हाय गरमी

गरमी जीवन का लक्षण है। सूर्य गर्म गैसों का गोला है जो अनंत काल से हमारी पृथ्वी को गरमी प्रदान कर रहा है। इसी गरमी के कारण जीव-जंतु और पेड़ पौधे पनपे। यह गरमी न होती तो जीवन का पनपना असंभव हो जाता। करोड़ों साल पहले जब एक धूमकेतु पृथ्वी से टकराया और धूल के विशाल बादल ने सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने न दिया, तब धरती पर भयानक शीत युग के प्रकोप ने डायनासोर नामक विशालकाय जीवों का समूल नाश कर दिया। धरती सदैव से एक चक्र के रूप में क्रमश: ठंडी-गरम होती रहती है। फिलहाल हम ग्लोबल वार्मिंग का दंश झेल रहे हैं। धरती के तापमान में दिनों-दिन बढ़ोत्तरी हो रही है और जीवों का रहना मुश्किल होता जा रहा है। हमने खुद पर्यावरण का बाजा बजा दिया है। प्राकृतिक संसाधनों के अंधा-धुंध दोहन, वृक्षों की कटाई और जल के दूषित करण ने पृथ्वी पर जीवों को संकट में डाल दिया है। अपनी अदम्य लालसाओं के लालच ने मनुष्य को पशुओं से भी गया बीता बना दिया है। जो गरमी जीवन के लिए आवश्यक है, अब वही जीवन लील रही है। गरमी कई चीजों की होती है। किसी के पास बाहुबल की गरमी होती है तो कोई धन की अधिकता से बौराया घूमता है। कोई क्रोध के वश होकर दिमाग गरम किए घूमता है। जब मनुष्य के हाथ-पांव ठंडे पड़ने लगते हैं, तब वह जीवन से दूर जा रहा है, ऐसा माना जाता है। गरमी ही जीवन का लक्षण है। गरमी जोश और पुरुषार्थ का भी प्रतीक है लेकिन आज यही गरमी हमें मृत्यु और विनाश की ओर धकेल रही है। अगर मनुष्य ने अपनी जरूरतें कम नहीं की और दुनिया पर अपने लालच का बोझ लादना बंद न किया तो वह दिन दूर नहीं जब पृथ्वी इतनी गरम हो जाएगी कि इस पर से जीवन का नामोनिशान मिट जाएगा। धरती पर गरमी बढ़ाकर मनुष्य अपने साथ-साथ अरबों-खरबों जीवों की हत्या का भी अपराध करेगा।