सैम, ‘सामना’ पढ़ो!

सैम पित्रोदा को अपनी अकल का तारा तोड़ने की कोई जरूरत नहीं थी। वे ज्ञानी, सयाने व अक्लमंद हैं इस बारे में किसी के मन में संदेह होने की कोई वजह नहीं। देश में इन दिनों जो कंप्यूटर, सूचना और प्रसार की क्रांति हुई है उसका श्रेय निश्चित ही सैम पित्रोदा को जाता है। पित्रोदा ये कोई कांग्रेस के कार्यकर्ता वगैरह नहीं हैं। वे कल तक राजीव गांधी के तकनीकी सलाहकार थे। आज बहुत होगा तो वे राहुल गांधी के उसी क्षेत्र के सलाहकार होंगे। इसलिए उन्हें देश की रक्षा से संबंधित बातों पर फालतू बकवास करने की जरूरत नहीं। अब ‘पुलवामा’ हमले के संदर्भ में फालतू का बयान देकर पित्रोदा महाशय ने बेवजह विवाद का तूफान खुद पर ले लिया है। ‘पुलवामा जैसे हमले होते ही रहते हैं। उसके लिए पाकिस्तान पर हवाई हमला करना गलत है।’ ऐसा दिव्य विचार पित्रोदा ने व्यक्त किया है। यही वजह है कि कांग्रेस को ऐन चुनाव के मौके पर पसीना छूटने लगा है। पित्रोदा लंबे समय तक विदेश में रहते हैं और अपनी सुविधानुसार हिंदुस्थान में आते रहते हैं। इसलिए कश्मीर, पाकिस्तान के बारे में स्वदेश के लोगों की भावना उन्हें क्या समझ आएगी? पित्रोदा द्वारा अचानक किए गए इस मुख विस्फोट के चलते कांग्रेस को मुंह छिपाकर घूमने की नौबत आई है। हालांकि पित्रोदा कांग्रेस के महान कार्यकर्ता, नेता या प्रवक्ता नहीं हैं। इसलिए उनके इस बयान को कांग्रेस का अधिकृत बयान नहीं माना जा सकता। लेकिन वे कांग्रेस या गांधी परिवार के ‘लाडले’ निश्चित ही हैं। कुछ मुट्ठी भर लोग हमारे देश में हमला करते हैं इसलिए उनके लिए आप पूरे पाकिस्तान को दोषी क्यों ठहराते हो? ये उनका एक और सवाल है। अब पित्रोदा कहते हैं उसके अनुसार ये मुट्ठी भर लोग कौन हैं और उन मुट्ठी भर लोगों को कौन पाल रहा है? तो निश्चित ही पाकिस्तान की ओर उंगली दिखाना पड़ेगा। पुलवामा जैसे पाकिस्तान समर्थित हमले होते रहते हैं और हुए हैं लेकिन हिंदुस्थान की ओर से हवाई हमला मात्र अब किया गया। क्योंकि ४० जवानों की हत्या होने के बाद संयम का बांध टूट गया। आखिरकार देश का स्वाभिमान और जवानों के अभिमान नाम की भी कोई चीज है। पाकिस्तान आतंकवादियों का पोषण करता है और हिंदुस्थान को बर्बाद करने की साजिश रचनेवाले आतंकियों का अड्डा पाकिस्तान में है। इसलिए हमला कर बदला नहीं लिया तो दुनिया में हमारा देश नामर्दों के देश के रूप में गिना जाएगा। हम खुली आंखों से जवानों का बलिदान देखते बैठे, ऐसा किसी को लगता होगा तो उनकी धमनियों में भारत माता का खून निश्चित ही नहीं उबल रहा होगा। कुछ लोगों के कारण पूरे पाकिस्तान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, ऐसा पित्रोदा कहते हैं। एक तर्क के रूप में संभवत: यह किसी को गलत नहीं लगेगा लेकिन सवाल पाकिस्तान के, वहां के सत्ताधारियों द्वारा हिंदुस्थान द्वेष का और उसके जरिए उनके द्वारा हमारे खिलाफ पुकारे गए ‘छिपे युद्ध’ का, हमारे देश में किए जानेवाले आतंकवादी हमले का और उसमें मरनेवाले सैकड़ों निरपराध तथा शहीद होनेवाले जवानों का है। अब प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में उनके प्रधानमंत्री इमरान खान को शुभकामनाएं दी हैं। दिल्ली में पाकियों के राष्ट्रीय दिवस का हमारी सरकार ने बहिष्कार किया लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से इमरान खान को शुभकामनाएं दीं। ये शुभकामना भी अब विवाद में अटक गई है और कांग्रेस उसका इस्तेमाल कर रही है। मगर एक ‘प्रोटोकॉल’ के रूप में पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री को शुभकामना देना और पुलवामा हमले का बदला लेना ये दोनों बातें अलग-अलग हैं। पाक जैसा देश दुनिया के नक्शे पर शेष न रहे यह भावना सिर्फ हिंदुस्थानियों की ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक राष्ट्रों की है। पाकिस्तान अब देश नहीं रहा बल्कि वैश्विक आतंकवादियों का ‘अड्डा’ बन गया है। इस अड्डे को ध्वस्त कर हिंदुस्थान को सुरक्षित रखना ही हमारी सेना का कर्तव्य है। सेना ने, हवाई दल ने हमला किया। जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी अड्डा नष्ट किया। उसमें ३०० से अधिक आतंकवादी मारे गए, ऐसा सरकार का कहना है। पित्रोदा कहते हैं, ‘भारतीय हवाई हमले के बारे में मैंने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ तथा अन्य अखबारों में पढ़ा है कि पाकिस्तान पर भारत ने सचमुच हमला किया था क्या? ३०० आतंकवादी सचमुच मारे गए क्या? क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया कह रही है कि हमले में कोई भी मारा नहीं गया है। इसलिए भारतीय नागरिक के रूप में मुझे यह खराब लगता है।’ पित्रोदा को खराब लगने की जरूरत नहीं। पाक पर हुआ हमला जरूरी ही था। जरूरत पड़ी तो इससे बड़ा हमला करना पड़ेगा। हिंदुस्थानी नागरिक के रूप में पाक पर हुए हमले का उन्हें अभिमान होना चाहिए। वे अंतर्राष्ट्रीय मीडिया (इंटरनेशनल मीडिया) क्या कह रही है उसे न देखें। कल से पित्रोदा ‘सामना’ पढ़ना शुरू कर दें। उनके सिर पर तथा ठुड्डी की दाढ़ी पर लगे जाले अपने आप दूर हो जाएंगे। पुलवामा हमले का उन्हें दुख होगा जिसके कारण उनकी धमनियों का खून संताप के साथ उबलने लगेगा और हिंदुस्थानी सैनिकों द्वारा पाक पर किए गए हवाई हमले से उनका सीना तन जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को नजरअंदाज कर वे देसी मीडिया देखें। ‘सामना’ पढ़ना ही सबसे लाभकारी उपाय है!