" /> हिरासत में कमलनाथ के २ मंत्री, बागी विधायकों से मिलने बंगलुरु पहुंचे थे

हिरासत में कमलनाथ के २ मंत्री, बागी विधायकों से मिलने बंगलुरु पहुंचे थे

मध्य प्रदेश का सियासी पारा उफान पर पहुंच चुका है। कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने बंगलुरु पहुंचे कमलनाथ सरकार के २ मंत्रियों को कर्नाटक पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इससे मामला और गर्मा गया। ये मंत्री हैं जीतू पटवारी और लाखन सिंह। बंगलुरु के रिसॉर्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के विधायक ठहरे हुए हैं। रिसॉर्ट में पटवारी और लाखन के साथ पुलिस अधिकारियों की धक्का-मुक्की भी हुई। इन दोनों मंत्रियों के साथ बागी विधायक मनोज चौधरी के पिता नारायण चौधरी भी थे।
इस मामले में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने आरोप लगाया है कि मंत्री पटवारी के साथ मारपीट की गई। तन्खा ने कहा, ‘किस तरह से हमारे विधायकों को बंधक बनाकर अगवा कर लिया गया है। हम मप्र हाईकोर्ट जाते लेकिन ये कर्नाटक का मामला है और क्रॉस बॉर्डर इश्यू है, इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। बताएंगे कि देश का लोकतंत्र खतरे में है और भाजपा जो कर रही है, वह अपराध है। प्रजातंत्र पर इतना बड़ा हमला पहले कभी नहीं हुआ है। मप्र में कभी खरीद-फरोख्त नहीं की गई।’ दूसरी तरफ सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के २४ घंटे बाद मध्य प्रदेश की सियासत में नया चैप्टर जुड़ गया है। सरकार अल्पमत में आ चुकी है और भाजपा पूरा प्रयास कर रही है कि किसी तरह से बहुमत साबित करने को कहा जाए, जबकि कांग्रेस की कोशिश है कि पहले किसी तरह बागी विधायकों को वापस लाया जाए।
२२ विधायकों के बागी हो जाने के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में नजर आ रही है। भाजपा की पूरी कोशिश है कि किसी तरह से जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट हो जाए। अब वहां फ्लोर टेस्ट किस तरह किया जाए इसे लेकर पेंच फंस गया है। फ्लोर टेस्ट को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। भाजपा की मांग है कि १६ मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले ही दिन फ्लोर टेस्ट हो। कांग्रेस का कहना है कि जब तक विधायकों के इस्तीफे पर पैâसला नहीं हो जाता, फ्लोर टेस्ट संभव नहीं है।
स्पीकर एनपी प्रजापति ने इस्तीफा देनेवाले २२ विधायकों को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने को कहा है। स्पीकर एनपी प्रजापति ने छह विधायकों को शुक्रवार, ७ विधायकों को शनिवार और बाकी बचे ९ विधायकों को रविवार को उपस्थित होने को कहा है। स्पीकर ने कहा है कि हम फिजिकल वेरिफिकेशन करना चाहते हैं कि विधायकों ने स्वयं इस्तीफा दिया है न कि किसी के दबाव में आकर।

यह अंदर की बात है!
कांग्रेस में चल रहे घमासान पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसे कांगे्रस के अंदर की बात बताते हुए कहते हैं कि इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। शिवराज कहते हैं, ‘वास्तविकता यह है कि जो सरकार अल्पमत में है, वह वैâसे राज्यपाल का अभिभाषण करा सकती है।’ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में संवैधानिक संकट की स्थति पैदा हो गई है। राज्यपाल सदन में सरकार का अभिभाषण पढ़ते हैं। सरकार अल्पमत में है तो किसका भाषण पढ़ेंगे? राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के पास २२ विधायकों के इस्तीफे पहुंच चुके हैं। हम राज्यपाल और अध्यक्ष से निवेदन करेंगे कि पहले फ्लोर टेस्ट हो फिर राज्यपाल का अभिभाषण।
इस मामले में दिग्विजय सिंह ने कहा कि कमलनाथ सरकार ‘फ्लोर टेस्ट’ के लिए तैयार है, लेकिन जब तक विधायकों के इस्तीफों पर पैâसला नहीं होगा, फ्लोर टेस्ट वैâसे होगा? जब तक विधायक स्वयं अध्यक्ष के सामने उपस्थित नहीं होंगे, इस्तीफे पर निर्णय वैâसे लिया जा सकता है?