हिंदुस्थान बन रहा निवेश फ्रेंडली

कई बार मंदी निवेश के कई अवसर लेकर आती है। निवेशकों की कई श्रेणियां होती हैं, जो मंदी के मौसम में ही सक्रिय होती हैं और वह तब ही सक्रिय होती हैं जब खरीददारी और खर्चा करने में जब बाजार में भाव कम चल रहा हो। यह एक आर्थिक चक्र का हिस्सा है, इस तरह के निवेशक ऐसे सुनहरे निवेश के क्षणों के इंतजार में रहते हैं। मैं यह सब बातें मंदी के महिमामंडन के लिए नहीं कर रहा हूं, ये सब बातें इसलिए कर रहा हूं कि नाउम्मीदी के दौर में भी उम्मीद होती है निराशाजनक परिस्थितियों में भी निवेश के अच्छे अवसर छुपे होते हैं और उससे निकलने की राह अगर दिखे तो उस पर काम करना चाहिए और ऐसा दिख रहा है कि भारत सरकार लगातार वैसे प्रयास कर रही है। अभी पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो कॉर्पोरेट टैक्स रेट की परिवर्तित दर की घोषणा की, उसने हिंदुस्थान को टैक्स के लिहाज से पसंदीदा देश की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। पूरे देश में जीएसटी लगाने से भी टैक्स की परिभाषाओं को समझने की जो सहूलियतें मिलीं और फेसलेस स्क्रूटिनी की जो सुविधा शुरू हुई उसका सबने स्वागत किया। इस फेसलेस स्क्रूटिनी से असेसमेंट अधिकारी और करदाताओं का मानवीय संपर्क खत्म हो जाएगा। बड़े स्तर पर काम होने से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा। करदाताओं के लिए कानून का पालन बढ़ेगा। पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ेगी। असेसमेंट की गुणवत्ता, विशेषज्ञता और मॉनिटरिंग सुधरेगी और मामले तेजी से निपटेंगे। नेशनल ई-एसेसमेंट केंद्र की स्थापना आयकर विभाग का बेहतर कर सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हिंदुस्थान की जो छवि टैक्स आक्रामकता बनी हुई थी, वो अब पिघल रही है। दुनिया में अब हिंदुस्थान टैक्स टेररिज्मवाला देश नहीं रहा, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों और हिंदुस्थानी डायस्पोरा के निवेशक जो अपने देश के लिए और उसमें से बहुतेरे जो अपने गांव या अपने जिले के लिए करना चाहते हैं की निगाहें अब हिंदुस्थान को ओर हैं। हिंदुस्थान में अब देशीr कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की प्रभावी दर सभी प्रकार के सेस और सरचार्ज लेकर २५.१७ फीसदी हो गई और यदि कोई देशी कंपनी किसी भी प्रकार की आयकर छूट नहीं ले रही है, तो उसका कॉरपोरेट टैक्स दर २२ फीसदी हो गया। साथ ही २२ फीसदी टैक्स का विकल्प चुननेवाली कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) नहीं देना होगा। साथ ही नए निर्माण कारखानों को आकर्षित करने की जो रणनीति हिंदुस्थान ने अपनाई है, वह कारगर होती दिखेगी। नई रणनीति के तहत एक अक्टूबर के बाद स्थापित हुई नई घरेलू मैन्युपैâक्चरिंग कंपनी की कॉरपोरेट टैक्स रेट १५ प्रतिशत हो गई है। ऐसी नई कंपनियों के लिए सभी सरचार्ज और सेस लगाने के बाद नई मैन्युपैâक्चरिंग कंपनी के लिए टैक्स की प्रभावी दर १७.०१ फीसदी हो जाएगी। सरकार ने नए उद्योगों को लुभाने हेतु अब कंपनियों पर लगाए जानेवाले मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) को भी खत्म कर दिया गया है लेकिन जो कंपनियां सरकारी इंसेंटिव का लाभ लेना चाहती है उन्हें मैट (मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स) देना होगा। सरकार ने इसकी भी दर घटा दी अब यह १५ फीसदी होगी, जो पहले १८.५ फीसदी थी।
