हवा में उड़ गए रु. ५०० करोड़

लोकसभा चुनाव २०१९ को जीतने के लिए सभी पार्टियां दमखम के साथ मैदान में उतरी हैं। ऐसे में पार्टियों के दिग्गज नेता देश के भ्रमण पर हैं। सब इसी होड़ में हैं कि वे कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें और उन्हें संबोधित करें। ऐसे में इस इच्छा को उड़न खटोला यानी हेलिकॉप्टर ही पूरा कर सकता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले ५ सालों में चली चुनावी बयार में लगभग ५०० करोड़ रुपए हवा में उड़ गए हैं। नेताओं द्वारा हेलिकॉप्टर से आवागमन काफी बढ़ गया है।
बता दें कि २०१९ का लोकसभा चुनाव ७ चरण में होना है, जिसमें से ४ चरण निपट चुके हैं। देश में २९ राज्य और ७ केंद्र शासित प्रदेश हैं। ऐसे में आप अनुमान लगा सकते हैं कि नेताओं द्वारा एक राज्य से अनेक जिलों तक पहुंचने और लोगों को संबोधित करने के लिए कितनी सभाएं लेनी पड़ती हैं। समय की बचत और अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए सबसे सुगम साधन हेलिकॉप्टर बना हुआ है। ऐसे में निजी हेलिकॉप्टर की सेवा प्रदान करनेवाली कंपनियों की अच्छी आमदनी हो रही है। छोटे हेलिकॉप्टर का किराया ६५ हजार से ७० हजार रुपए प्रति घंटा होता है जबकि बड़े हेलिकॉप्टर का किराया लगभग २ लाख ७० हजार रुपए से लेकर ३ लाख रुपए प्रति घंटे के हिसाब से लगाया जाता है। नागरी विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की मानें तो १९९३ में गैर अनुसूचित ऑपरेटर की संख्या ११ थी, जो २०१७-१८ में बढ़कर १०९ हो गई है। यानी पहले मात्र २७ उड़न खटोले थे लेकिन अब इसकी संख्या बढ़कर ३४९ हो गई है। वर्ष २०१७-१८ में इन उड़न खटोलों ने लगभग १५ लाख ३९ हजार सवारियों को अपने गंतव्य तक पहुंचाया है। नेताओं को किराए पर हेलिकॉप्टर की सेवा प्रदान करनेवाली एक कंपनी के कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चुनाव के दौरान हेलिकॉप्टर के रेट्स में ५ से १० प्रतिशत का इजाफा भी होता है। प्रचार के लिए काफी डिमांड बढ़ जाती है क्योंकि हेलिकॉप्टर ग्रामीण क्षेत्र में खुले मैदान में भी आराम से लैंडिंग करता है।