स्थान परिवर्तन से होगा लाभ

गुरुजी दिनों-दिन परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। मेरा जॉब भी छूट गया है कोई उपाय बताएं?
– मनोहर
(जन्म- ५ अक्टूबर, १९८९ समय- रात्रि २२:४० मुंबई)
मनोहरजी, आपका जन्म मिथुन लग्न एवं वृश्चिक राशि में हुआ है। आपकी राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है, जो २४ जनवरी, २०२० तक चलेगी। आपकी कुंडली में शनि भाग्येश एवं अष्टमेश होकर सप्तम भाव पर बैठकर अपने घर भाग्य भाव को देख रहा है। अत: स्थान परिवर्तन निश्चित आवश्यक है तथा स्थान परिवर्तन से आपको लाभ भी प्राप्त होगा, लेकिन द्वितीय स्थान में बैठ स्थान पर बैठा केतू एवं अष्टम स्थान पर बैठा राहु कुलिक नामक कालसर्प योग ही बना रहा है। इस दोष के कारण पूर्ण तरह से भाग्योदय भी नहीं हो पा रहा है। प्रयास करें जल्द-से-जल्द आपको नौकरी मिल जाएगी, लेकिन कालसर्प योग की शांति वैदिक विधि से आपके लिए आवश्यक है तभी आपको स्थाई नौकरी एवं परिश्रम का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है जीवन की विशेष गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरुजी नौकरी छूट गई है। आर्थिक समस्याओं से परेशान हूं कोई उपाय बताएं?
– विकास दुबे
(जन्म- २२ दिसंबर, १९९१ समय- रात्रि १:०५ मुंबई)
विकासजी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का विचार अच्छे प्रकार से किया गया। आपकी कुंडली में सुख भाव पर सूर्य के साथ में राहु एवं कर्म भाव पर चंद्रमा के साथ में केतु बैठकर बासुकी नामक कालसर्प योग बना रहा है। वर्तमान समय में गोचरीय व्यवस्था के आधार पर आपकी राशि मिथुन पर ही राहु बैठकर आपके मन को व्यथित कर रहा है एवं कार्यक्षेत्र को भी अव्यवस्थित बना दिया है। वर्तमान समय में गुरु की महादशा में राहु की अंतर्दशा भी चल रही है। सर्वप्रथम राहु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए तालाब में मछली को चारा डालें एवं पीपल वृक्ष की परिक्रमा ७ मिनट तक करना आपके लिए आवश्यक है। वर्तमान समय को विशेष अनुकूल बनाने के लिए वासुकि नामक कालसर्प योग की वैदिक विधि से पूजन करना आवश्यक है। ऐसा करने पर आपके विकास का मार्ग प्रशस्त भी हो जाएगा और जीवन के अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

समय अनुकूल नहीं चल रहा है। काम भी छूट गया है और परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। कोई उपाय बताएं?
– आशीष पांडेय
(जन्म- २७ जून, १९८७ समय- रात्रि ४:०० बजे जौनपुर, उत्तर प्रदेश)
आशीष पांडेजी, आपका जन्म ब्रेक लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली पर अच्छी प्रकार से विचार किया गया। पंचम भाव पर केतु एवं लाभ भाव पर राहु ने बैठ कर आपकी कुंडली में पद्म नामक कालसर्प योग बना दिया तथा गोचरीय व्यवस्था के आधार पर वर्तमान समय में मिथुन राशि पर ही राहु विद्यमान है। चंद्रमा के साथ राहुल की वजह से समय-समय पर मानसिक उलझन में पड़े रहना तथा सामनेवाले को उपयुक्त उत्तर न दे पाना। आपकी कुंडली में इस समय शनि की महादशा में राहु का अंतर चल रहा है जो ८ सितंबर २०१८ से ही प्रारंभ होकर के १५ जुलाई, २०२१ तक चलेगा। इस समय आप पूर्ण प्रकार से उपयुक्त फल का प्राप्ति नहीं हो पा रहा। राहु से शुभ फल प्राप्त करने के लिए ४३ दिनों तक मछली को आटे की मीठी गोली किसी तालाब में जरूर डालें एवं पीपल के पेड़ की परिक्रमा भी ४३ दिन तक शनिवार से प्रारंभ करके करें। पीपल के पेड़ की परिक्रमा ७ मिनट करना आवश्यक है। परिक्रमा करते समय ‘ॐ पिप्लाश्रय संस्थिताय नम:’ मंत्र भी बोलना आवश्यक है। धीरे-धीरे करते हैं तो धीरे-धीरे सारी नकारात्मक उर्जा समाप्त हो कर आपके हर प्रकार के विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा।

