" /> हड़ताल पर नहीं गए बेस्ट कर्मचारी : सड़कों पर चली 1542 बसें

हड़ताल पर नहीं गए बेस्ट कर्मचारी : सड़कों पर चली 1542 बसें

1,400 कंडक्टर-1,642 ड्राइवरों ने लगाई हाजिरी
कोरोना के बीच घोषित यूनियन के निर्देशों को दरकिनार कर सोमवार को बेस्ट के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं गए। रोज की तरह कल भी वे मुंबईकरों को अपनी सेवा देने के लिए काम पर लौटे। सोमवार को 10 बजे तक 1,400 कंडक्टर और 1,642 ड्राइवरों की हाजिरी के साथ शहर की सड़कों पर 1,542 बेस्ट की बसें चलीं।
जानकारी के मुताबिक यूनियन के निर्देश को दरकिनार कर बेस्ट कर्मचारी सोमवार को काम पर पहुंचे। सुबह के 10 बजे तक 1,499 कंडेक्टर, 1,642 ड्राइवर, 100 इंस्पेक्टर 69 स्टाटर काम पर पहुंचे। इनकी मदद से 1,542 बसों का संचालन शुरू किया गया। इससे मुंबई की सारी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलती रहीं। शहर के विविध स्थानों पर काम कर रहे बेस्ट कर्मचारियों से सामना संवाददाता ने इस विषय पर चर्चा की सभी ने कहा कि मुसीबत के इस  समय में हम घरों में नहीं बैठ सकते परंतु प्रशासन को भी हमारा ख्याल होना चहिए। अब तक बेस्ट के 120 कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 16 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं लगभग 55 लोग ठीक होकर अपने घर वापस आ चुके हैं।
गौरतलब है कि बेस्ट यूनियन ने सोमवार से हड़ताल की घोषणा की थी। उनका कहना था कि मांगें पूरी न होने तक सभी कर्मचारी अपने घरों में क्वारंटीन रहेंगे। दूसरी ओर बेस्ट प्रबंधन ने हड़ताल से इंकार करते हुए कहा था कि हमारी बसें अपनी सेवाएं देती रहेंगी। सोमवार सुबह बेस्ट कर्मचारी यूनियन की मांग को दरकिनार कर हड़ताल न करते हुए काम पर पहुंचे।
सरकार हमारा भी ख्याल रखे
बस चालक राम दयाल मिश्र कहते हैं कि ऐसे समय में हम हड़ताल कैसे कर सकते हैं? हमारे डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी और दूसरे विभागों के लोग सेवा कर रहे हैं और हम घरों में बैठें रहें। इसके लिए हमारी आत्मा तैयार नहीं है। किसी को किसी ने काम पर आने को नहीं कहा, सब अपनी मर्जी से काम पर आए। उन्होंने कहा कि हम अपना काम कर रहे हैं, सरकार को चाहिए कि वे हमारी सुरक्षा का ध्यान रखें। सुरक्षा की मांग करना कहां का गलत है?
ये समय है राष्ट्र सेवा का
बस कंडक्टर संजय दलवी (55) बताते हैं कि मैं लॉकडाउन में लगातर काम कर रहा हूं। ये समय है राष्ट्र सेवा का, पर यह भी सच है कि प्रशासन को हमारे स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। हम भी इंसान हैं, दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हमारे परिवारों में भी भय है। पर हम काम कर रहे हैं। हम सुरक्षा ही तो मांग रहे थे।
मैं अपना फर्ज निभाऊंगा
एक बेस्ट कर्मचारी की पत्नी संगीता बताती हैं कि हमारा एक छोटा-सा कमरा है, जिसमें बच्चों के साथ हम रहते हैं। घर में भय का माहौल है। मेरी सास कहती हैं कि जब सरकार ध्यान नहीं दे रही है तो काम छोड़ दे और गांव में आकर रहो। पर ये मानते नहीं हैं। कहते हैं कि जाने दे संकट की इस घड़ी में मेरा काम मैं करूंगा अपना फर्ज निभाऊंगा और काम पर रोज जाऊंगा।
1,200 एसटी बसें थी तैयार
हड़ताल की घोषणा के चलते बेस्ट प्रशासन ने एहतिहात के तौर पर एसटी महामंडल से 1,200 बसों को ड्राइवरों सहित शहर के विभिन्न डिपो में पहुंचा दिया था। यदि हड़ताल होती तो ये बसें जरूरी सेवा के तहत लोगों को अस्पतालों और दूसरे स्थानों पर पहुंचाने का काम करतीं। पर हड़ताल न होने के चलते बसें जहां की तहां खड़ी रहीं।