हिंदुस्तान से पाकिस्तान का सफर…!!!

हमारी फिल्मों ने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक सितारे दिए। उन सितारों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि उन्हें उंगलियों पर गिनना किसी के लिए भी आसान काम नहीं है। इनमें कुछ सितारे ऐसे भी हैं जो देश विभाजन के बाद हिंदुस्तान छोड़कर पाकिस्तान चले गए। पाकिस्तान जानेवाले सितारों में एक चाइल्ड आर्टिस्ट भी था, जिसने ‘बैजू बावरा’, ‘दो बीघा जमीन’, ‘बूट पॉलिश’, ‘अंगारे’, ‘जागृति’, ‘बहुत दिन हुए’ जैसी फिल्मों में बाल कलाकर की भूमिका निभाई थी। उसकी एक्टिंग और मासूम चेहरे ने दर्शकों का दिल जीत लिया। १९ मार्च, १९४१ में देश विभाजन से पहले अजमेर में जन्में इस चाइल्ड आर्टिस्ट का नाम था रतन कुमार, जिसका असली नाम था सय्यद नाजिर अली रिजवी। वे ५० के दशक के बेहद पॉप्युलर चाइल्ड आर्टिस्ट थे।
१९५४ में उनकी फिल्म आई थी ‘जागृति’, जिसमें उन पर फिल्माया गया गाना ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की…’ और ‘दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल…’ बेहद मकबूल हुए थे। बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट वो मशहूर हो ही रहे थे कि उनके पिता ने पाकिस्तान जाने का पैâसला कर लिया क्योंकि बतौर हीरो रतन इंडस्ट्री में अपने पैर नहीं जमा पा रहा था।
रतन कुमार ने पाकिस्तानी फिल्मों में ढेर सारे रोल किए लेकिन एक महत्वपूर्ण रोल उन्होंने फिल्म ‘बेदारी’ में निभाया, जो भारतीय फिल्म ‘जागृति’ का ही रीमेक थी। उस पाकिस्तानी फिल्म ‘बेदारी’ में फिल्म ‘जागृति’ के गाने ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं…’ को उसी धुन के साथ जस-का-तस इस्तेमाल किया गया था बस गीत के बोल बदल दिए गए थे। ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की…’ की जगह ‘आओ बच्चों सैर कराएं तुमको पाकिस्तान की…’ कर दिया गया, जो पाकिस्तान में खूब चला। ‘बेदारी’ को उनके भाई वाजिर अली रिजवी ने प्रोड्यूस किया था। १९५९ में आई पाकिस्तानी फिल्म ‘नागिन’ में पहली बार उन्होंने बतौर हीरो काम किया। फिल्म में उनकी हीरोइन थीं नीलो। बतौर हीरो रतन कुमार लंबी पारी नहीं खेल पाए क्योंकि उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होती चली गर्इं। १९७७ में उनकी ४ वर्षीया बेटी की मृत्यु एक सड़क हादसे में लाहौर में हो गई। बेटी की मौत से वे इतने दुखी और गमगीन हो गए कि पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री छोड़ वे यूरोप जाकर बस गए। १२ दिसंबर, २०१६ को फेफड़े की बीमारी के चलते वैâलिफोर्निया में उनका निधन हो गया।