" /> होलिका को जलाना है कोरोना को हराना है!

होलिका को जलाना है कोरोना को हराना है!

आज रात बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन है। मुंबई समेत पूरे देश में होलिका दहन के बाद अगले दिन होली खेली जाएगी। इस बार कोरोना वायरस की दहशत पैâली है, ऐसे में होली खेलने के बारे में लोगों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
पंडित अंकित सीवान ने `दोपहर का सामना’ को बताया कि होली का मौसम बदलते ऋतु का मौसम है। यहां से गर्मी शुरू हो जाती है। जैसे ही गर्मी शुरू होती है पर्यावरण में मौजूद बैक्टेरिया व वायरस अपने आप कमजोर होने लगते हैं। होलिका दहन होने से पर्यावरण में जगह-जगह गर्मी का स्तर और बढ़ जाता है। होली में जो आम की लकड़ी, गाय के गोबर से बने उपले, घी, कपूर आदि डालने से पर्यावरण में जो सकारात्मक शक्ति बनती है, इससे बननेवाले धुएं से पर्यावरण में मौजूद घातक जीव-जंतु का नाश होता है। अच्छा बैक्टेरिया बुरे बैक्टेरिया को मारता है।
इसके अलावा पर्यावरण में बदलाव होता है और वातावरण शुद्धि अपने आप होने लगती है। हिंदू धर्म के जितने भी त्यौहार आते हैं, वह बदलते मौसम के दौरान ही आते हैं। होली, नवरात्रि, फागुन, श्रावण सब बदले ऋतु के दौरान ही आते हैं। ये एक अलर्ट होता है जिससे माना जाता है कि अब मौसम में बदलाव होनेवाला है, तो ऐसे में संभल जाओ!
बलात्कार के खिलाफ जागरूकता
पिछले साल की तरह ही इस साल भी सायन-कोलीवाड़ा स्थित आशिष कुचेकर व अमर कुचेकर बंधु ने १८ फुट ऊंची होलिका बनाकर समाज को संदेश देने का काम किया है। संदेश में इस बार `बलात्कार’ को आधार बनाया गया है। होलिका की मदद से सामाजिक संदेश में ये बताने की कोशिश की गई है कि पिछले कई सालों से महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। इसके खिलाफ जागरूकता पैâलाने के तहत ये कोशिश कुचेकर बंधु द्वारा की गई है। कुचेकर बंधु का कहना है कि चलो संकल्प लें कि रेप का खात्मा करेंगे। इस गुनाह के लिए फांसी ही एकमात्र सजा होनी चाहिए, जिसे देकर महिलाओं को खुली सांस लेने दें।