हिंदुस्थान के इस कदम से विश्व में भारत की टैक्स साख खूब बढ़ी है और वैश्विक मैन्युपैâक्चरिंग ट्रेंड हिंदुस्थान की तरफ मुड़ने की संभावना है, जो मेक इन इंडिया के लिए अच्छा होगा। अभी चीन में कॉरपोरेट टैक्स की मानक दर २५ फीसदी है। यदि कोई कॉर्पोरेट चीन की सरकार द्वारा प्रोत्साहन के लिए चिह्नित क्षेत्रों में कारोबार करता है तो उसके लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर १५ फीसदी की जा सकती है। हालांकि यह हिंदुस्थान की तुलना में जहां सभी नई यूनिट को १५ प्रतिशत की दर दी गई है। चाइना की १५ प्रतिशत की दर काफी प्रतिबंधित है और चीन में इसमें प्रोत्साहनवाले क्षेत्रों में नई व अत्याधुनिक तकनीक और कुछ खास एकीकृत सर्किट का उत्पादन ही शामिल है। अमेरिका चीन के बीच जो ट्रेड वॉर शुरू हुआ है हिंदुस्थान अपनी ताबड़तोड़ नीतियों के कारण उसको भुनाने की स्थिति में है। सैमसंग ने चीन में अपना प्लांट बंद करने के बाद दक्षिण कोरिया की यह दिग्गज कंपनी हिंदुस्थान में कारोबारी विस्तार की योजना बना सकती है। यह कंपनी चीन में घरेलू कंपनियों के संरक्षण के कानून के कारण मिल रही कड़ी टक्कर में टिक नहीं पाई जबकि नोएडा में उसके लगे प्लांट के कारण उसे और उसके जैसी तमाम कोरियाई कंपनियों का भारत में जो परफॉरमेंस रहा है, उससे यह संकेत गया है कि भारत चीन से बेहतर है। अमेरिका हिंदुस्थान के सबसे बड़े एफडीआई निवेशकों में शामिल है और कॉरपोरेट टैक्स की दर को घटाकर २५.१७ फीसदी किए जाने का अमेरिकी कारोबारियों ने भी स्वागत किया है। गल्फ के हजारों डायस्पोरा निवेशक अब अपने- अपने जिले के विकास के लिए देश की तरफ मुड़ने की सोच रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अगर देखेंगे तो जो शीर्ष के १० मैन्युपैâक्चरिंग देश हैं, उनके यहां भी जो कर की प्रभावी दर है निर्माण कारखानों पर, वह वित्त मंत्री की इस घोषणा के बाद हमसे ज्यादा हो गई है मतलब चीन, यूनाइटेड किंगडम, कोरिया, इटली, जापान प्रâांस आदि देशों के कॉर्पोरेट इनकम टैक्स अब हिंदुस्थान के नए प्रभावी कॉर्पोरेट इनकम टैक्स १७ प्रतिशत से ज्यादा हो गए हैं और हिंदुस्थान की दर किफायती हो गई है। टैक्स की दर के हिसाब से सिंगापुर को टैक्स प्रâेंडली देश माना जाता है अब भारत की नई निर्माण यूनिट पर लगनेवाली १७ प्रतिशत की दर और सिंगापुर की दर समान हो गई है। ऐसी दशा में जो वैश्विक निवेशक हैं उनके लिए हिंदुस्थान अब नए ट्रेंड के रूप में सामने आएगा। विदेशी निवेशक भी अब महसूस कर रहे हैं कि हिंदुस्थान की सोच अब बदल रही है। हो सकता है कि इस बदलाव को वक्त लगे। अब हिंदुस्थानी सरकार को विदेशों में जाकर अपनी नीतियों का रोड शो करना चाहिए ताकि इस मौके का जल्द से फायदा उठा सके। टैक्स के इन सुधारों के साथ हिंदुस्थान के उद्यमी जिस नई औद्योगिक नीति का सालों से इंतजार कर रहे थे, उस नई औद्योगिक नीति को तैयार करने की कवायद भी अब शुरू हो गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से नई औद्योगिक नीति के लिए एक वर्विंâग कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी हिंदुस्थान को मैन्युपैâक्चरिंग हब बनाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नई नीति तैयार करेगी। इसमें राष्ट्रीय नीति बनाने के साथ-साथ जिलावार भी नीति बनाई जाएगी क्योंकि हर जिले का माहौल, भौगोलिक स्थिति वगैरह अलग-अलग होती है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से नई औद्योगिक नीति के लिए बनाई गई वर्विंâग कमेटी के अध्यक्ष डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के सचिव होंगे, वहीं इस कमेटी में सात राज्य सरकार के नुमाइंदों को भी जगह दी गई है। इन राज्यों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम एवं महाराष्ट्र भी शामिल हैं। इन सब सुखद संयोगों के बीच एक सुखद संयोग यह भी है कि उत्तर प्रदेश ने भी दो साल पहले अपनी सभी औद्योगिक नीतियों की समीक्षा कर उसे निवेश  फ्रेंडली बना दिया है। देश के बाकी प्रदेश भी उसी राह पर है।