हिंदी का सूर्य

हिंदी
तुलसी के मानस की बात है निराली,
हिंदी के बिरवा की देखो झूम रही डाली।
प्रेम, प्यार, अपनापन
हंसी, खुशी, ठहाकों
से भरा, आंचल, यौवन
मधुर-मधुर गीत रस से भरी जिसकी प्याली।
हिंदी के बिरवा की देखो झूम रही डाली।।
बहनों का प्यार मिले
भाई का दुलार मिले
हिंदी वह वटवृक्ष
जहां बैठ शीतल-सी छांव मिले
मिल-बैठ साथ-साथ सबको लेकर चलनेवाली।
हिंदी के बिरवा की देखो झूम रही डाली।।
रसखान के सवैये हों
या कबीर के हों दोहे
मीराबाई के भक्ति-भजन
दर-दर ही सोहें
रसवंती, गुणवंती, चित हरनेवाली।
हिंदी के बिरवा की देखो झूम रही डाली।।
क्यों नहीं गुणगान करें?
हृदय से बखान करें
इस अटूट बंधन को
और भी महान करें
‘उर्वशी’, ‘कामायनी’, ‘गोदान’, ‘दोहावली’।
हिंदी के बिरवा की देखो झूम रही डाली।।
-विद्यासागर यादव, सानपाड़ा, नई मुंबई

हिंदी का सूर्य
उदय होगा हिंदी का राज, तब समझो पूर्ण स्वराज्य,
खिलेगा तब हिंदुस्थान का भाग्य, राष्ट्र का होगा फिर सौभाग्य।
हिंदी का सफर ये लंबा है, इसको हमने नाप लिया,
रोक न सकेगा कोई हमें,ये हम सबने भाप लिया।
हिंदी बस बहती धारा है, कई बहनों का सहारा है,
राष्ट्र प्रगति के मंजिल का, यही बस एक सहारा है।
अब न ही भगीरथ होगा, न कोई क्रांतिकारी सेनानी,
हमको अपने ही हाथों से, लिखनी होगी नई कहानी।
दासी नहीं है यह घर की, यह तो जग की महारानी,
गढ़ने वाले गढ़ते रह जाएं, इसकी तो अपनी कहानी।
अंग्रेजी की क्या रहे बिसात, न डाले उसको घास-पात,
हिंदी की तो है गौरव गाथा, इसका तो जग से है नाता।
विश्व की सबसे बड़ी भाषा, करोड़ों के दिल की है आशा,
आओ आज हम इकरार करें, हिंदी को दिल से प्यार करें।
कोई न हो मन में निराशा, हिंदी से हम सबको आशा,
हिंदी का सूर्य जगमगाएगा, हिंदुस्थान का भाग्य खिल जाएगा।
-डॉ. राजेश्वर उनियाल, मुंबई