" /> सोशल डिस्टेंस के साथ मिलेगी, चार धाम यात्रा को हरी झंडी!

सोशल डिस्टेंस के साथ मिलेगी, चार धाम यात्रा को हरी झंडी!

सरकार ने ८ जून से शर्तों के साथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत देने का मन बना लिया है। उत्तराखंड में भी चार धाम यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। बद्रीनाथ व केदारनाथ मंदिर में भी शर्तों का पालन कराने के लिए प्रशासन तैयारियों में जुटा है। बशर्ते केंद्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिल जाए।

बद्रीनाथ व केदारनाथ धाम में यात्रा को लेकर मंदिर और आसपास के स्थलों को लगातार सेनिटाइज किया जा रहा है। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराने के लिए श्रद्धालुओं की जहां कतार लगती है, वहां पेंट के सहारे एक-एक मीटर की दूरी पर गोले बनाए जा रहे हैं। केवल मंदिर परिसर ही नहीं बल्कि मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग पर भी श्रद्धालुओं के बीच एक-एक मीटर की दूरी सुनिश्चित करने के लिए गोले बनाए जा रहे हैं।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिरों में श्रद्धालु कब से दर्शन कर सकेंगे, मंदिर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। तैयारियों की रफ्तार को देखकर उम्मीद जताई जा रही है कि बाबा बद्रीनाथ व केदारनाथ के द्वार जल्द ही आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस संबंध में नगर पंचायत बद्रीनाथ के अधिशासी अधिकारी (ईओ) सुनील पुरोहित ने बताया कि यात्रा संबंधी अंतिम तैयारियां उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने पर की जाएंगी।

आठ जून से या उसके बाद सरकार सीमित संख्या में चारधाम यात्रा को शुरू करेगी, ऐसा माना जा रहा है। हालांकि शुरुआत में केवल राज्य के लोगों को ही यात्रा करने की अनुमति होगी। दूसरे दौर में अन्य राज्यों से बात कर बाहरी यात्रियों के लिए भी यात्रा को शुरू किया जाएगा।
सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए ही यात्रियों की संख्या सीमित रखी गई है। चारधाम यात्रा के पहले चरण में दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति नहीं होगी। क्योंकि मंदिरों में भीड़ होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। उत्तराखंड के आर्थिक संसाधनों की रीढ़ प्रति वर्ष होने वाली चार धाम यात्रा पर इस बार कोरोना महामारी का काला साया पड़ गया था, जिसे दूर करने के लिए सशर्त यात्रा की अनुमति का मार्ग खोजा जा रहा है। हालांकि उत्तराखंड के मैदानी जनपद ही नहीं, पर्वतीय जनपदों में भी कोरोना खतरे के बादल रह -रह कर उमड़ रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा भी राज्य में रेड ज़ोन को छोड़कर सामान्य दुकानें सवेरे से शाम तक खोलने की अनुमति दी गई है। लेकिन राज्य ही नहीं देश मे कोरोना की रफ्तार तेज हो जाने से चार धाम यात्रा पर देश- विदेश से आने वाले भक्तों के लिए न देश में और न ही विदेश में हालात अनुकूल हो पाए हैं। इस कारण लगता है इस बार चारो धाम की यात्रा सीमित भक्तों की मौजूदगी मात्र से ही संपन्न हो पाएगी। जिसका प्रतिकूल असर उत्तराखंड की आर्थिक हालत पर भी पड़ना निश्चित है।

इतिहास में पहली बार बद्रीधाम और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख के बदलाव हुआ है। भगवान बद्रीधाम के कपाट खुलने का दिन टिहरी राजदरबार में राजा की कुंडली से निश्चित किया जाता है। राजा टिहरी दरबार की कुंडली और धर्मिक परंपराओं को देखते हुए कोरोना के संकट काल के दौर में बदरीधाम के कपाट खोलने की तिथि में बदलाव हुआ है। बद्रीनाथ के धर्माधिकारी का मानना है कि महामारी के चलते धर्म शास्त्र भी यही कहता है, जो आज टिहरी राजदरबार में महाराज ने निणर्‍य लिए हैं। चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार की चिंता काफी बढ़ी हुई है। चारधाम यात्रा में गत वर्षों में लाखों तीथर्‍यात्री केदारनाथ, बदरीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धामों में आते रहे हैं। चार धाम यात्रा के प्रवेश द्वार हरिद्वार व ऋषिकेश कोरोना की दृष्टि से ऑरेंज ज़ोन में है, ऐसी स्थिति में सरकार चारधाम यात्रा को नियंत्रित भी सकती है तथा तीथर्‍यात्रियों के लिए कड़े नियम लागू कर सकती है। ताकि कोरोना से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। चारधाम यात्रा को लेकर सरकार अपना सकारात्मक मन बना रही है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में चारधाम को लेकर कई चक्र की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन कोरोना के बढ़ रहे प्रकोप को देखते हुए सरकार भी नियंत्रण कक्ष खोलने के व सशर्त सीमित यात्रा अनुमति देने के अलावा कुछ भी करने की स्थिति में नहीं दिखाई देती।

कोरोना वायरस के दहशत से राज्य के पर्यटन को अब तक करोड़ों रुपए की क्षति हो चुकी है। गत वर्षों का आकलन करें तो पिछले तीन महीने में पर्यटन उद्योग को कम से कम १५०० करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति हो चुकी है। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा गढ़वाल की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में यह यात्रा शुरू होनी थी। चार धाम यात्रा की शुरुआत मुख्य रूप से ऋषिकेश से होती है। यहां से यात्रियों को चार धाम के लिए लाने ले जाने का जिम्मा संयुक्त यातायात रोटेशन समिति का होता है। गत वर्ष ३० लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए चार धाम पहुंचे थे। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्ग में हजारों होटल, लॉज के साथ-साथ खाने पीने की व्यवस्था करने वाले ६ महीने पहले तैयारी शुरू हो जाती है। १५ अप्रैल से १५ जून के बीच साल भर का ८० प्रतिशत व्यवसाय इन्हीं २ महीनों में होता है। लेकिन इस बार मार्च के महीने से ही लॉकडाउन शुरू होने के कारण चार धाम यात्रा की बुकिंग कैंसिल होने लगी थी जो अभी तक जारी है और जून माह का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है।जिससे राज्य को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए चारधाम में किसी प्रकार की भीड़ नहीं होने दी जाएगी। हालांकि निर्धारित तिथियों पर चारधाम के कपाट खुलने से वहां परंपरागत ढंग से पूजा-अर्चना होने की बात सरकार की ओर से की गई है, जिसे सीमित संख्या में पुजारी संपन्न करा रहे हैं। फिलहाल वह भी बिना भक्तो की मौजूदगी के। चारधाम यात्रा के सफल होने के आसार दिखाई नहीं पड़ रहे हैं, अलबत्ता वीडियो अथवा टेली कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये लोग चारधाम के दर्शन कर सकते हैं। चारधाम के दर्शनों के लिए ऑनलाइन क्या-क्या किया जा सकता है, उसके लिए सरकार की ओर से कदम उठाने के दावे किए जा रहे हैं।

चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन ने बताया कि कपाट हर वर्ष की तरह तय किये गए समय पर खोले गए और पूजा-अर्चना व रीति रिवाज का पूरा पालन किया गया है। लेकिन चारधाम में श्रद्धालुओं को आने की इजाजत शर्तो के साथ ही होगी, वह भी सोशल डिस्टेंस का अनिवार्य पालन कराते हुए ही। यह यात्रा सीमित रूप में होने दी जाएगी, ऐसा माना जा रहा है।