" /> सुशांत सिंह के आत्महत्या की वजह है या…

सुशांत सिंह के आत्महत्या की वजह है या…

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने खुदकुशी कर ली। इस घटना को लगभग महीना भर बीत चुका है। इतने दिन बाद भी प्रसारमाध्यम में रिक्त स्थान भरने के लिए आत्महत्या का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘लॉकडाउन’ में चूल्हे हमेशा के लिए बुझ गए इसलिए पुणे में राजेश शिंदे नामक युवक ने दो मासूम बच्चों के साथ खुदकुशी कर ली। उसकी खुदकुशी की फाइल बंद हो गई। सुशांत की खुदकुशी का उत्सव मनाया जा रहा है लेकिन इसमें शिंदे परिवार के लिए जगह नहीं है।

सुशांत सिंह की मौत ने सभी को झकझोर दिया। सुशांत अनंत में विलीन हो गए लेकिन उनकी मौत के बाद कई ठंडी पड़ चुकी आत्मा जाग उठी।
सुशांत सिंह राजपूत ने खुदकुशी की। ये खुदकुशी नहीं खून है। उनकी मौत की ‘सीबीआई’ जांच हो, ऐसी मांग भाजपा की एक सांसद रूपा गांगुली ने की है। सुशांत की खुदकुशी मामले में ऐसी मांग रोज ही सामने आ रही है। सुशांत ने निराशा की चपेट में आकर मौत को गले लगाया। क्या उसके अवसाद की वजह सचमुच व्यावसायिक ही थी? यह सौ फीसदी सही नहीं है। सुशांत की खुदकुशी दुख की बात है लेकिन हर खुदकुशी उतनी ही दुखदायी होती है। परंतु आत्महत्या के उन मामलों की चिंता हमारा समाज नहीं करता है। यह वृतांत लिखने के दौरान कोपरखैरने क्षेत्र में अमर पवार नामक ४० वर्षीय व्यक्ति द्वारा खुदकुशी किए जाने की खबर सामने आई। लॉकडाउन के कारण उसकी नौकरी छिन गई। आर्थित परेशानी बढ़ गई। वह पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। उसकी छोटी बेटी दिव्यांग है। उसकी चिंता का बोझ बढ़ गया और अमर पवार ने खुदकुशी कर ली। अमर पवार की मौत से मैं ज्यादा चिंतित हूं। क्योंकि भविष्य में ऐसे कई अमर पवार आत्महत्या करेंगे, ऐसे हालात आज दिख रहे हैं, जो कि गंभीर बात है।

कैसे वो रहस्य?
सुशांत की आत्महत्या का मामला अचानक उत्सव में तब्दील हो गया। यह एक तरह की विकृति है। इस आत्महत्या के पीछे कोई रहस्य छिपा है, ऐसा कुछ लोगों को लगता है। सुशांत खुदकुशी करेगा, ऐसी आशंका एक फिल्म निर्माता ने जताई थी लेकिन सुशांत को बचाने के लिए उसने क्या किया? देश में कोरोना का कहर, रोज सौ-पांच सौ लोग कोरोना से मर रहे हैं। उस पर चीनी हमले में २० जवान शहीद हो गए। फिर भी सुशांत की खुदकुशी की खबर महीने भर से जगह पा रही है।
हिंदी सिने कलाकार और सिने सृष्टि से माध्यम व समाज का जीवन कितना प्रभावित है, इसका उदाहरण सुशांत खुदकुशी मामले में दिखा। सुशांत खुदकुशी मामले की जांच कब खत्म होगी? कहा नहीं जा सकता है। सुशांत की मौत के बाद इस क्षेत्र के कई लोगों ने मौन तोड़ दिया। लेकिन इससे इस मामले की सच्चाई सामने आ गई, ऐसा नहीं है। सुशांत प्रकरण में खोजा जाए, ऐसा क्या बचा है और पुलिस निश्चित तौर पर किसकी जांच कर रही है? बीते कुछ समय से यह अभिनेता अज्ञातवास में था। उसकी मानसिक अवस्था ठीक नहीं थी, नाकामी की उसी हताशा में उसने बांद्रा स्थित अपने घर में फांसी के फंदे से लटककर मौत को गले लगा लिया। परंतु इसके जरिए बॉलीवुड में व्याप्त संगीत क्षेत्र की माफिया सिस्टम वाली गिरोहबाजी और परिवारवाद के गुब्बारे की हवा निकल गई।

