" /> सीने में सचमुच राम हैं न? फिर पीटते क्यों हो!

सीने में सचमुच राम हैं न? फिर पीटते क्यों हो!

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अयोध्या यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इससे महाराष्ट्र में निकम्मे विरोधियों का पेट दर्द बढ़ गया है, ऐसा स्पष्ट दिखता है। उन्होंने ठाकरे सरकार की अयोध्या यात्रा की व्यर्थ आलोचना शुरू कर दी है। इसमें उनके मुंह में छिपे शैतानी दांत जनता को दिख रहे हैं। उद्धव ठाकरे अयोध्या गए, वहां वे पहली बार गए थे क्या? राज्य में फडणवीस की व केंद्र में मोदी की सरकार के दौरान भी उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र से लाव-लश्कर के साथ अयोध्या जाकर आए। दर्शन किए थे और उस समय सरयू के तट पर भव्य महाआरती की थी। तब तक ठाकरे हिंदुत्ववादी थे। अब राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में वे अयोध्या गए, वहां सरकारी सम्मान स्वीकार किया, अर्थात उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री ने श्रीमती रश्मि ठाकरे, आदित्य ठाकरे व हजारों शिवसैनिकों के साथ रामलला के दर्शन किए लेकिन अब महाराष्ट्र के भाजपावालों को ये स्वांग लगता है। दरअसल शिवसेना का हिंदुत्व किसी को ढोंग लगना ही बड़ा स्वांग है। ऐसा ढोंग राज्य के भाजपाई कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी के साथ सरकार की स्थापना की। सरकार में शामिल पार्टियों की विचारधारा अलग होगी ही फिर भी लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान देने, समान न्याय देने का मानवीय धर्म अर्थात राजधर्म होता है। उसी राजधर्म का पालन श्रीराम ने किया, वही राजधर्म महाराष्ट्र में चलाया जा रहा है। उद्धव ठाकरे हिंदुत्व को पहले की तरह ही मजबूती से पकड़े हुए हैं। कांग्रेस के साथ रहने के बाद भी उन्होंने हिंदुत्व के दूध में नमक का ढेला गिरने नहीं दिया। इसी पेट दर्द से राज्य के विरोधी बेजार हो रहे हैं। दिल्ली की तरह नागरिकता कानून को लेकर महाराष्ट्र में हिंसा पैâले, ऐसा राज्य के ठाकरे विरोधियों की इच्छा थी, परंतु उद्धव ठाकरे ने विरोधियों के पेट दर्द का ऐसा इलाज किया कि राज्य में साधारण चिंगारी भी नहीं उठने दी। ये सब बाप-दादाओं का पुण्य प्रताप, छत्रपति का आशीर्वाद और श्रीराम का प्रसाद है। उसी भावना से मुख्यमंत्री ठाकरे अयोध्या जाकर श्रीराम के चरण में नतमस्तक हुए। मुख्यमंत्री वहां गए और वहां दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उद्धव ठाकरे ने अपनी जेब में हाथ डाला और राम मंदिर की निधि घोषित की। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा और पहला धनादेश ‘ठाकरे सरकार’ ने दिया, यह इतिहास में दर्ज रहेगा। अयोध्या में महाराष्ट्र भवन के निर्माण की घोषणा भी मुख्यमंत्री ने की। इसमें राज्य के विरोधियों के पेट में मरोड़ उठे, ऐसा क्या है? यह सुनकर उन्हें खुश होना चाहिए था। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष चांदमियां पाटील के सीने की तुरंत जांच करने की आवश्यकता है। वे बोले, ‘मेरा सीना फाड़ा गया तो उसमें श्रीराम दिखेंगे’। चांदमियां को उनकी छाती फाड़ने की आवश्यकता नहीं है। उनके सीने में हिंदुत्व के प्रति कितना काला जहर ठूंस-ठूंस कर भरा हुआ है, इसका अनुभव १०० दिन पहले महाराष्ट्र को मिला है। इस विष में राम वैâसे रमेंगे? यह साधारण सवाल है। चांदमियां पाटील आदि के सीने में राम हैं तो क्या औरों का सीना नहीं है? लेकिन बहका हुआ निराश विपक्ष क्या कहता है और वैâसा बरताव करता है, ये उन्हें ही नहीं पता! ‘शिवसेना ने भाजपा का त्याग किया, हिंदुत्व का नहीं’ इस एक घूंसे से उद्धव ठाकरे ने सभी के दांत मुंह में ही तोड़ दिए। यह घूंसा मारने के लिए उद्धव ठाकरे ने जगह चुनी तो अयोध्या की। अयोध्या मतलब किसी एक की जागीर नहीं। कोई सरकार स्थापित करने के लिए यहां गया क्या, अथवा वहां गया क्या? राम पर जिनकी श्रद्धा है, उन सभी की ही अयोध्या है। वैâकेई के कारण श्रीराम वनवास गए लेकिन उनके पुत्र भरत रामभक्त थे। इसी तरह विचारधारा कोई भी हो, वह राम भक्ति के आड़े नहीं आ सकती। सिर्फ डाकू को वाल्मीकि बनाने की वाशिंग मशीन राजनीति में लाई मतलब ‘रामायण’ समझ लिया, ऐसा नहीं होता। राम को समझने के लिए सत्य वचन और मानवता को समझना पड़ता है। राज्य के विरोधियों में इस पर संदेह है इसलिए ‘ठाकरे सरकार’ के अयोध्या दौरे पर वे छाती पीट रहे हैं। तुम्हारे सीने में सचमुच राम होंगे तो छाती पीटना बंद करो, श्रीराम को पीड़ा होगी।