सीखना होगा गोल करना महिला हॉकी

एक होता है गोल हो जाना और एक होता हो गोल करना। दोनों में हालांकि गोल बढ़त है मगर जमीन आसमान का अंतर है। हिंदुस्थानी महिला हॉकी की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि वो गोल करती नहीं, बल्कि उससे गोल हो जाता है। यहां दीगर बात ये है कि गोल होते ज्यादा नहीं हैं बल्कि गोल करने पड़ते हैं। हिंदुस्थानी महिला हॉकी को गोल करना सीखना होगा। यही एक कमजोरी के चलते वो प्रमुख टीमों से जीत नहीं पाती और मजा ये कि वेल्स जैसी टीमें उसे हरा भी देती है। अपने पहले मैच में वेल्स से हार जाने का कारण ही था कि सेमीफाइनल में विश्व नंबर एक टीम ऑस्ट्रेलिया से भिड़ना पड़ा। चलिए मान लेते हैं कि इस दौर में सभी कठिन टीमें होती हैं किंतु जब हम गोल पोस्ट के करीब होते हैं तभी उस तकनीक का लाभ मिलता है जो हमने सीखी है और जैसा हमने व्यूह बनाया है। किंतु अफसोस ये कि गोल डी के अंदर पहुंचते ही पूरी टीम बिखर जाती है और अकेले गेंद ड्रिबलिंग करते ले जाने की आदत मिले अवसर को खत्म कर देता है। यही एक कमजोरी है इस टीम में अन्यथा यदि ऑस्ट्रेलिया को एक गोल पर ही रोक देना ये साबित करता है कि हिंदुस्थानी टीम की रक्षा पंक्ति बेहतर है। बेहतर तो पूरा खेल ही है मगर गोल करने की तकनीक सीखना जरूरी है। दरअसल इसके लिए चार पांच खिलाड़ियों की आपसी सूझ-बूझ और गच्चा देकर विरोधी खिलाड़ियों से आगे निकलने की खूबसूरती होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक है गति में तेजी और अक्लमंदी कि कब कौन किसे गेंद पास करेगी और उसे लेकर कौन किस तरह गोल बनाएगी। हिंदुस्थानी महिला हॉकी टीम ने अंतिम क्षणों में गोल करने के दो बेहतरीन मौके गंवाए तो इसी वजह से गंवाए अन्यथा परिणाम दूसरा देखने को मिलता। हिंदुस्थानी टीम ग्रेस स्टीवर्ट के तीसरे क्वॉर्टर में किए गए गोल की बराबरी करने के लिए बेताब थी। जब मैच में ४ मिनट बचे थे तब मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने गोलकीपर सविता पूनिया को बुलाकर उनकी जगह अग्रिम पंक्ति की खिलाड़ी को उतारा लेकिन भारतीय टीम मौकों का फायदा उठाने में नाकाम रही। नवनीत ने मोनिका के दाएं छोर से दिए गए क्रॉस पर गोल करने का आसान मौका गंवाया जबकि रानी भी वंदना कटारिया के पास पर गेंद को गोल में नहीं भेज पार्इं। बस यही तो कमजोरी है जो पूरे मैच में देखने को मिली। दूसरी बात इस टीम के पास पेनाल्टी कॉर्नर को भी गोल में तब्दील करने की कला नहीं है। दो कॉर्नर मिले किंतु दोनों ही गंवा दिए। वैसे तो ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भी गंवाए मगर ये तो हमारी रक्षा पंक्ति का कमाल रहा जिसमें कोई विवाद है ही नहीं। बात तो गोल करने की है जिसमें हम मात खा जाते हैं।
बहरहाल, हिंदुस्थान अब ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले के लिए इंग्लैंड से भिड़ेगा। कोच हरेंद्र मैच के बाद हालांकि हार से बहुत दुखी नहीं थे। उन्होंने कहा ‘हम हार गए लेकिन हम खराब नहीं खेले। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ उसकी घरेलू सरजमीं पर १-० का परिणाम खराब नहीं है। हम पिछले दो खेलों में पांचवें स्थान पर रहे थे इसलिए इस बार पदक जीतना अच्छा रहेगा। देखते हैं कि यहां से क्या होता है?’ तीन बार के मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने अधिकतर समय गेंद पर कब्जा जमाए रखा। हिंदुस्थान ने पहले क्वॉर्टर के शुरू में लगातार दो पेनाल्टी कॉर्नर बचाए। इसके बाद वंदना भी सर्किल के अंदर गेंद लेकर गर्इं लेकिन उन्हें सहयोग नहीं मिला। भारतीय रक्षापंक्ति ने अच्छा खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक तेवरों को करारा जवाब दिया। इस बीच ग्रेस स्टीवर्ट एक अवसर पर गोल करने से भी चूकीं। गोलकीपर सविता ने दूसरे क्वॉर्टर में अच्छा बचाव किया। इस बीच नवनीत को पीला कार्ड मिला जिसके कारण ५ मिनट तक भारतीय टीम १० खिलाड़ियों के साथ खेली। ऑस्ट्रेलिया ने आक्रमण जारी रखा लेकिन वह हिंदुस्थानी रक्षकों की मजबूत दीवार को भेदने में नाकाम रहा। उसे तीसरे क्वॉर्टर में मैच का तीसरा पेनाल्टी कॉर्नर मिला लेकिन दीप ग्रेस एक्का ने इसे नाकाम कर दिया। स्टीवर्ट ने क्रॉस पर करारा शॉट जमाकर मैच का एकमात्र गोल किया। हिंदुस्थान को चौथे क्वॉर्टर में लगातार दो पेनाल्टी कॉर्नर मिले लेकिन वह उनका फायदा नहीं उठा पाया। इसके बाद भी उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन इस बार भी हिंदुस्थानी खिलाड़ी चूक गर्इं। कोच हरेंद्र भले ही निराश न हों किंतु उन्हें इस बात का ध्यान रखना ही होगा कि वो खिलाड़ियों को गोल करने का अभ्यास दें। व्यूह रचना बनाई जाए और उसी हिसाब से छोटे-छोटे पास देकर आगे बढ़ने की कला हो। अचानक निकल कर सामने आना और गेंद पर झपट कर गोल करने की कला को ईजाद करना ही होगा। यही पुरुष टीम से भी अपेक्षा होती है। पुरुष टीम फिर भी अब माहिर होने लगी है। किंतु महिला टीम में ये बात दिखती नहीं है। जितने मैच वो जीती उसमें गोल हो गए। गोल किए नहीं। गोल कैसे हो जाते हैं, गोल होते हैं विरोधी टीम की गलती से और विरोधी टीम हरेक बार गलतियां नहीं करती। गोल करना और मूव बनाना ही टीम की जरूरत होती है। ये सीख गए तो समझिए नंबर वन बनने से कोई नहीं रोक सकता।