" /> हरफनमौला कलाकार…!

हरफनमौला कलाकार…!

किशोर कुमार एक ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने हिंदुस्थानी संगीत को एक नया आयाम दिया। कमाल के गायक होने के साथ ही वे एक्टर, डायरेक्टर, लिरिक राइटर, कंपोजर, निर्माता-निर्देशक क्या नहीं थे? उन्हें ऑल राउंडर कलाकार कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उनके गाए गीतों को सुनकर श्रोता आज भी झूम उठते हैं। फिर चाहे गाना कोई भी हो, रोमांटिक, सैड, चुलबुला या फिर कोई हल्का-फुल्का। उनके सुरों में ढलकर गीत इतिहास रच देते थे। वैसे तो के.एल. सहगल भक्त किशोर कुमार इंडस्ट्री में गायक बनने के लिए आए थे पर किस्मत ने उन्हें हीरो बना दिया। अपनी फिल्मों के गाने वे खुद ही गाया करते थे। किशोर का मन एक्टिंग में नहीं लगता था और काफी समय ये सोचने में ही बीत गया कि किशोर एक्टर हैं, डायरेक्टर हैं, लिरिक राइटर हैं या फिर सिंगर। किशोर दा ने इंडस्ट्री के सभी दिग्गज फिल्मकारों और संगीतकारों के साथ काम किया इसके बावजूद लोग उन्हें सिंगर नहीं, नौटंकीबाज मानते थे। लेकिन किशोर के जीवन में संगीतकार एस.डी. बर्मन का बहुत बड़ा योगदान रहा। पहली ही मुलाकात में बर्मन दादा की आवाज में गाना गाकर किशोर कुमार ने उन्हें अचंभित कर दिया। फिल्म ‘गाइड’ में बर्मन दादा के संगीत में गाया गीत ‘गाता रहे मेरा दिल…’ लोगों के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ गया। फिल्म ‘आराधना’ से राजेश खन्ना सुपरस्टार बने तो लोगों ने किशोर कुमार की गायकी का भी लोहा माना। फिर अमिताभ बच्चन हों या राजेश खन्ना या फिर ऋषि कपूर सभी के लिए किशोर की आवाज इस्तेमाल की जाने लगी। हर तरफ किशोर कुमार छा गए। उनकी आवाज गली-मोहल्ले में गूंजने लगी।
फिल्म इंडस्ट्री में किशोर कुमार के अनेक किस्से मशहूर हैं। खैर, किशोर दा का जिक्र छिड़ते ही लता मंगेशकर बीते दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि एक दिन सलील चौधरी के संगीत निर्देशन में एक डुएट की रिकॉर्डिंग खत्म कर वे स्टूडियो से घर जाने के लिए निकल रहीं थीं। तभी सलील दा ने उन्हें रोकते हुए कहा, ‘लता, अगला गाना फिल्म ‘हाफ टिकट’ (१९६२) का रिकॉर्ड होना है, जिसे किशोर रिकॉर्ड कर रहा है, तुम उसे सुनकर ही घर जाना।’ लता मंगेशकर को घर जाने की जल्दी थी लेकिन वो भला सलील दा को रुकने के लिए कैसे इंकार कर सकतीं थीं। वे स्टूडियो में ही रुक गर्इं। थोड़ी देर में किशोर कुमार का आगमन हुआ। लता जी को वहां मौजूद देखकर किशोर कुमार ने उनका हाल-चाल पूछा और लता जी को चुटकुले सुनाने लगे। कुछ देर तक हंसी-ठिठोली और चुहलबाजी करने के बाद किशोर कुमार रिकॉर्डिंग रूम में दाखिल हुए और गाने की रिकॉर्डिंग शुरू हो गई। लता मंगेशकर कहती हैं कि ‘जब किशोर कुमार ने गाना शुरू किया तो रिकॉर्डिस्ट, असिस्टेंट्स, सलील दा सहित हम सबने हंसते-हंसते अपना पेट पकड़ लिया। हम सबका हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया। उस दिन हम सब बहुत हंसे थे। मैं ये देखकर चौंक गई थी कि किशोर कुमार एक ही समय में लड़की और लड़के दोनों की आवाज में ‘आके सीधी लगी दिल पे कटरिया ओ सांवरिया…’ बड़ी आसानी और सहजता से गा रहे थे। उन्होंने जिस तरह इस गाने को निभाया वो कमाल सिर्फ और सिर्फ किशोर कुमार ही कर सकते थे दूसरा कोई और अन्य नहीं।’
लता जी का कहना सच है ना उन-सा कोई हुआ है और ना उन-सा कोई होगा। टैलेंट के चलते-फिरते खजाने किशोर कुमार, मध्य प्रदेश की मिट्टी से जुड़े थे। वो वहीं पैदा हुए, वहीं पले-बढ़े और कला का सूरज बनकर कुछ ऐसा चमके कि आज जब वो नहीं रहे, तब भी उनकी धूम बरकरार है…!