करने के लिए फिर मोदी ही योग्य हैं, ऐसा अंतत: जनता ने मान्य किया। कांग्रेस ने ६० वर्षों तक देश को रगड़ा। फिर मोदी को और ५ वर्ष क्यों न दें? लोगों ने मोदी पर जबरदस्त विश्वास दिखाया। नरेंद्र मोदी ने नया इतिहास रचा है उनका मनपूर्वक अभिनंदन!