ॐ गं गणपतये नम:

मेरा जीवन बदल गया
हमें उम्मीद न थी कि
वो इतने काबिल होंगे,
मुलाकात हुई, सिलसिला बढ़ा
वो भी मुझसे रू-बरू हुए,
वाकई वो नेक हैं,
हर दिल अजीज हैं,
उनके सानिध्य से ही मुझमें,
ढेरों परिवर्तन हो गया,
यकीन मानिए, उम्मीद से भी ज्यादा
मेरा जीवन बदल गया।
देखने में सौम्य हैं,
व्यवहार से सरल हैं,
प्रतिबद्धता उनकी बुनियाद है
बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं,
नाम से ज्यादा काम को
हमेशा तवज्जो देते हैं,
मुझे पता भी नहीं चला कि
चंद दिनों में इतना बदलाव वैâसे आ गया?
यकीन मानिए, उम्मीद से भी ज्यादा
मेरा जीवन बदल गया।
न कोई प्रदर्शन है,
बस उनकी नजरों में दर्शन है,
काम का सलीका और
अंदाजे बयां ही उनकी पहचान है,
गूगल से ज्यादा ज्ञान की खान हैं,
समर्पण व प्रतिबद्धता ही उनकी शान है।
‘दिवाकर’ के ‘आलोक’ में मैं ढल गया।
मेरा जीवन बदल गया।

-डॉ. शिवम तिवारी, कोलाबा, मुंबई

ॐ गं गणपतये नम:
सुखकर्ता दु:खहर्ता गणाधीश
गणों के भंडार श्री गणेश जी को
कोटि-कोटि नमन-वंदन
बुद्धि के देवता कष्टों के संहारक
अनंत ज्ञान के भंडार
अनेक नामों से विभूषित
श्री गणेश जी को कोटि-कोटि नमन
माता-पिता का आदर करना
अज्ञानता को दूर कर ज्ञान पाना
सीखें हम सभी गणेश जी से
श्री गणेश जी के प्रत्येक अंग दे रहे हैं संदेश
छोटे-छोटे नेत्र बारीकी से परखना
नाक है प्रतिष्ठा का प्रतीक
कान अनर्गल बातों पर विश्वास न करना
अर्थात कान का कच्चा न होने का प्रतीक है
दांत खाने के और दिखाने के और
तथा निर्विघ्न कार्य संपन्न करने के लिए
भय दिखाने का प्रतीक है
जिह्वा से दूसरों की आलोचना न करना
और हमेशा सत्य वचन कहने का परिचायक है
लंबोदर सारी बातों को पचा लेना है
चार भुजाएं- अर्थ-धर्म-काम-मोक्ष को
प्राप्त करने का संदेश दे रही हैं
मूषक वाहन तुच्छ और साधारण लोगों से
सहयोग लेने का परिचायक है
इसलिए बार-बार कहना है
ॐ गं गणपतये नम:
-आर.डी. अग्रवाल ‘प्रेमी’ खेतवाड़ी, मुंबई

कामना
पति-पत्नी के बीच में सच्चे विश्वास की कामना है।
भाई-बहन के बीच में पवित्र भावना की कामना है।।
कामना की आवश्यकता हर रिश्तों में पड़ती है।
मां-बेटे के बीच अनमोल ममत्व की कामना है।।
बहन-बेटी अपनी होते हुए भी होती है पराई।
मां-बेटे को ही घर की बागडोर उम्र भर थामना है।।
बेटी-बहू ही फिर घर के लिए करती कामना है।
बेटा उम्र भर रहता है मां की नजरों के सामने।।
बेटे को ही बड़ा होकर पूरे घर को थामना है।
फिर मां-बाप के उम्र ढलने पर बेटे-बहू ही घर थामते हैं।।
फिर बूढ़े-बूढ़ी को रहती एक पोते की कामना है।
कामना इंसान की कभी खत्म नहीं होती है।।
हर अमीर-गरीब आदमी की अपनी-अपनी कामना है।।
-बिभाषचंद्र मस्ताना, दिवा

देश के वोट बैंक
वोट बैंक नहीं महज
इंसान भी जाने
उदरपूर्ति कारक अन्नदाता माने
आभार जताना चाहिए
उपकार बताना चाहिए
पेट भरते हैं हम सबका
देश के हर जीव का
पर रहे अफसोस
तमाशा बना के रख दिया
मौका परस्त नेताओं ने
गंदी खोखली मतलबी सत्ता
इन महापुरुष राजनीतिज्ञों के बेटाओं ने
बना के कठपुतली सा नचाते
खून के आंसू रुलाते
सियासी गलियारे में
चटकारे ले लेकर बेशर्म खिल्ली उड़ाते
दुखड़े रोए अब
जा किसके पास
हाथ पर हाथ धरे फकीरा
बैठ वैâसे छोड़े आस?
-प्रेम शंकर फकीरा, मुंबई