जॉर्ज फर्नांडीस पर्दे के पीछे
सुशांत सिंह राजपूत एक गुणी अभिनेता थे। राजपूत जैसे कई अभिनेता संघर्ष करके इस क्षेत्र में खड़े हुए। वे प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। इसलिए हिंदी सिने सृष्टि पर दो-पांच लोगों का कब्जा है और उनके द्वारा अवरोध निर्माण किए जाने के कारण सुशांत ने खुदकुशी की, ऐसा कहना उचित नहीं है। इसे सच मान लें तो रोज दो अभिनेता खुदकुशी करेंगे। सुशांत सिंह राजपूत ने फिल्म ‘धोनी’ में महेंद्र सिंह धोनी का किरदार निभाया था। यह फिल्म लोकप्रिय हुई। राजपूत ने अन्य फिल्मों में भी अभिनय किया, जब उसने खुदकुशी की तब ६ निर्माताओं से उसका करार हुआ था। कुछ हद तक मैं खुद भी इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ हूं। ‘ठाकरे’ फिल्म का निर्माण खत्म होने के बाद जॉर्ज फर्नांडीज की ‘बायोपिक’ बनाना तय हुआ। जॉर्ज की भूमिका साकार करने के लिए चेहरे के रूप में दो-तीन अभिनेताओं का नाम सामने आया। उसमें एक नाम सुशांत का भी था। धोनी के कारण वह मेरी नजर में था लेकिन दो दिन बाद मुझसे कहा गया कि सुशांत बेहतरीन कलाकार है। वह इस किरदार को बखूबी निभाएगा लेकिन फिलहाल उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह डिप्रेसन का शिकार है। फिल्म के सेट पर उसका बर्ताव अजीब होता है। इससे सभी को परेशानी होती है। कई बड़े प्रोडक्शन हाउस ने इसी वजह से उससे करार तोड़ लिया है। सुशांत ने खुद ही अपने करियर की वाट लगा ली, ऐसा जानकारों का कहना था और इसके बाद दो महीने में सुशांत के खुदकुशी की खबर आ गई। इससे पर्दे पर का संभावित ‘जॉर्ज’ पर्दे के पीछे चला गया।

शिंदे परिवार क्यों मरा?
महाराष्ट्र व देश में गरीब तथा मध्यम वर्गीय श्रमिक, किसान रोज ही कहीं-न-कहीं खुदकुशी करता रहता है। कर्ज के बोझ तले दबकर विगत १० वर्षों में लाखों किसान मौत को गले लगा चुके हैं। ‘नोटबंदी’ के कारण कई लोगों की नौकरी और रोजगार छिन गया। इसकी वजह से सैकड़ों लोगों ने आत्महत्या कर ली। अब ‘लॉकडाउन’ के दौरान कई उद्योग और व्यवसाय बंद हो रहे हैं और इससे नौकरियों एवं रोजगारों पर भारी संकट खड़ा हो गया है। वह अवस्था भयावह है। पुणे में राजेश शिंदे ने पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली। स्कूल का डिजिटल पहचान पत्र बनाने का उसका छोटा-सा व्यवसाय था। लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद, शैक्षणिक संस्थान बंद, इसलिए स्कूलों पर निर्भर रहनेवाले व्यवसाय बंद। इसी चिंता के कारण राजेश शिंदे ने परिवार सहित जीवनलीला समाप्त कर ली। ऐसे अनेक खुदकुशी के मामलों का हमें सामना करना होगा। राजेश शिंदे और उसके परिवार की खुदकुशी एक शुरुआत भर है। राजेश शिंदे की फाइल पुलिस ने खुदकुशी बताकर बंद कर दी। शिंदे गरीब था। अपनी मौत से मर गया परंतु सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी को लोकप्रियता एवं उत्सव का स्वरूप मिल गया। इसलिए पुलिस उसकी खुदकुशी की जड़ और तह तक जा रही है।

