हक का पालनाघर!

विरोधी दल के नेता राधाकृष्ण विखे-पाटील के सुपुत्र सुजय ने भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया है। पिता और परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर मैंने यह निर्णय लिया है, ऐसा छोटे विखे-पाटील ने घोषित किया है। चिरंजीव विखे-पाटील को किसी भी कीमत पर सांसद बनना है और भाजपा प्रवेश के साथ ही उन्हें नगर से भाजपा की उम्मीदवारी मिलेगी, ऐसा संकेत है। सुजय के कारण भाजपा पावरफुल हो गई है, ऐसी प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री फडणवीस ने जताई है। सुजय के पीछे-पीछे कांग्रेस-राष्ट्रवादी आदि दलों के कई लोग भाजपा की दहलीज पर कतार में खड़े हैं और इसकी खुशी मुख्यमंत्री तथा अन्य लोगों के चेहरे पर दिखाई दे रही है। ऊपर से चंद्रकांत दादा पाटील ने ऐसी भी घोषणा की है कि राज्य में सात-आठ दिनों में बहुत बड़ा राजनीतिक भूकंप आएगा। चंद्रकांत पाटील के इस संभावित भूकंप की घोषणा के बाद राज्य का आपदा प्रबंधन सतर्क हो गया होगा। इस भूकंप का केंद्र बिंदु निश्चित तौर पर कहां है? भूगर्भ की हलचल कहां और किस तरह जारी है? इसका अंदाज आनेवाले कुछ दिनों में लग जाएगा। विखे-पाटील परिवार की तरह बड़ा राजनीतिक घराना भाजपा के हाथ लगेगा तथा भाजपा, कांग्रेस की विचारधारा वाली नींव पर विराजमान होनेवाली एक बहुत बड़ी पार्टी बन जाएगी। इस दिशा में हिंदुत्ववादी विचारों के नेता काम में जुट गए हैं। उस दृष्टिकोण से महाराष्ट्र में राजनीतिक भूकंप होने की संभावना जताई जा रही होगी तो वो गलत है। इस बीच अकलूज के मोहिते पाटील के छोटे रणजीत सिंह भी अपने व्यक्तिगत काम के लिए भाजपा के मंत्री से मिले हैं और यह घराना भी भाजपा के जाल में आने की खबरें प्रकाशित हुई हैं। कांग्रेस-राष्ट्रवादी के नाराज लोगों को साथ में लेकर हिंदुत्ववादी दलों को आगे जाना होगा तो जिन्होंने कई वर्षों तक विचारों का भगवा झंडा हाथ में लिया है, वे क्या करें? ऐसा सवाल पूछा जा सकता है। भाजपा या शिवसेना कांग्रेसवालों के लिए अपने अधिकार का ‘पालनाघर’ न बने, हम इस विचार के हैं। महाराष्ट्र के घराने कांग्रेस के थे। उन घरानों के खिलाफ हमारा संघर्ष था। कांग्रेसी संस्कृति पर प्रधानमंत्री मोदी ने कल ही टिप्पणी की है। कांग्रेस और भ्रष्टाचार ये दोनों एक-दूसरे के वैकल्पिक शब्द हैं, ऐसा मोदी का कहना है। दूसरी बात ऐसी है कि कांग्रेस-राष्ट्रवादी का ‘इनकमिंग’ आज अपने घर में लाभदायक लग रहा होगा मगर बाद में वो तकलीफदेह साबित हो सकता है, इसका अनुभव हमने किया है। सत्ता है इसलिए लोग आज आ रहे हैं और सत्ता जाते ही दूसरा रिश्ता ढूंढने लगते हैं। आज शिवसेना पर टिप्पणी करनेवाले राधाकृष्ण विखे-पाटील एक समय शिवसेना में थे और पिता-पुत्र को एक ही समय केंद्र तथा महाराष्ट्र में मंत्री पद सिर्फ शिवसेना ने ही दिया था। लेकिन युति की सत्ता जाते ही उन्होंने पलटी मारी। राधाकृष्ण विखे-पाटील जब विरोधी दल नेता थे तब कभी विरोधी दल नेता की तरह काम नहीं किया। सत्ता में रहकर भी शिवसेना ने जिस तरह सख्त रुख अपनाया, उसकी तुलना में उन्होंने तिल मात्र भी विरोध नहीं जताया। उल्टे सत्ता में रहकर विरोध करते हैं इसलिए शिवसेना से इस्तीफे की मांग करनेवाले विखे-पाटील पर अब नैतिकता के मुद्दे पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। ये घराने मतलब विचारों के ब्रह्मवाक्य नहीं हैं। ये किसी संगीत या गायिकी के घराने नहीं थे। हवा जिस तरफ बहेगी उस तरफ पीठ घुमानेवाले घराने हैं। कल को शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा तो उस समय भूकंप का रिमोट शिवसेना के पास होगा और ये घराने शिवसेना भवन की कतार में खड़े होंगे। इसलिए अपने लोग और मूल विचार ही सच हैं। अस्थाई सूजन किस काम की? फिर भी तेज-तर्रार सुजय विखे-पाटील के नए कार्यकाल को हम शुभकामनाएं दे रहे हैं। आप आए, खुशी है।