" /> होली आई रे…!

होली आई रे…!

कलियां खिल आई पेड़ों में
मकरंद सुगंध रस लगे चूसने
प्यारे-प्यारे फूलों से
सबका दिल बहलानेवाली
नए वर्ष के अभिनंदन में
होली आई रे वतन में होली आई रे।
अबकी जग में धूम मचाने
दुनिया से आतंक मिटाने
जनता का उल्लास जगाने
जाति-धर्म के नाम लड़ाने
वालों को धूल चटाने का
लिए शीश संदेश वतन में होली आई रे।
उठो चलो गुलाल लगाने
खुशियों की बौछार कराने
रंग-बिरंगी दुनिया में
हर जगत को एक समान बनाने
भेदभाव मिट जाए सबका
सब गाएं मिल मंगल गाने
मिल करके सब ऐसा रंग दें
कि कोई धोए जितना उतना चमके
निकले मुंह से उनकी तान
ये वैâसी होली आई रे?
वतन में होली आई रे।

-रत्नेश कुमार पांडेय, मुंबई

भूलूं नहीं आपको
प्रभु मेरे दिल में सदा याद आना,
दया करके दर्शन तुम्हारा दिखाना।
हे नाथ मैं आपको भूलूं नहीं,
भूला जब-जब आपको सुख न मिला।
अब कृपा ऐसी करो भूलूं नहीं आपको।।
विषयासक्ति मन की भुलावे आपको,
अब कृपा ऐसी करो भूलूं नहीं आपको।।
रखो आप चाहे कहीं किसी भी हाल में,
पर हे नाथ! भूलूं नहीं आपको।।
बिन कृपा आपकी ये संभव नहीं,
अब कृपा ऐसी करो भूलूं नहीं आपको।।
आपके दर्शन सदा सबमें करूं
ऐसी भाव दृष्टि देने की कृपा करो,
रखो आप चाहे कहीं किसी हाल में
पर हे नाथ! भूलूं नहीं आपको।।
-आर.डी. अग्रवाल ‘प्रेमी’, खेतवाड़ी