हनी ट्रैप में कैसे फंसते हैं शिकार?

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आज कल जिस शब्द की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है हनी ट्रैप। क्या आप को मालूम है कि हनी ट्रैप किस बला का नाम है और इसके जरिए कैसे अपने शिकार जाल में फंसाया जाता है। हनी ट्रैप ठीक वैसे ही जैसे कोई मक्खी शहद के लालच में उस पर बैठ जाती है और बाद में जब वह रस पीकर उड़ना चाहती है तो उड़ नहीं पाती है। क्योंकि तक उसके पंखों पर शहद लग चुका होता है और वह उड़ नहीं पाती है। वह ट्रैप हो जाती है। उस दौरान न तो वह शहद ही पी पाती है और न ही वहां से उड़कर बाहर निकल पाती है।

दरअसल, दुनिया के तमाम देश अपने दुश्मन का राज जानने के लिए नए-नए हथकंडे आजमाते रहते हैं। उन्हीं में से एक है हनी ट्रैप। इसमें महिलाओं का सहारा लिया जाता है। फेसबुक या हाई प्रोफाइल पार्टियों के जरिए टारगेटेड लोगों की लड़कियों से दोस्ती कराई जाती है। फिर धीरे धीरे ईमेल और फोन नंबरों का आदान प्रदान कराया जाता है। हनी ट्रैप के मिशन पर निकली महिला उस व्यक्ति के साथ घुमने और मिलने का सिलसिला शुरू करती है। फिर वह महिला दोस्ती की आड़ में जरूरी जानकारियां हासिल करती है।

इसके लिए महिला सिर्फ लच्छेदार बातों का ही सहारा नहीं लेती बल्कि अपने शिकार को ब्लैकमेल भी करती है। अगर टारगेटेड व्यक्ति की कोई आपत्तिजनक तस्वीर या खास बातचीत की कोई डिटेल हाथ लग जाए तो उसे जगजाहिर करने की धमकी दी जाती है। बदनाम होने के डर से वो शख्स गोपनीय राज भी बता देता है। कई देश हनी ट्रैप का प्रयोग दुश्मन देश से जुड़ा कोई अहम दस्तावेज या खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए अक्सर करते हैं और इसके लिए महिला जासूस को विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इन दिनों भारत के खिलाफ इसी हथियार का इस्तेमाल कर रही है। विगत में कई ऐसे मामले पकड़ में आए हैं जिसमें यह साफ हो गया है कि आईएसआई से जुड़ी महिलाएं फेसबुक पर भारतीय सेना के जवानों से दोस्ती गांठ कर अहम जानकारी जुटाने की फिराक में थी। ज्ञात हो कि फेसबुक पर हुई इस दोस्ती में कभी भी सामने वाले की असलियत पता नहीं चल पाती। ठीक इसी प्रकार हनी ट्रैप में भी असली पहचान कभी जाहिर ही नहीं होती। इन मामलों में शिकार लोगों को सच्चाई क्या है इसका का इल्म उस वक्त होता है कि वो हनी ट्रैप में फंस चुका होता है।