यह हत्या नहीं है!
सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में एक बात स्पष्ट है, वह यह कि ये हत्या नहीं है। उसने सीधे अपने ही घर में आत्महत्या की। अब कुछ उप प्रश्न ऐसे हैं-
१) सुशांत बीते कुछ दिनों से कई मनोचिकित्सकों से इलाज करा रहा था। इस दौरान उसने मानसिक विकारों से संबंधित चिकित्सक बदले लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ।
२) सुशांत ने खुदकुशी से पहले कोई चिट्ठी (सुसाइड नोट) वगैरह लिखकर नहीं रखी थी। फिर भी सुशांत से संबंधित कई महिलाओं एवं इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से ११-११ घंटे पूछताछ की जा रही है। ये किसलिए?
३) सुशांत के पास काम नहीं था, यह झूठ सिद्ध हो रहा है और उसकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी थी। वह जिस मकान में रह रहा था उसका किराया ५ लाख रुपए के आसपास था। उसके पास महंगी गाड़ियां थीं। वह हर महीने १० लाख रुपए खर्च करता था, यह जगजाहिर है। अर्थात वह इसका लुत्फ उठा रहा था।
४) मैंने कहीं पढ़ा था कि यशराज फिल्म्स द्वारा सुशांत के साथ किए गए करार की पुलिस प्रत्यक्ष जांच कर रही है। इस करार की प्रति पुलिस ने मंगाई है। इस करार से कौन-सा सूत्र हाथ लगेगा?
५) सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद उसका किस अभिनेत्री से कैसा संबंध था? ये प्रकाशित हुआ। कम-से-कम १० अभिनेत्रियों के साथ ऐसे संबंधों का खुलासा हुआ है तथा इनमें से कुछ अभिनेत्रियों को पुलिस ने पूछताछ के लिए लगातार बुलाया। इसकी आवश्यकता नहीं थी। एक ३४ वर्षीय अभिनेता अलग-अलग अभिनेत्रियों से संबंध रखता है। उनमें कई लड़कियों से उसका ब्रेकअप हो चुका था और नाकामी से निराश होकर बाद में यही सुशांत आत्महत्या कर लेता है। उसके पास वैभव था, कीर्ति थी। जीने के साधन उपलब्ध थे परंतु उसकी गाड़ी में ब्रेक नहीं था। सुशांत एक अभिनेता था तथा निराशा के गर्त में जाकर जैसे अन्य लोग मौत को गले लगाते हैं, उसी तरह मौत स्वीकार की। उसका कुछ निर्माताओं और बड़े कलाकारों से संबंध खराब हुआ होगा, लेकिन आज उसी क्षेत्र में आयुष्मान खुराना से लेकर नवाजुद्दीन सिद्दिकी तक कई लोग दृढ़ता के साथ खड़े हैं। हमारे पिता बड़े स्टार रह चुके हैं, कई स्टार पुत्र इस वजह से पर्दे पर नहीं चले हैं। शाहरूख खान, सलमान खान की फिल्में भी धराशाई होती हैं और नए कलाकारों की फिल्में चलती हैं, उन्हीं में सुशांत राजपूत भी था ही।

