" /> हंदवाड़ा में शहीद अश्वनी का पार्थिव शरीर पहुंचा वाराणसी, ससम्मान दी गई अंतिम विदाई

हंदवाड़ा में शहीद अश्वनी का पार्थिव शरीर पहुंचा वाराणसी, ससम्मान दी गई अंतिम विदाई

कश्मीर के हंदवाड़ा में सीआरपीएफ पेट्रोलिंग पार्टी पर हुए आतंकी हमले में शहीद गाजीपुर निवासी अश्वनी यादव का पार्थिव शरीर बुधवार को वाराणसी पहुँचा। वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर 95वीं बटालियन के जवानों ने शहीद अश्वनी के पार्थिव शरीर को नम आंखों से कांधा दिया। इस दौरान नियम और मर्यादाओं में बंधे जवानों की बाहें आक्रोश से फड़फड़ा उठीं। साथी को देशभक्ति नारों के साथ सलामी देकर उनके पैतृक गाँव गाजीपुर के लिए रवाना किया।

पार्थिव शरीर शहीद के पैतृक गांव में पहुंचते ही संकटकाल में सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह किये बिना लोग देश के वीर सपूत के अंतिम दर्शन को उमड़ पड़े। इस दौरान शहीद के शोक संतृप्त परिवार को ढांढस देने के लिए अधिकारियों का हुजूम भी मौजूद था। देशभक्ति नारों के साथ अश्विनी कुमार अमर रहे के नारों ने मानो उनके पैतृक आवास को तीर्थाटन में बदल दिया। मगर चिर निद्रा में सोये ताबुत में बंद अश्विनी कुमार का शव जैसे ही दरवाजे पर पहुंचा तो बुढ़ी मां लालमुनी यादव, छाती पीट-पीटकर रोने लगी। बेसुध पत्नी अंशु देवी को संभालने में लोगों के पसीने छूट गये। छह वर्षीय बेटी आयशा और चार वर्षीय बेेटे आदित्य को पता तक न था कि उनके सर से पिता का साया हमेशा के लिये छीन गया है।

शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए उनके पैतृक आवास पहुंचे 95 बटालियन के कमांडेंट नरेन्द्र पाल सिंह ने शहीद जवान अश्विनी कुमार की शहादत पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि शरीर पर वर्दी पड़ते ही हम सर पर कफन बांध लेते है। हम जवानों के लिये गर्व की बात होती है जब हमारा शरीर तिरंगे से लिपटकर हमारे आंगन में पहुंचता है।

गाजीपुर के नोनहरा के चकदाउद गांव में अपने लाल को अंतिम विदायी देने के लिये लोगों का जमावड़ा पहले से ही लगने लगा था, लेकिन लोगों में इस बात को लेकर काफी रोष था, कि परिवार का अकेला कमाऊ सदस्य के शहीद होने के खबर के बाद भी अब तक उनके परिवार से मिलने, कोई भी जनप्रतिनिधि या मंत्री मिलने नहीं पहुंचा था।