हम हैं भारतवासी

हम हैं भारतवासी, नहीं किसी से घबराते हैं
अमन चैन की बातें करते विश्व का कल्याण चाहते हैं
भारत है फूलों का गुलशन, इसमें हम लहर-लहर लहराते हैं
प्रेम से रहते सब हिल-मिलकर, गीत खुशी के गाते हैं
वेद-पुराण, रामायण-गीता सभी हमें यही पाठ पढ़ाते हैं
ऊंचे-ऊंचे पर्वत, कल-कल करती नदियां
और झरने संगीत मधुर सुनाते हैं
संस्कृत और संस्कारों की खान है भारत
यहां पशु-पक्षी, जानवर भी सम्मान से पूजे जाते हैं
मानवता के पुजारी हैं हम, यहां मानव, मानव को शीश नवाते हैं
तिरंगा झंडा जान है हमारी, इसकी शान में हम जन-मन-गण गाते हैं
भारत माता के जय के नारों के संग
‘जय जवान जय किसान’ के नारे हमीं लगाते हैं
यह है भारत देश हमारा, यहां पत्थर भी पूजे जाते हैं
धरती को कहते हैं मां, गाय को माता
नारी की तो मत पूछो, कितना दिया जाता सम्मान यहां
हम हैं भारतवासी, नहीं किसी से घबराते हैं
अमन-चैन की बातें करते, विश्व का कल्याण चाहते हैं।
-विजय कुमार अग्रवाल, वसई

लोकतंत्र का गला घोंट रही हैं ममता
पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में शारदा चिट फंड मामले के बारे में पूछताछ के लिए गई सीबीआई को ममता बनर्जी ने पहले रोका उसके बाद सीबीआई के आला अधिकारियों को हिरासत में ले लिया। उसके बाद पुलिस कमिश्नर के साथ धरने पर ममता बनर्जी बैठ गर्इं। लोकतंत्र की दुहाई देनेवाली ममता बनर्जी जिस तरह से एक अदने से पुलिस अधिकारी को बचाने का काम कर रही हैं क्या इसको लोकतांत्रिक कहा जा सकता है? चिटफंड घोटाले में पश्चिम बंगाल के लाखों-करोड़ों गरीबों का पैसा है। ममता बनर्जी को घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए, न कि घोटालेबाजों का साथ देना चाहिए। इससे बढ़कर दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को आदेश दिया है कि शारदा चिट फंड घोटाले के बारे में ईमानदारी के साथ सीबीआई द्वारा पूछताछ में सहयोग करें। इसके अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हेलिकॉप्टर ममता ने पश्चिम बंगाल में उतरने की इजाजत नहीं दी। क्या इसको ममता दीदी की दादागीरी नहीं कहेंगे? ममता जी बताएं कल आप किसी काम से यूपी में आएं और सीएम योगी आपको यूपी में घुसने न दें तो आपको वैâसा लगेगा? ममता अपने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, कोई भी व्यक्ति कहीं भी जा सकता है। ममता आप किसी को रोक नहीं सकतीं। ममता दीदी आप तानाशाही कर रही हैं जो कि लोकतंत्र के खिलाफ है। दूसरे शब्दों में कहें तो इसे ममता का राजनीतिक दिवालियापन ही कहा जाएगा।
-श्यामनारायण मिश्र, मुंबई