उत्सवी खुदकुशी
प्रमुख अभिनेत्री कंगना रनौत ने बॉलीवुड के कुछ गिरोहबाजों का पर्दाफाश किया। इस क्षेत्र में `परिवारवाद और कुछ टोलीबाजों’ की दहशत है, ऐसा कंगना कहती हैं लेकिन फिर भी कंगना अपने क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान पर पहुंच ही गई हैं। सोनू निगम ने संगीत उद्योग में व्याप्त माफियागिरी पर हमला किया। उसमें अबु सालेम का नाम आया। यह परिवारवाद क्रिकेट, राजनीति, उद्योग ऐसे सभी क्षेत्रों में है। फिर भी नए लोग आते हैं और नाम कमाते हैं। परिवार और परिवारवाद से ज्यादा अच्छा काम बोलता है। जो पांव जमाकर खड़े रहते हैं, वही संघर्ष से आगे बढ़ते हैं। आज सुशांत सिंह के बारे में सर्वाधिक चर्चा उसके ‘अफेयर्स’ अर्थात लफड़ों को लेकर ही हो रही है। ब्रेकअप कर चुकी उसकी महिला मित्र आज पुलिस थाने के चक्कर काट रही हैं और मीडिया उन लड़कियों का पीछा कर रहा है। इनमें से किसी भी अभिनेत्री का नाम सुशांत ने अपनी किसी चिट्ठी में लिखा हो ऐसा दिख नहीं रहा है।
सुशांत की खुदकुशी एक उत्सव का निमित्त है। कई महिलाओं के साथ उसके लफड़े (ब्रेकअप) ही इस उत्सवी झुंड का केंद्र है।
सुशांत का इलाज करने के लिए मनोरोग चिकित्सकों की फौज खड़ी थी। जो मन से ही हार गया है, उस पर मनोचिकित्सक क्या करेंगे? ये पूरी मानसिक चिकित्सा का प्रयोग बाबा रामदेव कोरोना की दवा लाने के शोर मचाने जैसा ही है। इंदौर के आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुदकुशी कर ली। उन्हें किस चीज की कमी थी? राजनीति, उद्योगपति और नौकरशाहों में उनका प्रभाव था। कई बड़े लोगों के वे गुरु महाराज थे ही लेकिन निजी जीवन का तनाव वे सह नहीं पाए तथा दुनिया का कोई भी मनोचिकित्सक ऐसे निजी तनावों से मुक्ति नहीं दिला सकता है। भय्यूजी महाराज मनोरोग चिकत्सकों की सलाह ले ही रहे थे। परंतु एक दिन उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इसलिए मनोरोग चिकित्सक ऐसे मामलों में फेल सिद्ध हुए हैं। जीने के लिए संघर्ष खुद ही को करना होता है। कोपरखैरने के अमर पवार को नौकरी की तो पुणे के राजेश शिंदे को चूल्हे जलने की चिंता थी। वह चूल्हा हमेशा के लिए बुझ जाएगा, इस भय से उसने आत्महत्या कर ली।
शिंदे- पवार फाइल २४ घंटे में बंद हो गई।
सुशांत की फाइल हिल रही है और चल रही है। उसकी आत्महत्या थोड़ी अलग है।

आत्महत्या की मार्केटिंग!
किसी मौत या खुदकुशी का ‘उत्सव’ कैसे मना सकते हैं, किसी आत्महत्या की ‘मार्वेâटिंग’ कैसे की जा सकती है? इसके उदाहरण के रूप में सुशांत सिंह मामले को देख सकेंगे। जो उठता है वह इस प्रकरण में हाथ धो लेता है। इसका दो उदाहरण देता हूं और विषय को विराम देता हूं।
१) सुशांत सिंह राजपूत के जाने से उसके प्यारे कुत्ते ‘फज’ को गहरा आघात पहुंचा। सुशांत के प्यारे फज ने मालिक के जाने के गम में खाना-पीना ही छोड़ दिया और उसने भी दुखी होकर मौत को गले लगा लिया। यह खबर प्रसार माध्यमों में व सोशल मीडिया के जरिए वायरल हुई। बाद में खुलासा हुआ कि ‘फज’ जीवित है और ऐसा कुछ भी घटित नहीं हुआ है।
२) सुशांत के निधन के बाद ५वें-६ठें दिन, अभिनेत्री राखी सावंत ने एक और मजाक किया। उसने अपना एक वीडियो वायरल करके कहा कि कल रात सुशांत मेरे सपने में आए थे। सुशांत ने उन्हें नींद से जगाया और कहा कि ‘मोहतरमा आप विवाह कर लें, मुझे आपकी कोख से जन्म लेना है।’
सुशांत की खुदकुशी के ये साइड इफेक्ट्स हैं। सिनेमा के पर्दे पर पहले ‘स्पेशल इफेक्ट्स’ जैसी चीज होती थी। अब ‘सुशांत इफेक्ट्स’ है। किसी को मौत के बाद भी सुकून से जीने नहीं देते हैं। सुशांत की प्रताड़ित आत्मा को भी ‘डिप्रेसन’ आ जाए ऐसा ये मामला है। यह अब तो रुक जाना चाहिए!