हर मां सुरक्षित है, मातृ मृत्यु दर में आई कमी

बच्चा अपने जन्म के बाद जब बोलना सीखता है तो सबसे पहले जो शब्द वह बोलता है वह होता है `मां’। पर दुनिया में ऐसे भी किस्मत के मारे कई बच्चे हैं, जो जन्म के बाद अपनी मां के दर्शन तक नहीं कर पाते। ऐसे में मनपा द्वारा किए गए प्रयासों से ये बच्चे गर्व से कह सकते हैं `हर मां सुरक्षित है’।
बता दें कि हर साल अपने बच्चों को जन्म देते हुए हजारों मां पूरे देश भर में प्रसव पीड़ा और अन्य बीमारियों से जूझते हुए दुनिया को अलविदा कह चलती हैं। ऐसे में बच्चे का पालन-पोषण बिना मां के सही ढंग से नहीं हो पाता है। मातृ मृत्यु दर में कमी हो और हर बच्चे को अपनी मां का प्यार मिले, इस तरह के प्रयास में मनपा लगातार जुटी रहती है। परिणामस्वरूप इस साल, पिछले साल की तुलना से मातृ मृत्यु दर में भारी कमी देखने को मिली है। मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पद्मजा केसकर ने बताया कि साल २०१७-१८ के बीच मुंबई में कुल १३१ और मुंबई के बाहर १०९ महिलाओं का बच्चे को जन्म देते समय देहांत हो गया। इसमें १९ से २५ आयु की १२० महिलाएं हैं, वहीं २६ से ३५ की १०८ और ३५ से अधिक आयु की १२ महिलाएं हैं। इसी के साथ साल २०१६-१७ में कुल २८८ महिलाओं का देहांत हुआ। जिसमें १४४ मुंबई और १४४ महिलाएं मुंबई के बाहर की थी। डॉ. पद्मजा का कहना है कि मनपा द्वारा मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सभी अस्पतालों को विभिन्न सुझाव दिए गए हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है।
इसके अलावा एनीमिया को रोकने के लिए किए गए प्रयासों से एनीमिया से होनेवाली मृत्यु दर भी घटी है। मनपा द्वारा दी जानेवाली एंबुलेंस-१०८ का भी इसमें बाड़ा योगदान है।