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`होनहार एक्टर थे सुशांत!’-मीता वशिष्ठ

`चांदनी’, `गुलाम’, `ताल’, `माया’, `यंगिस्तान’ जैसी दर्जनों फिल्मों में काम करनेवाली मीता वशिष्ठ ने `स्वाभिमान’, `कहानी घर घर की’, `तृष्णा’, `भारत एक खोज’ जैसे सफल धारावाहिकों में भी काम किया है। लेफ्टिनेंट कर्नल की बेटी मीता वशिष्ठ हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज `योर ऑनर’ में पंजाब पुलिस अफसर किरण सेकू के किरदार में नजर आईं। पेश है बहुमुखी प्रतिभा की धनी मीता वशिष्ठ से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

लॉकडाउन के दौरान आप अपना समय वैâसे व्यतीत कर रहीं हैं?
जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो एक्साइटमेंट के साथ ही मन में कहीं थोड़ी निराशा और घबराहट भी थी। शुरुआत में लगा कि लॉकडाउन को सभी झेल लेंगे। लेकिन जैसे-जैसे लॉकडाउन बढ़ता गया चिंताएं भी बढ़ती गईं। लॉकडाउन के दौरान मैंने ढेर सारी किताबें पढ़ीं और अपना खयाल रखा। हां, इरफान खान के देहांत के बाद मैं उनके फ्यूनरल में शामिल हुई थी क्योंकि इरफान एनएसडी में हमारे साथ थे।

`योर ऑनर’ शो में आपकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
पंजाब की ये पुलिस अफसर किरण सेकू बहुत डैशिंग है। किरण सिंगल मदर है। कहानी और किरदार के बारे में मैं इससे ज्यादा और डिटेल नहीं दे सकती। ई. निवास एक सुलझे और शांत स्वभाव के निर्देशक हैं। बहुत यादगार रहा `योर ऑनर’ में काम करना।

करियर के उतार-चढ़ावों ने क्या आपको विचलित नहीं किया?
३०-३२ वर्षों के करियर में उतार-चढाव तो आना लाजिमी है। कभी दमदार रोल मिले तो कभी बिल्कुल नहीं मिले। कभी अच्छे रोल मिले भी तो उन पर वैंâची चल गई। हर तरह के अनुभवों से गुजरी हूं मैं। बहुत निराश और कई बार विचलित हुई हूं। निराशा भरे दौर आते-जाते रहे क्योंकि निराशा में भी आशा थी। मैंने किसी मेकर की चापलूसी नहीं की। ये मेरे स्वभाव में ही नहीं है। मुझे मेरी योग्यता के अनुसार फिल्मों में काम नहीं मिला। इस मुद्दे पर मेरा झगड़ा सिर्फ भगवान से होता है। मैं भगवान से कहती हूं कि अगर तूने टैलेंट दिया है तो मुझे भी काम दो।

अच्छा…?
हां, जब रोल मिलना कम होने लगा तो मैंने निर्णय लिया कि मैं अभिनय से ही जुड़ा काम करती रहूंगी जैसे एक्टिंग की वर्कशॉप्स लेना। एनआईडी (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजायनिंग) में भी एक्टिंग-फैशन रिलेटेड पढ़ाया। मैंने रिमांड होम में भी थिएटर वर्कशॉप्स किए। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एक्टिंग वर्कशॉप्स लिए। मुझे हर बार यह तसल्ली मिलती रही कि मैं एक्टिंग से जुडी हुई हूं। इन वर्कशॉप्स के जरिए मेरी थोड़ी कुंठा दूर हुई।

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म खुलकर सामने आ रहा है?
मैं अपने लंबे करियर में हमेशा खुश नहीं थी, जैसा कि मैंने आपको बताया कि काफी उतार-चढ़ाव आए। लेकिन मैंने निराशावादी अप्रोच नहीं रखा। सुशांत तो हैंडसम और टैलेंटेड थे, उन्हें भी उम्मीद रखनी चाहिए थी। राजनीति तो हर क्षेत्र में है। मैंने भी फिल्म इंडस्ट्री के महारथियों को भाव नहीं दिया। यही सोच रखी कि अगर मुझमें टैलेंट है तो काम भी मिलेगा। आत्मविश्वास टूटना नहीं चाहिए। सुशांत के जाने के बाद बहुत उदासी आई है। होनहार एक्टर थे सुशांत!