गुरुजी मन अशांत रहता है तथा विवाह में विलंब क्यों हो रहा है? कोई उपाय बताएं!
– सुनील कुमार दुबे
(जन्म- ८ फरवरी, १९८८ प्रात: ७:०० बजे प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
सुनील कुमार दुबेजी, आपका जन्म मकर लग्न एवं कन्या राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का विचार सूक्ष्म तरीके से किया गया। नवग्रहों में चंद्रमा ग्रह मन का कारक ग्रह माना जाता है और आप आपकी कुंडली में चंद्रमा ग्रह सप्तम भाव का स्वामी होकर भाग्य भाव में केतु के साथ बैठा है तथा पराक्रम भाव पर शुक्र ग्रह के साथ में राहु बैठकर के बासुकी नामक कालसर्प योग बना रहा है। आपकी कुंडली में भाग्य ग्रहण दोष भी बना हुआ है। इन्हीं कारणों से मन की व्यग्रता भी बनी रहती है तथा विकास में अनेक प्रकार की बाधाएं भी आती रहती हैं। आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है लेकिन लग्न में सूर्य एवं बारहवें भाव पर शनि बैठकर के विवाह में विलंब कर रहा १०-०४-२०१९ से विवाह के लिए उपयुक्त समय प्रारंभ हो चुका है। अनुकूल जीवनसाथी के निर्धारण करने का उपयुक्त समय है। जीवन को पूर्णता विकास का मार्ग प्रशस्त करने के लिए भाग्य ग्रहण दोष एवं कालसर्प योग की वैदिक विधि से पूजा आवश्यक है। जीवन की विशेष गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरुजी, मेरा जॉब कब तक लगेगा और जीवन में विकास का मार्ग कब तक प्रशस्त होगा?
– सुशील कुमार दुबे
(जन्म- १२ मई, १९९२ समय- दिन में १:१५ पालघर, थाना)
सुशील कुमारजी, आपका जन्म सिंह लग्न एवं कन्या राशि में हुआ है। सिंह लग्न में जन्म होने के कारण आप हर समय शेर की तरह उत्साहित रहते हैं और विश्राम करने का मन नहीं करता तथा आपकी कुंडली में लग्नेश सूर्य भी उच्च राशि का होकर भाग्य भाव में बैठ करके आपको भाग्यशाली तो बना दिया है। बुद्धिमान भी बनाया है लेकिन भाग्य भाव में सूर्य बैठकर पराक्रम भाव को नीच की दृष्टि से देख रहा है। अत: समय-समय पर आपके आत्मबल को कमजोर भी बना देता है। सूर्य से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन सूर्य नारायण को जल प्रदान करें एवं प्रणाम करें वर्तमान समय में आपकी राशि पर शनि की ढैया तथा राहु की महादशा भी चल रही है, जो आपको अत्यधिक परिश्रम कराएगा लेकिन परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होने देगा क्योंकि राहु एवं केतु के कारण आपकी कुंडली में कालसर्प योग बना हुआ है। इस योग के कारण शिक्षा क्षेत्र में परिश्रम के आधार पर पूर्ण फल भी नहीं प्राप्त कर पा रहे होंगे। शुभ फल के लिए मछली को चारा तालाब में या किसी नदी में प्रवाहित करें एवं पीपल की पेड़ की परिक्रमा ही करना आपके लिए आवश्यक है पुन: वैदिक विधि से कालसर्प योग की शांति कराएं और जीवन के विशेष गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।